पंडित जवाहर लाल नेहरु प्रथम प्रधान मंत्री थे जिनका जन्म १८८९ में हुआ था | इन्होने गाँधी जी के साथ देश को आज़ाद कराने की लड़ाई में भाग लिया| सन १९४७ में देश अंग्रेजो की गुलामी से आजाद हुआ और वे १९४७ से लेकर १९६४ तक भारत के प्रधान मंत्री रहे | वे महान राजनेता के साथ-साथ एक महान लेखक भी रहे हैं | उनकी विशिष्ट रचनाये विश्व इतिहास की झलकियां, आत्मकथा और भारत की खोज आदि हैं |
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पुस्तक के विषय में
भारत की खोज उनकी अंगेजी में लिखी पुस्तक “Discovery of India” का हिंदी अनुवाद है | उन्होंने इस पुस्तक को स्वतंत्रता आन्दोलन के दौर में अहमदनगर के किले में अपने पांच महीने के कारावास के दिने में लिखा था |
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पाठ का सार
अतीत का भार
नेहरु जी को जब अहमदनगर के किले में लाया गया तो उस समय अंधियारे आकाश में दूज के चाँद में उनका स्वागत किया | शुक्ल पक्ष शुरू हो चुका था तब से जब भी नया चाँद उगता तो वह कारावास का एक महिना बीतने का आभास दिलाता नेहरु जी अनुसार “चाँद मेरे बंदी जीवन का सहचर रहा है | वही मुझे याद दिलाता है कि अँधेरे के बाद उजाला होता है | किले में उन्होंने अपने बागवानी के शौक को पूरा करने के लिए वहां की जमीन को जो कि पथरीली और मलबो के अवशेषों से भरी थी अत्यधिक परिश्रम करके जमीन को फूल उगने लायक बना दिया |
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नेहरूजी लिखते हैं कि अहमदनगर का इतिहास कोई बहुत पुराना नहीं है, न ही इसकी कोई विशेष अहमियत है| इस किले से जुडी चाँद बीबी नामक साहसी महिला की कहानी प्रसिद्ध है | इस महिला ने अकबर की शाही सेना के विरुद्ध अपने सेना का नेतृत्व किया उसकी हत्या उसके अपने ही आदमी ने कर दिया |
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जेल में बागवानी के लिए खुदाई करते समय नेहरुजी को जमीन की सतह के काफी नीचे पुरानी दीवारों के हिस्से, गुंबद और इमारतों के ऊपरी हिस्से मिले | जेल के अधिकारी आगे बढ़ने की अनुमति नहीं देते थे, इसलिए उन्होंने कुदाल छोड़कर कलम उठा ली | उन्होंने देश की आज़ाद होने तक लिखते रहने का निश्चय किया इसके लिए कर्म का अनुभव जरुरी था | वे पैगम्बर बन कर भविष्य के बारे में लिखने असमर्थ थे वे केवल वर्तमान विचारो और क्रिया कलापों के साथ सम्बन्ध स्थापित करके ही उसके बारे में कुछ लिख सकते हैं | अंग्रेज इतिहासकार गेटे के अनुसार “ऐसा इतिहास लेखन अतीत के भारी भोज से किसी सीमा तक राहत दिलाता है |
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अतीत का दबाव
मनुष्य के मस्तिष्क पर सभ्यता और संस्कृति की जो छाप रहती है, उसका दबाव उसे अच्छे और बुरे दोनों रूपों में प्रभावित करता है | जो लोग अपनी प्राचीन सभ्यताओ से जुड़े हैं, जब उनकी सभ्यता विकृत होती है वे जल्द ही विचलित हो उठते हैं |
नेहरूजी सोचा करते थे कि आखिर उनकी विरासत क्या है? वे किन बातो के उत्तराधिकारी हैं ? मानवता ने जिसे हजारों सालों में हासिल किया उसकी विजय का उल्लास, पराजय का दुःख, मानव के हैरत अंगेज साहसिक कार्य जो सभी को आकर्षित करते हैं इन सबके वारिस हैं | भारतीयों की विरासत में एक खास बात है जो हमे रक्त, मांस और अस्थियों में समाई है जिससे हमारा वर्तमान रूप बना हैं |