मर्म और उरःप्रदेश के मर्म
Guided By –
Dr. Amit Kumar Singh
(Associate Professor and HOD of the Department of Rachna Sharir)
Dr. Varsha Gupta
(Assistant Professor Department of Rachna Sharir)
Presented By –
Krishnanand Tiwari
1st Prof BAMS Students
Roll No - 2
Jeevak Ayurvedic Medical College And Hospital Research Centre
CONTENT
मर्म शब्द की व्युत्पत्ति
मर्म शब्द का अर्थ जीव स्थान है। अंग्रेजी में इन्हें Vital Parts कहते हैं। दोनों ही शब्दों का योगार्थ एक ही है।
मर्म शब्द मृ-धातु में मनिन् प्रत्यय करने से बनता है।
मर्म की परिभाषा
मर्माणि मांससिरास्नाय्वस्थिसन्धिसन्निपाता
तेषु स्वभावत एव विशेषेण प्राणास्तिष्ठन्ति सु.शा.६/१६
मर्म वह है जहा पर मांस, सिरा, स्नायु, अस्थि और सन्धि इनका सन्निपात (संगम ) होता है। यहाँ पर स्वाभाविक रूप से प्राण रहते हैं।
मर्मों की संख्या
“……सप्तोत्तरं मर्मशतं शरीरे ….”
आयुर्वेद ग्रन्थों में ममर्मों की संख्या 107 बताई है।
प्रत्येक शाखा में 11 मर्म,
इस प्रकार चारों शाखाओं में = 11 × 4 = 44
उदर कोष्ठ में = 3
उरस् (छाती) में =9 अन्तराधि =26
पृष्ठ भाग में =14
ग्रीवा के ऊपर भाग में मर्म =37
शरीर के कुल मर्मों की संख्या =107
वाग्भट ने सुश्रुत के अनुसार ही 107 मर्म बताये हैं किन्तु सुश्रुतोक्त पांच प्रकार के मर्मों में से ही संख्या कम करके धमनी नाम से एक नया मर्म प्रकार बताया है। इनमें भी अस्थि एवं सन्धि के मर्म तो उतने ही बताए हैं किन्तु सिरा स्नायु व मांस मर्म में से क्रमश: 4, 4 एवं 1 मर्म कम करके 9 मर्मों को धमनी मर्म नाम दिया है।
इन पञ्चात्मक मर्मों की संख्या इस प्रकार है-
सुश्रुत
मांस मर्म = 11
सिरा मर्म = 41
स्नायु मर्म = 27
अस्थि मर्म = 08
सन्धि मर्म = 20
= 107
वाग्भट
मांस मर्म = 10
सिरा मर्म = 37
स्नायु मर्म = 23
अस्थि मर्म = 08
सन्धि मर्म = 20
धमनी मर्म = 9
= 107
इन मर्म स्थानों पर आघात होने से जो परिणाम होता है उसके अनुसारं इनके 5 प्रकार बताये गए हैं तथा
इनकी संख्याओं का भी निर्देश किया गया है। परिणाम के अनुसार मर्म पांच प्रकार के होते हैं- 1. सद्य
प्राणहर 2. कालान्तर प्राणहर 3. विशल्यघ्न 4. वैकल्यकर एवं 5. रुजाकर।इनकी संख्या आगे दी जा रही
है:-
1. सद्यः प्राणहर मर्म = 19
2. कालान्तर प्राणहर मर्म = 33
3. वैकल्यकर मर्म =44
4. विशल्यघ्न मर्म =3
5. रुजाकर मर्म =8
कुल =107
परिणाम के अनुसार प्रकार एवं संख्या-
1. हृदय मर्म- यह सिरा मर्म छाती के दोनों स्तनों के मध्य (परन्तु अधिकांश भाग बायीं ओर में स्थित होता है। यह मर्म सत्व, रज एवं तम का अधिष्ठान व वक्षःस्थ यन्त्र है, जिसके संकोच विकास से सम्पूर्ण शरीर में रक्त का परिभ्रमण होता है। हृदय का अग्रभाग या मुख (Apex) का स्थान बांयें पंचम पर्शकान्तर स्थान में चुचुक के नीचे उरः फलक की ओर 3/4 इन्च या वक्ष रेखा से 3% इन्च होता है। इसे फुफ्फुसान्तरालमध्य (Middle Mediastinum) कहते हैं। इस स्थान पर स्पर्श से हृदय के अग्र का स्पन्दन प्रतीत होता है। आमाशय के समीप होने के कारण इसे आमाशय द्वार स्थित कहा गया है। आमाशय का यह ऊपर का द्वार हृदय के अत्यधिक समीप होता है। अन्तर केवल महाप्राचीरा पेशी का होता है। अतः आधुनिक परिभाषा में भी आमाशय के ऊपर का द्व ार हार्दिक द्वार (Cardiac Orifice) कहलाता है। यह सद्योघाती मर्म होने के कारण चिकित्सा का अवसर प्रायः कम ही मिलता है। आगे त्रिमर्म में इसका विशेष वर्णन किया गया है।
उरःप्रदेश के मर्म
2. स्तनमूल मर्म- यह सिरा मर्म स्तनों के नीचे दो अंगुल दोनों ओर स्थित होता है। यह कालान्तर प्राणहर मर्म है। इस मर्म से फुफ्फुस का आधार भाग (Base of the Lungs) का बोध होता है व इसको (Lower Portion of the Pectoralis Major) समझना भी उचित होता है। इस मर्म पर अभिघात से अभिघातजन्य उरस्तोय व श्वसनक (Pleurisy and Pneumonia) नामक व्याधि उत्पन्न होकर श्वास तथा कास द्वारा मृत्यु होना सम्भव है।
3. स्तनरोहित मर्म- यह मांस एवं कालान्तर प्राणहर मर्म हैं तथा स्तन चूचूकों के ऊपर दो अंगुल दोनों ओर स्थित होती है। इस मर्म की रचना जिन अवयवों से होती है उनमें मुख्यरूप से पर्शकान्तरीय मांसपेशी (Intercostal Muscles) एवं फुफ्फुस का मूल भाग अपने सभी सम्बन्धी अंगों के साथ जैसे प्रश्वासिनी नाड़ी (Phrenic nerve), प्राणदा नाड़ी (Vagus Nerve), ऊर्ध्व महासिरा (Superior Vena Cava), Internal Mammary Vessels, महाधमनी का अवरोही भाग (Descending Aorta), श्वासनी एवं शाखाएं (Bronchi)फुफ्फुसाभिगा धमनी एवं सिरा (Pulmary Artery and Veins), फुफ्फुसीय नाड़ी चक्र (Pulmonary plexus of nerves), रसायिनियां (Lymphatic Vessels) एवं रसायिनी ग्रन्थियां (Lymphatic glands) आदि सहायक होते हैं। स्तनरोहित मर्म से Internal Mammary Vessels का भी ग्रहण किया जा सकता है। इस मर्म पर अभिघात से उपर्युक्त सभी अंगों पर अभिघात सम्भव है।
4. अपलाप मर्म- यह सिरा मर्म एवं कालान्तर प्राणहर है और दोनों अंसकूटों के नीचे पाश्वों के ऊपर के भाग पर इसकी स्थिति बताई गई है। इस मर्म की रचना, बाह्वी नाड़ी चक्र अपनी शाखाओं सहित (Brachial Plexus with its Branches), कक्षानुगा धमनी (Axillary Artery), कक्षानुगा सिरा (Axillary Vein), कक्षानुगा रसायिनियां (Lymphatic Vessels in the Axilla) एवं अंशोरस्का धमनी की अंशच्छदा पेशी को पोषण करने वाली जो कक्षानुगा महाधमनी की शाखा आदि अवयवों से मिलकर होती है। अपलाप से Lateral thoracic and subscapular Vessels अथवा Medial walls of the axilla का ग्रहण करना चाहिए। इस मर्म के साथ Pectoralis major and minor पेशियां भी भाग लेती हैं। इस मर्म पर अभिघात से रक्तस्राव के पश्चात् होने वाले अशुचि व्रण (Septic) से जीवन नाश होता है।
5. अपस्तम्भ मर्म-यह सिरा मर्म है। अ०हृ० ने इसकी गणना धमनी मर्म में की है एवं कालान्तर प्राणहर मर्म, छाती के दोनों ओर अपस्तम्भ नाम की नाड़ी के रूप में स्थित होता है। रचना में श्वास नाड़ी (Bronchi), प्रश्वासिनी नाड़ी (Phrenic Nerve), प्राणनादा नाड़ी (Vagus Nerve), महामृतिका धमनी (Common Carrotid Artery), अक्षधरा सिरा (SubclavianVein), आदि महत्वपूर्ण अवयवों से मिलकर होती है। इस मर्म से सम्बद्ध वक्ष तथा दोनों भागों में श्वास प्रणालियां हैं जिससे वायु का संचार होता है। इस मर्म पर अभिघात से वक्षगुहा वायु से भरकर भयंकर श्वास कास उत्पन्न कर मृत्यु का कारण बनती है।
Name | Number | Location | Anatomical Classification | Classification on Trauma Result | Praman | Viddha (Trauma) Symptom |
Hridaya | 1 | Between breasts, seat of satva, raja, and tama | Sira | Sadyapranhar | Measure of self-palmar region | Sadyomaran (immediate fatality) |
Stanamoola | 2 | 2 angula below both stana | sira | Kalantarapr anhar | 1 angula | Kaphapurnakosthata (fluid in cavity) and marana (death) |
Stanrohita | 2 | Above nipples bilaterally | mamsa | Kalantarapr anhar | 1/2 angula | Lohitapurnakosthata (blood in cavity) andmarana (death) |
Apalaapa | 2 | On chest and below the level of spinous process of scapula bilaterally | sira | Kalantarapr anhar | 1/2 angula | Raktapuyabhav (blood and pus in cavity) andmaran (death) |
Apstambha | 2 | On chest bilaterally, vata carrying structure | sira | Kalantarapr anhar | 1/2 angula | Vatapurnakosthata (air in cavity) andmaran (death) |
उरःप्रदेश के मर्म पर शोध पत्र