कबीरदास
साखी - दोहे
Department of Hindi, KVRGDCW(A), �Cluster University Kurnool.
साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय, ��सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।
जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,��मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।
निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय,��बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।
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