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बसंत कक्षा – 8 दीवानों की हस्ती

भगवतीचरण वर्मा

कृष्णा कुमारी

टी जी टी (हिन्दी)

जवाहर नवोदय विद्यालय

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दीवानों की हस्ती

काव्य पाठ

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दीवानों की हस्ती�काव्य पाठ

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कवि परिचय

कृष्णा कुमारी

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कविता का भाव

इस कविता में कवि मस्तमौला स्वभाव और बेफिक्री वाली जिंदगी को रूपांकित किया है।

सुख हो या दुख, हर स्थिति में एक समान ही रहना और सब जगह प्रेम बांटते जाना ही दीवानों का स्वभाव होता है।

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दीवानों की हस्ती�

  • हम दीवानों की क्या हस्ती,�हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले�मस्ती का आलम साथ चला,�हम धूल उड़ाते साथ चले।
  • दीवाने उन्हें कहते हैं जो हर हाल में मस्त रहते हैं। सुख या दुख का उनपर कोई गहरा प्रभाव नहीं पड़ता और वे वर्तमान काल में जीने में विश्वास करते हैं।

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दीवानों की हस्ती�

  • आये बनकर उल्लास अभी,�आंसू बनकर बह चले अभी�सब कहते ही रह गये अरे�तुम कैसे आये, कहाँ चले?
  • वे किसी जगह पर जाते हैं तो एक उल्लास की तरह सबमें जोश का संचार कर देते हैं। जब वे कहीं से जाते हैं तो आंसू की तरह जाते हैं। पीछे लोग अफसोस करते रह जाते हैं उनके चले जाने का।

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दीवानों की हस्ती�

  • किस ओर चले यह मत पूछो?�चलना है बस इसलिए चले�जग से उसका कुछ लिए चले�जग को अपना कुछ दिए चले
  • उनका काम होता है चलते रहना। दिशा कोई भी हो चलते रहने का नाम ही जिंदगी है। जो असली दीवाने होते हैं वो हमेशा संसार से कुछ लेते रहते हैं और बदले में उसे कुछ ना कुछ देते रहते हैं।

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दीवानों की हस्ती�

  • दो बात कही, दो बात सुनी�कुछ हँसे और फिर कुछ रोये�छककर सुख दुख के घूंटों को�हम एक भाव से पिए चले
  • वे लोगों से बातों के जरिये दुख सुख बाँटते हैं और सुख और दुख दोनों के घूँट छककर और मजा लेकर पीते हैं।

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दीवानों की हस्ती�

  • हम भिखमंगों की दुनिया में�स्वच्छंद लुटाकर प्यार चले�हम एक निसानी सी उर पर�ले असफलता का भार चले
  • कवि कहता है कि यह दुनिया वैसे लोगों से भरी पड़ी है जिनके दिल और दिमाग तंग होते हैं। प्यार बाँटने के मामले में अधिकतर लोग भिखारी की तरह होते हैं। लेकिन दीवाने अपना प्यार खुले हाथ से लुटाते फिरते हैं। 

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दीवानों की हस्ती�

  • अब अपना और पराया क्या?�आबाद रहे रुकने वाले�हम स्वयं बंधे थे और स्वयं�हम अपने बंधन तोड़ चले
  • इन पंक्तियों में कवि कहता है कि जब कोई दीवाना किसी स्थान या पड़ाव से आगे निकल पड़ता है तो वह अपने सारे बंधन तोड़ देता है। फिर उसके लिए अपने और पराये का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

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धन्यवाद

कृष्णा कुमारी

टी जी टी (हिन्दी)

जवाहर नवोदय विद्यालय