हे भूख मत मचल
कवयित्री:-अक्क महादेवी
प्रस्तुतकर्ता:- अभय सिंह यादव
अक्क महादेवी का जीवन परिचय:-
अक्क महादेवी का विवाह:-
अक्क महादेवी द्वारा राजभवन का त्याग:-
महादेवी जी यही कहतीं रहतीं कि “मेरे पति तो चेन्नमल्लिकार्जुन ही हैं। राजा ने क्रोध में आकर उनका परित्याग करते हुए महादेवी जी को राज्य छोड़कर चले जाने को कहा। महादेवी जी को बड़ी सहजता से इस निर्णय को स्वीकारता देखकर राजा को और क्रोध आ गया। उसने उनको सभी वस्त्र-आभूषण जो कि राजा के दिये थे- वे सब उतारने के बाद राजमहल छोड़कर जाने को कहा। महादेवी जी ने अपने प्रभु का ध्यान करके पूरे शांत भाव से राजा का कहा माना और फिर उस दिन के पश्चात् कभी कोई भी वस्त्र-आभूषण धारण न किये। अपने चेन्नमल्लिकार्जुन की प्रिया महादेवी ने देह को लम्बे केशों से ढका और राजमहल से चल दीं।
आध्यात्मिक यात्रा:-
निर्वस्त्र महादेवी को समाज से बहुत दुत्कार मिली। लोगों ने बहुत प्रकार से इनको समझाने की कोशिश करी, पर ये ना डिगीं और यही कहतीं कि भगवान से मिलन में वस्त्रों की क्या आवश्यकता। जंगलों से गुजरते हुए, अनेक प्रकार के संघर्ष करते हुए, समाज का निर्भीकता व दृढ़ता से सामना करते हुए, ये कल्याण पहुँची।उस युग में महादेवी जी निर्वस्त्र सन्यासी होकर आध्यात्मिक ज्ञान की गोष्ठि में चर्चा करने का प्रयास कर रही थीं। इनकी आध्यात्मिक विचारधारा को सराहना मिली। बासव, अल्लमप्रभु, आदि अन्य सन्त जो पहले महादेवी जी को समर्थन नहीं दे पा रहे थे और इनकी निर्वस्त्र अवस्था से परेशान थे, महादेवी जी की विचारधारा से प्रभावित होकर उन सभी ने इनको आध्यात्मिक पथ पर सहमति दी और “अनुभव-मण्डप” में प्रवेश दिया। इनकी सादगी, ईश्वर-निष्ठा , प्रेम, दृढ़ता व नम्रता ने सबको प्रभावित किया और इनको नये सम्बोधन- “अक्क” अर्थात “बड़ी दीदी” से सम्मानित किया गया। इस प्रकार इनका नाम हुआ- “अक्क महादेवी”।
लोभ, मत ललचा�हे मद ! मत कर मदहोश�ईर्ष्या, जला मत�ओचराचर ! मत चूक अवसर�आई हूँ सदेश लेकर चन्नमल्लिकार्जुन का
शब्दार्थ:-
मचल-पाने की जिद।
तड़प-छटपटाना।
पाश-बंधन।
ढील-ढीला करना।
मद-नशा।
मदहोश-नशे में उन्मत या होश खो बैठना।
चराचर-जड़ व चेतन।
चूक-छोड़ना, भूलना। चन्नमल्लिकार्जुन-शिव।
हे भूख ! मत मचल
प्यास, तड़प मत
हे नींद ! मत सता
क्रोध, मचा मत उथल-पुथल
हे मोह ! पाश अपने ढील
लोभ, मत ललचा
हे मद ! मत कर मदहोश
ईर्ष्या, जला मत
ओचराचर ! मत चूक अवसर
आई हूँ संदेश लेकर चन्नमल्लिकार्जुन का
व्याख्या-
अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:-
प्रस्तुतकर्ता:-
अभय सिंह यादव
पीजीटी (हिंदी)
जवाहर नवोदय विद्यालय सरदारशहर
जिला चूरु ( राजस्थान )