लेखक परिचय: मीराबाई हिंदी साहित्य के भक्ति काल के कृष्ण भक्ति शाखा की प्रमुख कवयित्री हैं। इनके इष्ट देव श्री कृष्ण थे। ये कृष्ण की अनन्य भक्त थी। इनका जन्म 1498 में जोधपुर,राजस्थान में हुआ था।इनका स्वयं का जीवन बड़ा दुखमय रहा। इनका विवाह उदयपुर के महाराणा कुंवर भोजराज के साथ हुआ था जो उदयपुर के महाराणा सांगा के पुत्र थे।विवाह के कुछ दिन बाद इनके पति का स्वर्गवास हो गया।उन्हें पति के साथ सती करने का प्रयास किया गया लेकिन मीरा इसके लिए तैयार नहीं हुई।पति के परलोक वास के बाद इनकी भक्ति दिन प्रतिदिन बढ़ती चली गई। ये मंदिर में जाकर कृष्ण की मूर्ति के आगे नाचती गाती रहती।यह सब राज परिवार को अच्छा नहीं लगता। अतः घरवालों ने इन्हें अनेक कष्ट दिए। तथा विष देकर मारने की कोशिश भी की। परिणामतः घरवालों से परेशान होकर वे वृंदावन चली गई।
“भोर और बरखा”पाठ में मीराबाई द्वारा रचित दो पद हैं।पहले पद में मीराबाई ने ब्रज प्रदेश के भोर अर्थात सुबह का वर्णन किया है। दूसरे पद में सावन के बादलों द्वारा बरखा का उल्लेख किया गया है।
प्रथम पद में मीराबाई ने ब्रज प्रदेश के सुबह का बड़ा सुंदर वर्णन किया है।ब्रज प्रदेश में सुबह हो गई है और माता यशोदा श्री कृष्ण को जगा रही हैं।यशोदा अपने प्रिय कृष्ण को जगाते हुए कहती हैं कि हे बंसी वाले प्यारे कान्हा जाग जाओ। ऐ मेरे प्यारे लाल जागो क्योंकि रात बीत गई है,और सुबह हो गई है।सभी घरों के दरवाजे खुल गए हैं।ऐ मेरे लाल देखो गोपियों ने दही मथना शुरू कर दिया है।दही मथने से उनके कंगन की झंकार सुनाई दे रही है।
आगे माता यशोदा कहती हैं उठो मेरे लाल,सुबह हो गई है,देवता और मनुष्य तुम्हारे दर्शन के लिए द्वार पर खड़े हैं।तुम्हारे बाल सखा ग्वाले के बच्चे शोर मचा रहे हैं।और तुम्हारी जय जयकार कर रहे हैं। माता कहती हैं गो की रक्षा करने वाले वे बाल ग्वाल हाथों में मक्खन रोटी ले लिए हैं और तुम्हें बुला रहे हैं।मीरा कहती हैं मेरे प्रभु श्री कृष्ण गिरधर नागर है अर्थात गिरी को धारण करने वाले हैं। वे अपने शरण में आए हुए लोगों का उद्धार करते हैं।
दूसरे पद में मीरा ने सावन के बरखा के साथ-साथ श्री कृष्ण के आने की आहट का उल्लेख किया है।मीरा कहती हैं कि सावन के मन मोह लेने वाले बादल बरस रहे हैं।सावन के महीने में मीरा का मन एक विशेष उमंग से,आनंद से भर जाता है क्योंकि उन्हें श्री कृष्ण के आने की आहट सुनाई देती हैं। बादल उमड़ घुमड़ कर चारों दिशाओं से आते हैं।बिजली चमकने लगती है और ऐसा लगता है कि अब बरखा की झड़ी लगने वाली है।
बादलों से नन्हीं नन्हीं बूंदे बरस रही है और साथ ही ठंडी हवा चल रही है।अर्थात मौसम बड़ा सुहावना हो गया है।मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु श्री गिरिधर नागर हैं और वे उनके आने की खुशी में सुखद और मंगल गीत गा रही हैं।
शब्दार्थ :
प्रस्तुति:
वीणा कुमारी
टी. जी. टी. हिन्दी
ज. न. वि अररिया