नवोदय विद्यालय समिति, नोएडा
अध्याय-04
प्रस्तुतकर्ता-
डॉ. अनिल कुमार
टी. जी. टी. हिंदी
ज.न.वि. नलगोंडा
काव्यांश-1
शब्दार्थ-
भावार्थ-
शब्दार्थ-
काव्यांश-2
भावार्थ-
शब्दार्थ-
काव्यांश-3
भावार्थ-
शब्दार्थ-
काव्यांश-4
भावार्थ-
शब्दार्थ-
काव्यांश-5
भावार्थ-
शब्दार्थ-
काव्यांश-6
भावार्थ-
शब्दार्थ-
काव्यांश-7
भावार्थ-
शब्दार्थ-
काव्यांश-8
भावार्थ-
सरल,आडंबरहीन,विशुद्ध खड़ी बोली की रचना मनुष्यता प्रसिद्ध कवि श्री मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित है| इस कविता में कवि ने मनुष्य को निजी –स्वार्थ संबंधों से ऊपर उठकर परमार्थ हेतु जीने-मरने की प्रेरणा दी है| मानव की मृत्यु को सुमृत्यु बनाने का उन्होंने आह्वान किया है|मनुष्य यदि परोपकार, विश्वबंधुत्व, करुणा जैसे मानवीय गुणों को अपना ले तथा जाति-पाँति,धर्म–संप्रदाय की सीमाओं से ऊपर उठ जाए,तो वह देवत्व को प्राप्त कर सकता है| ऐसा मनुष्य ही सच्चा मानव कहलाने के योग्य है |
डॉ. अनिल कुमार
टी. जी. टी. हिंदी
ज.न.वि. नलगोंडा
***** धन्यवाद *****
आभार