प्रस्तुति
राजेन्द्र सिंह शेखावत
प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (हिंदी)
के.वि.भा.नौसेना पोत,वालसुरा जामनगर
एक कुत्ता और एक मैना
हजारीप्रसाद दिवेदी
शब्दार्थ
आज के कई वर्ष पह्ले गुरुदेव के मन मे आया ---------कई दिनो से उन्हे देखा नही था।
अन्यत्र-कही ओर
तिमंजिले-तीन मंजिल वाला
तल्ला-मंजिल
क्षीणवपु-दुबला, पतला
दर्शनीय-देखने योग्य
पुस्तकीय-कठिन
प्रगल्भ-बोलने मे संकोच न करने वाला
अर्थग्रहन संबंधी प्रश्न
उत्तर १ - रवीन्द्रनाथ टैगोर।
उत्तर २ - श्रीनीकेतन ।
उत्तर ३ - तृतीय तल पर।
उत्तर ४ - वे बहुत कमज़ोर हो चुके
थे।
उत्तर ५ - दुबला पतला शरीर।
गुरुदेव वहाँ बड़े आनंद___________________________चेहरे पर दिखाई दे रही है |
परवाह – फिक्र, चिंता
भीत – भीत - डरे-डरे , दूर-दूर
मय - सहित
अस्तगामी – डूबता हुआ
ध्यानस्तिमित – ध्यानपूर्वक
स्नेह रस में - प्यार के रस में
परितृप्ति - संतुष्टि
अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
1॰ गुरुदेव कहाँ आनद में रहते थे?
2॰ कुत्ता किसको ढूढ़ता हुआ कहाँ पंहुचा?
3॰ “हम लोग ऊपर गए” – यहाँ हम लोग किसके लिए कहाँ गया है?
उ1॰ (ख) श्री निकेतन में
उ2॰ (ग) कुत्ता गुरुदेव को ढूढ़ता हुआ श्रीनिकेतन पहुँचा|
उ3॰ (क) हजारी प्रसाद सपरिवार
स्नेहदाता – प्यार करने वाला
आरोग्य – बांग्ला भाषा की एक पत्रिका का नाम
स्तब्ध – चुप
वाक्यहीन – बोलने में असमर्थ
प्राणिलोक – संसार
अहैतुक – अकारण, बिना कारण के
चैतन्य – चेतना युक्त
मूक – चुप
प्राणपण – जान की बाज़ी
अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
(क) जातिवाचक संज्ञा
(ख) व्यक्तिवाचक संज्ञा
(ग) विशेषण
(घ) भाववाचक संज्ञा
उत्तर
उ1॰ रवीन्द्रनाथ टैगोर
उ2॰ गुरुदेव की एक कृति को
उ3॰ (घ) भाववाचक संज्ञा
धन्यवाद