BLESSINGS
ॐ ह्रीं अर्हम् नमः
श्रीसद्गुरुभ्यो नमः
ॐ ऐं नमः
SHREE MATI GYANAY NAMAH
SHREE SHRUT GYANAY NAMAH
SHREE AVADHI GYANAY NAMAH
SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH
SHREE KEVAL GYANAY NAMAH
5 GYAN
Inspired by:
Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekhar Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.
Kalikaal Sarvagna PART - 1
LEARN & TURN PART – 2 STORY NO 39
Kalikaal Sarvagna Part - 1
Learn & turn part 2 story no 39
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उसकी पत्नी का नाम पाहिनी था।
२) एक दिन पाहिनी ने सपने में देखा कि उसे एक रत्न मिला है
और उसने वह रत्न अपने परोपकारी गुरु म.सा. को भेट में दिया
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३) सुबह पति-पत्नी अपने गुरु देवचंद्र सूरी म.सा. को वंदन करने गये और स्वप्न का फल पूछा,
गुरु म.सा. ने कहा कि आपको एक महान पुत्र प्राप्त होगा और आप उसे गुरु म.सा. को (मुझे) अर्पण करेंगे।
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४) माता पाहिनी ने पुत्र को जन्म दिया, नाम रखा चांगदेव।
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५) मंदिर में एक दिन बाल चांगदेव श्री देवचंद्र सूरी म.सा. के आसन पर बैठ गया,
उस समय म.सा. ने पाहिनी को स्वप्न के बारे में याद दिलाया।
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६) गुरु म.सा. ने चांगदेव के पिता चाचिंग को समझाकर चांगदेव को दीक्षा दी और उनका नाम सोमचंद्र मुनि रखा गया।
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७) सोमचंद्र मुनि तेजस्वी बुद्धि वाले थे, गुरु म.सा. ने आगम ग्रंथ (शास्त्र) पढ़ाना शुरू किया।
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८) गुरु म.सा. की अनुमति और आशीर्वाद से, पु. सोमचंद्र म.सा. ने कश्मीर की सरस्वती माता को प्रसन्न करने का प्रयास शुरू कीया।
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९) सोमचंद्र म.सा. गिरनार तीर्थ पर पहुंचे रात में उन्होंने सरस्वती माता का ध्यान शुरू किया,
सरस्वती माता प्रकट हुईं और सिद्ध (पूर्ण) विद्वान (विशिष्ट ज्ञानी) बनने का वरदान दिया।
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१०) पूरी रात म.सा. ने सरस्वती वंदना की, वे बहुत खुश हुए, फिर वे अपने गुरु म.सा. के पास वापस आये
और अनेक नये धार्मिक पुस्तकों (ग्रंथ) का निर्माण शुरू किया।
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११) उनकी विशेष शक्ति और शासन प्रभावना के कार्य को देखकर,
गुरु म.सा. ने उन्हें आचार्य पद प्रदान किया और नया नाम 'श्री हेमचंद्रसूरी म.सा.' दिया गया।
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