वैज्ञानिक चेतना के वाहक चंदशेखर वेंकटरामन लेखक - धीरंजन
लेखक- धीरंजन मालवे
निरंजन मालवे का जन्म बिहार के नालंदा जिले में हुआ । श्रीमान इन दिनों प्रसार भारती से संबंध आकाशवा ाी और दूरदर्शन से जुड़े है। ये अभी भी वैज्ञानिक जानकारी लोगों तक पहुंचाने के काम में जुटे हुए हैं। आकाशवा ाी के विभिन्न केंद्रों में कार्य करने के दौरान मालवे रेडियो विज्ञान पत्रिका ज्ञान-विज्ञान का संपादन और प्रसार ा करते रहे हैं । मालवे की भाषा शैली सरल और वैज्ञानिक शब्दावली लिए हुए हैं।
देश के लोगों को वैज्ञानिक दृष्टि देने और चिंतन प्रदान करने में सर चंद्रशेखर वेंकटरमन का महत्त्वर्पू ा योगदान है। उन्होंने समुद्र के पानी का रंग नीला देखा तो उनका चिंतन प्रारंभ हो गया। वे यह पता लगाकर ही रहे कि समुद्र नीला क्यों है । वे यहीं चाहते थे कि लोग आसपास होने वाली घटनाओं के कार ाों का पता ं लगाने का प्रयत्न करें वे लोगों में वैज्ञानिक
दृष्टि उत्पन्न करना चाहते थे ।
इसके लिए उन्होंने बैंगलोर में रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट नामक संस्था की स्थापना की। उन्होंने जनता और फिजिक्स नामक शोध पत्रिका भी प्रारंभ की शोध कार्यों में सैकड़ों छात्रों का मार्गदर्शन किया। विज्ञान के प्रचार प्रसार के लिए वह करंट साइंस नामक पत्रिका का संपादन भी करते थे । वे तो वैज्ञानिक चेतना और दृष्टि के साक्षात प्रतिमूर्ति थे।