1 of 25

भारतेन्दु एवं दृवेदी युग

पवन कुमारी

असिस्टेंट प्रोफेसर हिन्दी

हंसराज महिला महविद्यालय

जालंधर

2 of 25

  • हिन्दी साहित्य का इतिहास (आधुनिक काल) तत्कालीन राजनैतिक गतिविधियों से प्रभावित हुआ है। इसको हिन्दी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ युग माना जा सकता है, जिसमें पद्य के साथ-साथ गद्य, समालोचना, कहानी, नाटक व पत्रकारिता का भी विकास हुआ

3 of 25

  • इस काल में राष्ट्रीय भावना का भी विकास हुआ। इसके लिए शृंगारी ब्रजभाषा की अपेक्षा खड़ी बोली  उपयुक्त समझी गई। समय की प्रगति के साथ गद्य और पद्य दोनों रूपों में खड़ी बोली का पर्याप्त विकास हुआ। भारतेन्दु हरिश्चंद्र तथा बाबू अयोध्या प्रसाद खत्री ने खड़ी बोली के दोनों रूपों को सुधारने में महान प्रयत्न किया

4 of 25

  • इसकी सत्प्रेरणाओं से अन्य लेखकों और कवियों ने भी अनेक भाँति की काव्य रचना की। इनमें मैथिलीशरण गुप्त, रामचरित उपाध्याय, नाथूराम शर्मा शंकर, ला. भगवान दीन, रामनरेश त्रिपाठी, जयशंकर प्रसाद, गोपाल शरण सिंह, माखन लाल चतुर्वेदी, अनूप शर्मा, रामकुमार वर्मा, श्याम नारायण पांडेय, दिनकर, सुभद्रा कुमारी चौहान, महादेवी वर्माआदि का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

5 of 25

  • आधुनिक हिंदी साहित्य का आरंभ 19वीं शताब्दी के आरंभ से माना जाता है। हिंदी साहित्य के इतिहास में रीतिकाल के बाद चतुर्थ काल आधुनिक काल का आता है। इसका आरंभ 1850 के आसपास से माना जाता है

6 of 25

  • आधुनिक हिंदी साहित्य का आरंभ भारतेंदु युग से माना जाता है। भारतेंदु हरिश्चंद्र हिंदी साहित्य के आधुनिक काल के युग प्रवर्तक एवं मील के पत्थर कहे जाते हैं। आधुनिक  हिंदी साहित्य के प्रवर्तन में भारतेंदु जी की भूमिका अग्रणी है। भारतेंदु एवं उनके मंडल ने साहित्य को रीति प्रवृत्तियों के घेरे से बाहर निकाल कर जनता से  जोड़ा।आधुनिक काल को आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी ने गद्य काल के नाम से अभिहित किया है।शुक्ला जी के अनुसार आधुनिक काल निम्न युगों में विभक्त है --�

7 of 25

इस काल में गद्य-निबन्ध, नाटक-उपन्यास, कहानी, समालोचना, तुलनात्मक आलोचना, साहित्य आदि सभी रूपों का समुचित विकास हुआ। इस युग के प्रमुख साहित्यकार निम्नलिखित हैं-

8 of 25

समालोचक�आचार्य द्विवेदी जी, पद्म सिंह शर्मा, विश्वनाथ प्रसाद मिश्र, आचार्य रामचंद्र शुक्ल,डॉ रामकुमार वर्मा, श्यामसुंदर दास, डॉ रामरतन भटनागर आदि है।�कहानी लेखक�प्रेमचंद, विनोद शंकर व्यास, प्रसाद, पंत, गुलेरी, निराला, कौशिक, सुदर्शन, जैनेंद्र, हृदयेश मनु बुंदेली आदि।

9 of 25

उपन्यासकार�प्रेमचंद, प्रतापनारायण मिश्र, प्रसाद, उग्र, हृदयेश, जैनेंद्र, भगवतीचरण वर्मा, वृंदावन लाल वर्मा, गुरुदत्त,श्रद्धाराम फिल्लौरी आदि है

10 of 25

नाटककार �प्रसाद, सेठ गोविंद दास, गोविंद वल्लभ पंत, लक्ष्मीनारायण मिश्र, उदयशंकर भट्ट, रामकुमार वर्मा आदि हैं।�निबन्ध लेखक�आचार्य द्विवेदी, माधव प्रसाद शुक्ल, रामचन्द्र शुक्ल, बाबू, पद्म सिंह, अध्यापक पूर्णसिंह आदि

11 of 25

भारतेंदु युग

1850 से 1900 

इस युग में गद्य  का विविध रूपों में  विकास हुआ

द्विवेदी युग /  सुधारवादी युग

1900 से 1918

साहित्य में राष्ट्रीय भावना की प्रधानता

छायावादी युग

1918 से  1935

प्रकृति चित्रण की प्रधानता

प्रगतिवादी युग

1935 से  1942

मार्क्सवाद का प्रभाव 

प्रयोगवादी युग

1942 से 1954

तार सप्तक का प्रकाशन

नई कविता 

1954 से 1960

साठोत्तरी कविता / समकालीन कविता /  कविता 

1960 से अब तक

12 of 25

 

आधुनिक काल

भारतेन्दु युग

1850-1900

छायावादी युग

1915-1935

प्रयोगवाद युग

1942- 1954

द्विवेदी युग

1900-1915

प्रगतिवादी युग

1935-1942

नई कविता

1954-1960

सठोत्तरी कविता

1960 से अब तक

13 of 25

भारतेंदु युग

  • भारतेंदु युग में गद्य का विविध रूपों में विकास हुआ। अतः इसे गद्य काल भी कहा जाता है।भारतीय हिंदू हरिश्चंद्र किस युग के  प्रमुख साहित्यकार है, उन्हीं के नाम पर इस युग का नामकरण हुआ। भारतेंदु युगीन साहित्य की प्रमुख भाषा ब्रज भाषा थी। तत्कालीन साहित्य में मुक्तक काव्य शैली प्रयुक्त की जाती थी। इस युग में देश प्रेम की व्यंजना करने वाली कृतियों की रचना हुई।

14 of 25

प्रमुख रचनाकर

भारतेंदु हरिश्चंद्र == प्रेम सागर, प्रेम माधुरी, प्रेम फुलवारी, अंधेर नगरी चौपट राजा, सत्य हरिश्चंद्र

 बालकृष्ण भट्ट(शिव शंभू के चिट्ठे) --   हिंदी प्रदीप ,  चंद्रसेन ,नूतन ब्रह्मचारी

 प्रताप नारायण मिश्र --  पंच परमेश्वर 

15 of 25

साहित्यिक प्रवृतियां--�

  • देशप्रेम की व्यंजना

  • शृंगार, वीर और करुण रस

  • ब्रजभाषा

  • मुक्तक काव्य शैली   जन-काव्य

16 of 25

  • प्राचीन और नवीन का समन्वय
  • सुधारवादी दृष्टिकोण
  • जनजीवन का चित्रण
  • भक्ति भावना
  • अतीत का गोरवगान

17 of 25

  • हास्य व्यंग्य
  • प्रकृति का चित्रण
  • इतिवृतरत्मकता
  • भाषा में नवीनता

18 of 25

द्विवेदी युग

द्विवेदी युग में राष्ट्रीय भावना प्रधान साहित्य की रचना की जाने लगी थी। इस युग के प्रमुख साहित्यकार महावीर प्रसाद द्विवेदी थे उन्हीं के नाम पर इस काल का नामकरण किया गया है। द्विवेदी युगीन काव्य में खड़ी बोली हिंदी प्रधानता देखने को मिलती है।

19 of 25

प्रमुख रचनाकर

महावीर प्रसाद द्विवेदी --सरस्वती पत्रिका का संपादन,  हिंदी भाषा की उत्पत्ति

 मैथिलीशरण गुप्त== साकेत, पंचवटी, यशोधरा, भारत भारती

 अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध== प्रियप्रवास, पारिजात, वैदेही वनवास

 माखनलाल चतुर्वेदी== हिम तरंगिणी, हिम्मत किरीटिनी

20 of 25

साहित्यिक प्रवृतियां-

  • राष्ट्रीय-भावना

  • खड़ीबोली हिंदी की प्रधानता

  • काव्य शैली – (मुक्तक तथा प्रबंध

21 of 25

  • देश भक्ति

  • क्रांतिकारी धार्मिक चेतना

  • सामाजिक चेतना

  • इतिवृततमकता

22 of 25

  • प्रकृति चित्रण

  • कलानुसारण की आवश्यकता

  • अतीत का गोरवगान

  • नवीन तथा साधारण विषय

23 of 25

  • विषय की व्यापकता

  • आदर्शवादिता

  • मानवतावाद

  • हास्य और व्यंग्य

24 of 25

  • समग्रत: यह दोनी काल आधुनिक काल के महत्वपूर्ण काल है

25 of 25

धन्यवाद