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जवाहर नवोदय विद्यालय बेगूसराय

पाठ–वीर कुवँर सिंह

कक्षा-सातवीं

विवेक कुमार पटेल

(टी०जी०टी०हिंदी)

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1-प्यारे बच्चों आपने वर्ग-षष्ट में “झाँसी की रानी” कविता पढ़ी थी ?

2- क्या आप इस कविता के कवि का नाम जानते है ?

3-आपने इस कविता में ‘लक्ष्मी बाई’ के साथ और कई वीरों को पढ़ा होगा I

4-आपको उन वीरों में से किसका किसका नाम याद है ?

5-आइए आज हम फिर से उस कविता के कुछ अंश को पढ़ते है ?

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बच्चों हम जिसकी चर्चा कर रहे थे वह पंक्ति इस प्रकार है ?

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हमने जिस पंक्ति को अभी पढ़ा उसमे कौन-कौन से वीर का नाम आया ?

1.नाना धुंधूपंत

2.अहमद शाह मौलवी

3.चतुर अजीमुल्ला

4.ठाकुर वीर कुवँर सिंह

इस प्रकार हम देखते है की “झाँसी की रानी” पाठ में हमने पहले जिस नायक को पढ़े थे आज हम उसी वीर नायक कुवँर सिंह के बारे में विस्तार से पढेंगे I

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वीर कुवंर सिंह

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“आज हम 1857 की क्रांति के नायक वीर कुवँर सिंह के बारे में पढेंगे,,

  • “वीर कुवँर सिंह” पाठ में हम निम्न बिन्दुओं को जानेगें,
  • वीर कुवँर सिंह के जीवन से जुड़ी जानकारी
  • स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की वीर गाथा
  • स्वतंत्रता संघर्ष की कहानी की

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पाठ का सार

  • यह पाठ वीर कुंवर सिंह की जीवनी है, जिसमें उनके वीरतापूर्ण व्यक्तित्व और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान का वर्णन है I 1857 का विद्रोह और परिणाम देश को अंग्रेजी शासन से मुक्ति दिलाने का पहला प्रयास था I 1857 इस्वी में व्यापक सशस्त्र विद्रोह हुआ I

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  • अंग्रेजों द्वारा चलाई जा रही दमन नीति का विरोध करते हुए यह विद्रोह हुआ तथा बगावत करने पर मंगल पांडे को फांसी दे दी गई I 8 मई 1857 को भारतीय सैनिक दिल्ली में तैनात सैनिकों के साथ मिल गए और बहादुर शाह को शासक घोषित कर दिया I यह विद्रोह दूर-दूर तक फैलता गया I

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राष्ट्रीय एकता और आन्दोलन की नींव

  • दिल्ली के अतिरिक्त कानपुर, लखनऊ, बरेली, बुंदेलखंड में भी विद्रोह हुए, जिनमें नाना साहब, तात्या टोपे, बख्त खान, लक्ष्मी बाई, राव तुलाराम, मुख्य नेता रहे I इस विद्रोह में उठाए गए दृढ़ कदम पर राष्ट्रीय एकता एवं आंदोलन की नींव पड़ी थी I

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  • कहां जाता है कि कुंवर सिंह का जन्म बिहार में 1782 ईस्वी में शाहाबाद जिले के जगदीशपुर में हुआ था I उनके पिता का नाम साहबजादा सिंह और माता का नाम पंचरतन कुंवर था I उनकी शिक्षा-दीक्षा घर पर ही हुई I उन्होंने हिंदी, संस्कृत, और फारसी की पढाई की I परन्तु इनका मन पढ़ाई लिखाई से अधिक घुड़सवारी, तलवारबाजी और कुश्ती लड़ने में लगता था I वे स्वाभिमानी तथा उच्च विचारों वाले थे I उन्होंने 1827 ईस्वी में पिता के मृत्यु के बाद रियासत के कामकाज को संभाला I

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ब्रिटिश शासन के खिलाफ असंतोष ,देशभक्ति की भावना एवं क्रांति की योजनायें

  • 1827 ईस्वी के आसपास अंग्रेजों का अत्याचार चरम पर था I हजारों लोगों में भयंकर असंतोष था I कृषि, उद्योग, व्यापार ,सभी कुछ नष्ट हो रहे थे I पूरे देश में असंतोष लहर थी I ऐसे में कुंवर सिंह ने अंग्रेजों से लोहा लेने का मन बनाया I

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  • जगदीशपुर के जंगलों में रहने वाले ‘बसुरिया बाबा’ नामक एक संत ने कुंवर सिंह के मन में देशभक्ति की भावना पैदा की I उन्होंने बनारस, मथुरा, कानपुर, लखनऊ, में विद्रोह की योजनाएं बनाई I बिहार के सोनपुर के प्रसिद्ध पशु मेले में लोग एकत्र होकर क्रांति की योजनाएं बनाते थे I

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दानापुर की सैनिक टुकड़ी का विद्रोह �

  • 25 जुलाई, 1857 को दानापुर के सैनिकों की टुकड़ी विद्रोह कर आरा ओर चल पड़ी I उन्होंने कुंवर सिंह की जय घोष करते हुए आरा जेल की सलाखें तोड़ दी I 27 जुलाई को कुवँर सिंह ने आरा पर जीत हासिल की I बूढ़े सूर वीर कुंवर सिंह बिना पीछे हटे युद्ध के लिए तैयार हो गए I

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  • इस लड़ाई की ज्वाला पूरे बिहार में फैल गई I देसी सैनिकों में अनुशासन की कमी, स्थानीय जमींदारों, का अंग्रेजों का साथ देना तथा आधुनिक शस्त्रों की कमी से जगदीशपुर में अंग्रेजी सेना कुंवर सिंह की सेना से जीत गई I कुंवर सिंह हौसला हारे बिना क्रांति के अन्य संचालकों से मिले I वह सासाराम से मिर्जापुर होते हुए रावी कालपी, कानपुर, लखनऊ, तक गए और वहां से आजमगढ़ आ गए I

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  • उनकी वीरता पूरे उत्तर भारत में फैल गई I इस विजय यात्रा से अंग्रेजों के होश उड़ गए I उनकी यह यात्रा आगे बढ़ती रही I वे ग्वालियर और जबलपुर के सैनिकों के सहयोग से लखनऊ आ गए I

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कुवँर सिंह की गंगा को अद्भुत भेट

  • एक बार कुंवर सिंह को सेना सहित गंगा पार करनी थी I अंग्रेजी सेना पीछे लगी थी I उन्होंने बलिया के पास हाथियों से सेना पार करने की अफवाह फैलाकर, बलिया से 7 किलोमीटर दूर नाव द्वारा अपनी सेना को गंगा पार करा दिए I जब डगलस को इसके बारे में पता चला तो वह गोलियां चला दी एक गोली कुंवर सिंह की बांह को बेधती हुई निकल गई I फिर क्या था, कुंवर सिंह ने गोली का जहर फैलने के भय से अपनी बांह काट कर गंगा मैया को अर्पित कर दी I

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  • कुंवर सिंह को ‘छापामार युद्ध’ में महारत हासिल थी I कुंवर सिंह के रण कौशल के सामने शत्रुओं को कटना ही पड़ता था I अंग्रेजी सेनानायक भी उनके रण कौशल को समझने में असमर्थ थे I उनकी वीरता के अनेक किस्से भारतीय इतिहास के पृष्ठों पर अंकित है I

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जगदीशपुर पर विजय �

  • कुंवर सिंह इलाहाबाद एवं बनारस पर आक्रमण कर अंततः जगदीशपुर को जीतना चाहते थे I अंग्रेजों और कुंवर सिंह के मध्य हुए युद्ध में कुंवर सिंह जीत गए और आजमगढ़ पर कब्जा कर लिया I

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  • उन्होंने दोबारा हमले में अंग्रेजों को फिर हराया I वे 23 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर पहुंचे और विजयोत्सव मनाते हुए अंग्रेजी झंडा उतार कर अपना झंडा फहरा दिया I दुर्भाग्य से कुंवर सिंह 26 अप्रैल 1858 को इस संसार से विदा हो गए I

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कुवँर सिंह का उदार एवं लोकप्रिय व्यक्तित्व

  • कुंवर सिंह ने अनेक सामाजिक कार्य किए I उन्होंने आरा जिला-स्कूल को जमीन दान दी I आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने पर भी वे निर्धनों की मदद करते थे I उन्होंने सड़के बनवाई, कुएं खुदवाये तथा जलाशय बनवाएं I  

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  • कुंवर सिंह ने इब्राहिम खान और किफायत हुसैन को अपनी सेना में उच्च पदों पर नियुक्त किया सांप्रदायिक सद्भावना को बढ़ावा दिया I हिंदू और मुसलमान त्यौहार मिलजुल कर मनाते थे I उन्होंने पाठशाला और मकतब दोनों ही बनवाए I वे इतने लोकप्रिय थे कि लोगभाषाओं में आज भी उनकी प्रशस्ति गायन किया जाता है

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कठिन शब्द

कठिन शब्द

अर्थ

व्यापक

फैला हुआ

कूच करना

प्रस्थान करना

निर्मित

बना हुआ

चरम

सबसे ऊंचा

सक्रिय

कार्यरत

जयघोष

जयकार बोलना

पतन

विनास

सलाखें

छड़ें

भावी

आने वाला

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कठिन शब्द

कठिन शब्द

अर्थ

भेदना

निशाने पर लगना

असमर्थ

अयोग्य

अकिंचन

कम मूल्य वाली वस्तु

जलाशय

तालाब

लोकभाषा

ग्रामीण क्षेत्रों की भाषा

प्रशस्ति

प्रशंसा

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कठिन शब्द �

कठिन शब्द

अर्थ

अरिदल

शत्रुओं का समूह

वीर प्रसविनी

वीरों को पैदा करने वाली धरती

सौभाग्य

अच्छी किस्मत

आधीनता

किसी और का नेतृत्व

कुशल

निपुण

लोहा लेना

युद्ध करना

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लघु-प्रश्न� �

प्रश्न-1857 के विद्रोह के प्रमुख सैनिक कौन-कौन थे ? और इस विद्रोह में किन-किन विचारों को बढ़ावा मिला I

उत्तर- 1857 के विद्रोह के मुख्य सैनिक नानासाहेब, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, बख्त खान, अजीमुल्ला खान, बेगम हजरत महल, कुंवर सिंह, मौलवी बहादुर खान, और राव तुलाराम, थे I 1857 के विद्रोह से राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता आंदोलन को बढ़ावा मिला I और सांप्रदायिक सद्भावना की भावना मजबूत I

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प्रश्न - वीर कुंवर सिंह को किससे देशभक्ति और स्वाधीनता की प्रेरणा मिली ?

उत्तर-वीर कुंवर सिंह को जगदीशपुर के जंगलों में रहने वाले ‘बसुरिया’ बाबा नामक संत से देश भक्ति की और स्वाधीनता की प्रेरणा मिली उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विद्रोह की कई योजनाएं बनाई I

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प्रश्न-वीर कुंवर सिंह अपनी गुप्त बैठ कहां और क्यों करते थे

उत्तर- वीर कुंवर सिंह ने प्रसिद्ध सोनपुर मेले को अपनी गुप्त बैठकों के लिए चुना था I इस प्रकार अंग्रेजों को शक नहीं होता था तथा क्रांतिकारी आपस में मिलकर पशुओं की खरीदने के बजाय क्रांति की योजनाएं बनाते थे I

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दीर्घ-प्रश्न

प्रश्न-वीर कुंवर सिंह ने कौन-कौन से सामाजिक कार्य किए और क्यों ?

उत्तर-संकेत-बिंदु

1- स्कूल के लिए जमीन देना,

2- निर्धनों की सहायता,

3- जल आपूर्ति हेतु तालाब, जलाशय एवं विभिन्न सड़कों का निर्माण करवाना,

4- लोगों को अधिक से अधिक सुविधाएं देना

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प्रश्न-पाठ के आधार पर वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व की विशेषताएं बताइए ?

  • उत्तर-संकेत-बिंदु
  • स्वतंत्रता सेनानी, साहसी और कुशल योद्धा
  • उदार एवं स्वाभिमानी व्यक्तित्व
  • समाज सेवक, सांप्रदायिक सद्भाव, में गहरी आस्था रखने वाले

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क्रिया-कलाप

  • गतिविधि का नाम-:स्वतंत्रता सेनानी
  • निर्देश-:
  • हर वर्ग के छात्र-छात्राओं को 1857 के विद्रोह के किसी एक सेनानी के चित्र एवं परिचय लिखने को कहा जाएगा
  • कौशल- सामाजिक जागरूकता , देशभक्ति
  • सामग्री-चित्र, रंगीन कागज़, स्केच, पेन, आदि
  • समय आवश्यकतानुसार

  • उददेश्य- सामजिक जागरूकता विकसित करना,

कलात्मकता का विकास

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गृह-कार्य

  • पाठ में आये हुए प्रश्नों को हल करें और साफ़-साफ़ अपनी नोट-बुक में लिखें I
  • कठिन शब्दों को याद करें I

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आपने इस पाठ में सीखा

  • कुंवर सिंह की जीवनी
  • कठिन शब्दों के अर्थ
  • लघु-प्रश्न उत्तर सहित
  • दीर्घ-प्रश्न एवं उनके उत्तर के संकेत बिंदु

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धन्यवाद

  • विवेक कुमार पटेल (टी०जी०टी०हिंदी)
  • जवाहर नवोदय विद्यालय बेगुसराय