श्रीः �योगिनां केन्बरासंस्कृतवर्गः�२६.०८.२०२१
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विना वेदं विना गीतां विना रामायणीं कथाम्।
विना कविं कालिदासं भारतं भारतं न हि॥
प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः
प्रारभ्य विघ्ननिहता विरमन्ति मध्याः।
विघ्नैर्मुहुर्मुहुरपि प्रतिहन्यमानाः
प्रारब्धमुत्तमगुणा न परित्यजन्ति॥
गृहकार्यम् – १९.०८.२०२१
श्लोके षष्ठं गुरु ज्ञेयं सर्वत्र लघु पञ्चमम्।
ऽऽऽऽ ।ऽऽऽ ऽऽ।। ।ऽ।ऽ
द्विश्चतुःपादयोर्ह्रस्वं सप्तमं दीर्घमन्ययोः॥
ऽ।ऽऽ ।ऽऽऽ ऽ।ऽऽ ।ऽ।ऽ
पठति (प्र॰,एक॰), चलन्ति (प्र॰,बहु॰), वदामि (उ॰,एक॰), वादथ (म॰,बहु॰), खादति (प्र॰,एक॰), खादामः (उ॰,बहु॰), पिबति (प्र॰,एक॰), गच्छति (प्र॰,एक॰)।
रामः (प्र॰,एक॰), रामैः (तृ॰,बहु॰), रामाणाम् (ष॰,बहु॰), रामस्य (ष॰,एक॰), देवेन (तृ॰,एक॰), देवे (स॰,एक॰), देवान् (द्वि॰,बहु॰), देवेषु (स॰, बहु॰)।
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॥वर्णमाला – मातृकापाठः॥
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क | ख | ग | घ | ङ |
च | छ | ज | झ | ञ |
ट | ठ | ड | ढ | ण |
त | थ | द | ध | न |
प | फ | ब | भ | म |
ए ऐ ओ औ व ᳲ अं
अकुहविसर्जनीयां कण्ठः॥ इचुयशानां तालु॥ ऋटुरषाणां मूर्धा॥ ऌतुलसानां दन्ताः॥ उपूपध्मानीयानामोष्ठौ॥ञमङणनानां नासिका च॥ एदैतोः कण्ठ-तालु॥ ओदौतोः कण्ठोष्ठम्॥ वकारस्य दन्तोष्ठम्॥ जिह्वामूलीयस्य जिह्वामूलम्॥ नासिकाऽनुस्वारस्य॥ इति स्थानानि॥
अ | आ |
इ | ई |
ऋ | ॠ |
ऌ | |
उ | ऊ |
ह | अः |
य | श |
र | ष |
ल | स |
ᳲ | |
कण्ठः |
तालु |
मूर्धा |
दन्ताः |
औष्ठौ |
॥पदम् - सुप्तिङन्तं पदम् (१.४.१४)॥
प्रकृतिः (raw form) + प्रत्ययः (suffix) = पदम् (word)
प्रातिपदिकम् + सुँप् = (नाम) पदम् – सुबन्तं पदम्।
राम + सुँ = रामः, श्याम + औ = श्यामौ, बाल + जस् = बालाः।
राम + सुप् = रामेषु, लता + सुप् = लतासु, फल + सुप् = फलेषु।
धातुः + तिङ् = (क्रिया) पदम् – तिङन्तं पदम्।
पठ् + तिप् = पठति, खाद् + तस् = खादतः, चल् + झि + चलन्ति।
पठ् + मिप् = पठामि, खाद् + वस् = खादावः, खाद् + मस् = खादामः।
छन्दः – । = लघुः वर्णः, ऽ = गुरुः वर्णः
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥गीता २.४७॥
क | र्म | ण्ये | वा | धि | का | र | स्ते |
ऽ | ऽ | ऽ | ऽ | । | ऽ | ऽ | ऽ |
मा | फ | ले | षु | क | दा | च | न |
ऽ | । | ऽ | । | । | ऽ | । | । |
मा | क | र्म | फ | ल | हे | तु | र्भू |
ऽ | ऽ | । | । | । | ऽ | ऽ | ऽ |
र्मा | ते | स | ङ्गो | स्त्व | क | र्म | णि |
ऽ | ऽ | ऽ | ऽ | । | ऽ | । | । |
पठँ व्यक्तायां वाचि (पठ्) धातुः लकाराः च
दश (Ten) लकाराः - लँट्, लिँट्, लुँट्, लृँट्, लेँट्, लोँट्, लँङ्, लिँङ्, लुँङ्, लृँङ्
लँट् Present – (रामः) पठति (रामौ) पठतः (रामाः) पठन्ति।
लृँट् Future - पठिष्यति पठिष्यतः पठिष्यन्ति।
अनद्यतने लँङ् Imperfect Past – अपठत् अपठताम् अपठन्।
लोँट् Imperative – पठतु पठताम् पठन्तु।
विधिलिँङ् Potential – पठेत् पठेताम् पठेयुः।
लृँङ् Conditional (incomplete action) – अपठिष्यत् अपठिष्यताम् अपठिष्यन्।
अनद्यतने लुँट् Future – पठिता पठितारौ पठितारः।
परोक्षे लिँट् Perfect or Remote Past – पपाठ पेठतुः पेठुः।
लुँङ् Aorist or for today– अपठीत् अपठिष्टाम् अपठिषुः।
आशीर्लिँङ् Benedictive – पठ्यात् पठ्यास्ताम् पठ्यासुः।
विभक्तिः
Ram goes to the temple of Krishna in Jaipur by car from his house for a puja.
Verb – goes.
How is each word in the sentence related with “goes”?
What is the syntax to specify the relationship?
रामः गृहात् यानेन अर्चनाय जयपुरे कृष्णस्य मन्दिरं गच्छति।
रामः रामम् रामेण रामाय रामात् रामस्य रामे हे राम।
देवः देवम् देवेन देवाय देवात् देवस्य देवे हे देव।
स्वतन्त्रः कर्त्ता। तिङ्समानाधिकरणे प्रथमा। अभिहिते प्रथमा।
खादृँ भक्षणे भ्वादिः परस्मैपदी सकर्मकः सेट् (to eat)
लट्लकारः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
प्रथमपुरुषः | खादति | खादतः | खादन्ति |
मध्यमपुरुषः | खादसि | खादथः | खादथ |
उत्तमपुरुषः | खादामि | खादावः | खादामः |
| Singular | Dual | Plural |
3rd Person | He सः, she सा, it, रामः, सीता | they two तौ, ते, रामौ, सीते | They ते, ताः, रामाः, सीताः |
2nd Person | You त्वम् | you two युवाम् | you all यूयम् |
1st Person | I अहम् | we two आवम् | we all वयम् |
खादृँ भक्षणे भ्वादिः परस्मैपदी सकर्मकः सेट् (to eat)
लृँट्लकारः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
प्रथमपुरुषः | खादिष्यति | खादिष्यतः | खादिष्यन्ति |
मध्यमपुरुषः | खादिष्यसि | खादिष्यथः | खादिष्यथ |
उत्तमपुरुषः | खादिष्यामि | खादिष्यावः | खादिष्यामः |
| Singular | Dual | Plural |
3rd Person | He सः, she सा, it, रामः, सीता | they two तौ, ते, रामौ, सीते | They ते, ताः, रामाः, सीताः |
2nd Person | You त्वम् | you two युवाम् | you all यूयम् |
1st Person | I अहम् | we two आवम् | we all वयम् |
॥राम (पु॰) – अकारान्तः Ram॥
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
1st Case – प्रथमा | देवः | देवौ | देवाः |
2nd Case – द्वितीया | देवम् | देवौ | देवान् |
3rd Case – तृतीया | देवेन | देवाभ्याम् | देवैः |
4th Case– चतुर्थी | देवाय | देवाभ्याम् | देवेभ्यः |
5th Case – पञ्चमी | देवात् | देवाभ्याम् | देवेभ्यः |
6th Case – षष्ठी | देवस्य | देवयोः | देवानाम् |
7th Case – सप्तमी | देवे | देवयोः | देवेषु |
Vocative- सम्बोधनम् | हे देव | हे देवौ | हे देवाः |
लता – आकारान्त स्त्रीलिङ्गः (Creeper)
अश्रद्धया हुतं दत्तं तपस्तप्तं कृतम् च यत्। असदित्युच्यते पार्थ न च तत्प्रेत्य नो इह॥गीता १७.२८॥
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
प्रथमा | लता | लते | लताः |
द्वितीया | लताम् | लते | लताः |
तृतीया | लतया | लताभ्याम् | लताभिः |
चतुर्थी | लतायै | लताभ्याम् | लताभ्यः |
पञ्चमी | लतायाः | लताभ्याम् | लताभ्यः |
षष्ठी | लतायाः | लतयोः | लतानाम् |
सप्तमी | लतायाम् | लतयोः | लतासु |
सम्बोधनम् | हे लते | हे लते | हे लताः |
लकारः - Tense & Mood
दश (Ten) लकाराः - लँट्, लिँट्, लुँट्, लृँट्, लेँट्, लोँट्, लँङ्, लिँङ्, लुँङ्, लृँङ्
Present – वर्तमाने लँट् (३.२.१२३)
Past – परोक्षे लिँट् (३.२.११५) (perfect), अनद्यतने लँङ् (३.२.१११) (imperfect), भूतार्थे लुँङ् (३.२.११०) (aorist)
Future – अनद्यतने लुँट् (३.३.१५) (not today), लृँट् शेषे च (३.३.१३) Imperative mood लोँट् - इच्छार्थेषु लिँङ्लोँटौ (३.३.१५७)
Potential mood विधिनिमन्त्रणामन्त्रणाधीष्टसंप्रश्नप्रार्थनेषु लिँङ् (३.३.१६१)
Benedictive mood आशिषि लिँङ्लोँटौ (३.३.१७३) आशीर्लिङ्
Conditional लिँङ्निमित्ते लृँङ् क्रियातिपत्तौ (३.३.१३९) (incomplete)
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लृँट् शेषे च (३.३.१३) - Future tense
लृँट् शेषे च (३.३.१३) – Affix lṛṭ occurs after a verbal root when a future action, or a concurrent action intended for the future action is denoted.
रामः द्रक्ष्यति – Ram will see.
गोपालः धाविष्यति – Gopal will run.
देवदत्तः पास्यति – Devadutta will drink.
यज्ञदत्तः वदिष्यति – Yagyadutta will speak.
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कारकप्रकरणम् – कर्म – 2nd Case
कर्तुरीप्सिततमं कर्म (१.४.४९) - कर्तुः क्रियया आप्तुमिष्टतमं कारकं कर्मसंज्ञं स्यात्। A karaka which the agent (karta or subject) most wishes to reach through his actions is termed karman.
कर्मणि द्वितीया (२.३.२) (अनभिहिते) The second case is used when the karman is not expressed otherwise.
अनुक्ते कर्मणि द्वितीया स्यात्। हरिं भजति। अभिहिते तु कर्मणि प्रातिपदिकार्थमात्र इति प्रथमैव। पयसा ओदनं खादति।
रामः विद्यालयं गच्छति। सीता रामं पश्यति। रामं सीता पश्यति।
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गृहकार्यम् – २६.०८.२०२१
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