धूमिल जनवादी कवि
पवन कुमारी
असिस्टेंट प्रोफेसर
स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग
हंसराज महिला महाविद्यालय
जालंधर
जीवन परिचय�
रचनात्मक विशेषताएं�
रचनाएं�
साठोत्तरी हिन्दी कविता और धूमिल
धूमिल ने समाज में स्थित बेकारी,दारिद्र्यता, सामाजिक अनिष्ट रूढ़ियाँ,नारी विषयक दृष्टिकोण, दलितों की स्थिति अनेक समस्याओं से ग्रस्त ग्रामीण जीवन आदि अनेक समस्याओं को अपने काव्य का विषय बनाया और इसमें परिवर्तन लाने के लिए समाज जागृति करने का प्रयास अपनी कविताओं के माध्यम से किया है।
धूमिल के काव्य की विशेषताएँ
सामान्य मानव का चित्रण
– धूमिल का काव्य आम आदमी का काव्य हैं
“कविता घेराव में किसी
बोखलाय आदमी का
संक्षिप्त एकालाप हैं”
मूल्य चेतना – �
“मैंने पहली बार महसूस किया हैं
कि नंगापन अंधा होने के खिलाफ
एक सख्त कार्यवाही हैं”
विसंगत स्थितियाँ –�
“न कोई बड़ा है ,न कोई छोटा हैं
मेरे लिए हर आदमी एक जोड़ी जूता हैं
यो मेरे सामने मुरम्म्त के लिए खड़ा हैं”
प्रजातन्त्र का विरोध – �
“क्रांति यहा के असंग
लोगो के लिए किसी
अबोध बचे के हाथों की जूती हैं”
पीड़ा का चित्रण – �
डॉ रामचंद बिंद
“धूमिल मात्र दिखावे के लिए
युवाओं द्वारा किए जाने वाले
विरोध को निरर्थक मानते हैं”
नैतिक मूल्य – �
“सड़क के पिछले हिस्से में
छाया रहेगा पीला अंधकार”
शोषण के प्रति चेतनता – �
“जनता क्या हैं ?
एक भेड़ चल हैं
जो दूसरों को ठंड से बचाने के लिए
अपनी पीठ पीआर ऊब की फसल ढोह रही हैं”
यथार्थपरक दृष्टिकोण – �
“नहीं, अपना कोई हमदर्द जहा नहीं हैं
माइनें एक – एक को परख लिया हैं”
व्यवस्था का विरोध –
‘आजकल शहर, कोतवाल की नीयत और हथकड़ी का नंबर एक ही हैं
व्यवस्था की खोह में हर तरफ बड़े और रक्तालूप घूम रहे हैं”
राजनीतिक परिदृश्य का वर्णन
“बीस साल बाद मैं अपने आप से सवाल करता हूँ
जानवर बनने के लिए कितने सब की जरूरत होती हैं”
सुनहरे भविष्य का स्वप्न
“मैंने इंतज़ार किया , अब कोई बच्चा भूखा रह कर स्कूल नहीं जायेंगा ,
अब कोई छत बारिश से नहीं टपकेगी ,
अब कोई आदमी कपड़ो की लाचारी में अपना नंगा चेहरा नहीं पहनेगा”
अस्तित्वबोध�
“भूख ने उन्हे जानवर कर दिया हैं
संशय ने उन्हे आग्रहों से भर दिया हैं
फिर भी वर अपने है, अपने हैं, अपने हैं”
धन्यवाद