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BLESSINGS

ॐ ह्रीं अर्हम् नमः

श्रीसद्गुरुभ्यो नमः

ॐ ऐं नमः

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SHREE MATI GYANAY NAMAH

SHREE SHRUT GYANAY NAMAH

SHREE AVADHI GYANAY NAMAH

SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH

SHREE KEVAL GYANAY NAMAH

5 GYAN

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Inspired by:

Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekhar Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.

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Mahaveer Swami Bhav – 18,19 / Slide 29 - 38

Learn & turn part – 2 story NO 4

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PICTURE NO. 1

  1. पोतनपुर नगर में प्रजापति राजा की भद्राराणीने गर्भ के प्रभाव से ४ महास्वप्न देखे,

नव महिने के बाद में, पुत्र को जन्म दिया, माता पिता ने नाम रखा अचल ।

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Picture No. 2

२) राजा की दूसरी पत्नी मृगावती राणीने भी गर्भ के प्रभाव से ७ महास्वप्न देखे,

उन्होंने भी पुत्र को जन्म दिया और नाम रखा त्रिपृष्ठ ।

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Picture No. 3

३) एक दिन प्रजापति राजा के दरबार में प्रतिवासुदेव अश्वग्रीव राजा का दूत आया और राजा का आदेश सुनाया कि "साली नामके क्षेत्र में एक सिंह, प्रजा की हिंसा करता है,

किसी से भी परास्त नहीं होता है, इसलिए आपके पुत्र त्रिपृष्ठ को उस सिंह को मारने के लिए भेजो" ।

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PICTURE NO. 4

४) राजा प्रजापति ने बाद में अपने दोनों पुत्र को बुलाकर यह बात बताई,

पिताजी की आज्ञासे दोनो भाई अचल और त्रिपृष्ठ, सिंह को मारने के लिए निकले।

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Picture No. 5

५) यह सिंह पूर्वभव में विशाखानंदी का आत्मा था पूर्वभव में दोनों के बीच में वेरभाव था,

त्रिपृष्ठ बहुत ही पराक्रमी राजकुमार था, त्रिपृष्ठने सिंह का वध किया और अचल ने मरते हुए सिंह को सहानुभूति दिखाई,

प्रेमभरी बातें की, इसलिए सिंह को उनके प्रति प्रेम उत्पन्न हुआ ।

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Picture No. 6

६) प्रतिवासुदेव अश्वग्रीव राजाने जाना कि त्रिपृष्ठने सिंह का संहार किया।

किसी नैमितीकने राजा को बताया था कि जो राजकुमार सिंह का संहार करेगा, वही राजकुमार के हाथ से आपकी मृत्यु होगी।

इस लिए अश्वग्रीव राजा भयभीत हो गये और त्रिपृष्ठ राजकुमार पर क्रोधित हुए।

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Picture No. 7

७) त्रिपृष्ठ राजकुमार को मारने के लिए सैन्य भेजा, दोनों के बीचमें युद्ध हुआ,

त्रिपृष्ठने अश्वग्रीव राजा का संहार किया,

उस समय आकाश में से देव देवीने नये राजा त्रिपुष्ठ के ऊपर पुष्पवृष्टी की।

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Picture No. 8

८) त्रिपृष्ठ वासुदेव को संगीत का शोख था, एक दिन त्रिपृष्ठ वासुदेव संगीत सुन रहे थे,

साथ में उन्होंने शय्यापालक को आज्ञा की,

के मेरे सो जाने के बाद में संगीत बंद करवा देना।

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Picture No. 9

९) राजा को नींद आ गई, शय्यापालक भूल गया, संगीत चालु रहा, त्रिपृष्ठ की निंद बिगडी, गुस्सा आया,

शय्यापालक के कान में गरम शिसा का रस डलवाया, शय्यापालक वही पर मर गया।

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Picture No. 10

१०) अंतमे त्रिपृष्ठ वासुदेव मर के सातवी नरक में गये

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