सिल्वर वैडिंग-मनोहर श्याम जोशी
प्रस्तुतकर्ता-मनोज कुमार शर्मा
पी.जी.टी.(हिन्दी)
जवाहर नवोदय विद्यालय कुचामन सिटी नागौर
हिन्दी केन्द्रिक
१२वीं
पाठ परिचय
आउट ट्रे-=लकड़ी या धातु की ट्रे जिसमें बाहर भेजे जाने वाले कागजात रखे जाते हैं
मातहतों=अधीनस्थों
पतलून=पैंट,चूनेदानी=चूना रखने की डिब्बी ,धृष्टता=अशिष्टता
बाऊ=बाबू,बाबा आदम के ज़माने की= अत्यंत पुरानी,हम पुरानी चाल के=हम पुरानी सोच-विचार वाले
शब्दार्थ /मुहावरे
नहले पर दहला
मैट्रिक
दाद
बॉय सर्विस
करारा जवाब देना
हाई स्कूल / दसवीं
शाबाशी
एक अस्थाई कर्मचारी द्वारा दी जाने वाली सेवा है जो निर्धारित आयु प्राप्त करने के पहले दी जाती है
काठिन्य निवारण
खयालों=यादों
सकपकाकर= चकित होकर
झेंपना-लज्जित होना
चोंचले=दिखावे/नखरे
मिक्चर =मसाला चाय
बटुआ= कई खानों वाली एक प्रकार की छोटी थैली / पर्स / पॉकेट
बाऊ=बाबू,इनसिस्ट करना=आग्रह करना,चुग्गे भर का =चुगने लायक अर्थात अत्यल्प मात्रा में
सेक्रेटेरिएट = सचिवालय,नगण्य= जरा सा / बहुत कम ,निहायत= बिलकुल,बेहूदा=व्यर्थ / ऊटपटांग / बेकार
इसरार=आग्रह,गप्प-गप्पाष्टक=बेकार की बातचीत,रीत=तरीका/रीति
अखरती है=कष्ट देती है
अहाते= चारों ओर से घिरा हुआ मैदान ,D.I.Z.=DIRECT IMPACT ZONE अर्थात दिल्ली का वह क्षेत्र जहाँ अंग्रेजों ने औपनिवेशिक बाजार विकसित किए और वहां की इमारतें प्रसिद्द वास्तुशास्त्रियों की निगरानी में बनीं | गोल मारकेट,पहाड़ गंज,कनाट प्लेस वाला क्षेत्र
फिकरा=वाक्यांश/कथन
समहाऊ इम्प्रापर
एलाइड सर्विसेज=आईएएस,आईपीएस ,आईएफएस को छोड़कर ग्रुप ‘A’ की अन्य सेवाएँ जैसे-Indian Defense Accounts ServicesIndian Ordnance Factory ServiceIndian Trade Servicesस्कालरशिप=छात्रवृत्ति
दिलासा=ढाढ़स
तरफदारी=पक्ष,मातृसुलभ=माताओं की स्वाभाविक मनोदशा,ताऊ=पिता का बड़ा भाई,जिठानी=पति के बड़े भाई की पत्नी
ताई=ताऊ की पत्नी,सहानुभूति=हमदर्दी,उन्मुख=जिसका मुख उस ओर हो,सुभीता=आसानी,ढोंग-ढकोसला=आडम्बरपूर्ण आचरण
शानायल बुढ़िया=शान दिखाने वाली/ दिखावा करने वाली/शेखी बघारने वाली बुढ़िया,निःश्वास=लम्बी साँस
चटाई का लंहगा=चटाई का इस्तेमाल लंहगे के रूप में करना अर्थात उसके लहंगे का मजाक उड़ाना,बूढ़ी मुँह मुंहासे लोग करे तमासे=उम्र के विपरीत आचरण
बाल-जती=बाल संन्यासी,उपकृत=जिस पर उपकार किया गया हो
गधा पचीसी=पच्चीस वर्ष की उम्र अर्थात=घोर जवानी की उम्र
खुराफ़ात=शरारती कार्य
विरासत=उत्तराधिकार, तंजिया-व्यंग्यात्मक रूप से
बीवी
बीबी
मूरख लोग घर बनाते हैं,सयाने उनमें रहते हैं
पुश्तैनी=पैतृक
सब तरह से सोचने वाले हमारी बिरादरी में नहीं होते
बिरादरी=जाति भाई
असीक के फूल=भगवन के चरणों से उठाए गए फूल
चुटिया=चोटी
प्रांगण=
परिसर
मर्यादा पुरुष=परम्पराओं व आस्थाओं को मानने वाला,बाट= मार्ग,व-रल्ड=वर्ल्ड,महिमा=महत्ता
जनार्दन-ईश्वर/परमात्मा,सर्वथा=पूर्णतया, साख=विश्वाश/प्रतिष्ठा/क्रेडिट
सैप=साहब का बोलचाल में प्रयुक्त रूप
यशोधर का स्वयं का देखा हुआ कुछ भी नहीं है
गिरस्ती=गृहस्थी
कुंवारे की गिरस्ती में देखने को होता क्या है ?
बुजुर्गियत=बड़प्पन,बुढ़याकाल=बुढ़ापा,एतराज=नाराजगी
संध्या=शाम को की जाने वाली उपासना
वानप्रस्थ=जीवन के चार आश्रमों में से एक / वन की तरफ प्रस्थान
पैदाइशी बुजुर्गवार = जन्म से ही बड़प्पन वाले
मानस पुत्र=वह संतान जिसकी उत्पत्ति मात्र इच्छा से हुई हो (माना हुआ)
भाऊ=बच्चा
पट्टशिष्य=प्रिय शिष्य,निष्ठा=आस्था,जन्यों पुन्युं=जनेऊ बदलने वाली पूर्णिमा
पत्थर की लकीर होना=अमिट/स्थायी /सत्य होना
झूठे मुँह से=औपचरिकता वश
“बब्बा,हमारी समझ में नहीं आता कि इन कामों के लिए आप एक नौकर क्यों नहीं रख लेते ? ईजा को भी आराम हो जाएगा |
यह काम मैं अपने पैसे से करने को कह रहा हूँ आपके से नहीं जो आप नुक्ताचीनी करें |
नुक्ताचीनी =छोटी-छोटी कमी
कारपेट=फर्श का कालीन
ऐसा कभी नहीं कहता कि लीजिए पिता जी मैं आपके लिए यह टी.वी. ले आया |
सिलसिला=कड़ी ,मलबा-गिरे हुए माकन के ईंट-पत्थर
सैंडो
खिज़ाब=बालों को काला करने का रंग
L.D.C.-LOWER DEVISION CLERK
झिड़की=डांट-फटकार,S.A.S. = SUBORDINATE ACCOUNTS/AUDIT SERVICE
CONVEYANCE ALLOWANCE=वाहन भत्ता ,PERKS=सुविधाएँ
इस पर बनी रोटी मुझे तो समहाऊ रोटी जैसी लगती नहीं
“मैं अपने बॉस को भी बुला लूँगा इसी बहाने”
जिन्दगी बना दी तुम्हारे सेकेण्ड क्लास बी.ए.बेटे की,कहते हो बिगाड़ दिया |
हरचंद=बहुत अधिक
किशनदा कहा करते थे…….टाई-सूट पहनना आना चाहिए लेकिन धोती-कुर्ता अपनी पोशाक है यह नहीं भूलना चाहिए
विलायती=विदेशी
“तो बब्बा,पहले जाकर संध्या कीजिए,आपकी वजह से हम सब कब तक रुके रहेंगे ?
पद्मासन
खटराग=परेशानी,आमादा=उद्यत/तत्पर
आश्वस्त=जिसे तसल्ली दी गई हो
गमछा=अँगोछा
गमछा पहनने की आदत भी उन्हें किशनदा से विरासत में मिली है और उनके बच्चे इसके सख्त खिलाफ हैं
ना-नुच=आनाकानी
सैश
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पाठ्य पुस्तक के प्रश्न और उत्तर
प्रश्न 1: यशोधर बाबू की पत्नी समय के साथ ढल सकने में सफल होती है लेकिन यशोधर बाबू असफल रहते हैं। ऐसा क्यों?�अथवा ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के आधार पर बताइए कि यशोधर बाबू समय के अनुसार क्यों नहीं ढल सके?�
उनकी पत्नी पुराने संस्कारों की थीं। वे एक संयुक्त परिवार में आई थीं जहाँ उन्हें दुखद अनुभव हुआ। उनकी इच्छाएँ अतृप्त रहीं। वे मातृसुलभ प्रेम के कारण अपनी संतानों का पक्ष लेती हैं |यशोधर बाबू की पत्नी समय को अच्छी तरह पहचानती हैं। वह जानती है कि बच्चों की सहानुभूति तभी प्राप्त की जा सकेगी जब बच्चों की सोच के अनुसार चला जाए। व्यवहार भी यही कहता है। दूसरे उसके व्यक्तित्व के विकास पर किसी व्यक्तिविशेष या वाद का प्रभाव नहीं है। तीसरे, संयुक्त परिवार के साथ उसका अनुभव सुखद नहीं रहा। उसकी इच्छाएँ अतृप्त रही। उसके अनुसार, “मुझे आचार-व्यवहार के ऐसे बंधनों में रखा गया मानो मैं जवान औरत नहीं, बुढ़िया थी।” अब वह बेटी के कहने के हिसाब से कपड़े पहनती है। वह बेटों के मामले में भी दखल नहीं देती।
यशोधर बाबू स्वयं को बदल नहीं पाते। वे सदैव किसी-न-किसी उलझन के शिकार हैं। वे सिद्धांतवादी हैं। इस कारण वे परिवार के सदस्यों से तालमेल नहीं बिठा पाते। उन पर किशनदा का प्रभाव है जो परंपरा को ढोते हुए अंत में फटेहाल मरे। वे संयुक्त परिवार, भारतीय परंपराओं को बनाए रखना चाहते हैं, परंतु परिवार उन्हें निरर्थक मानता है। यशोधर बाबू पार्टीबाजी, फैशन, अच्छे मकान में रहना आदि को पसंद नहीं करते। वे आधुनिक भौतिक वस्तुओं को बंधन मानते हैं। फलतः वे अलग-थलग हो जाते हैं। अंत में, उन्हें परिस्थितियों से समझौता करना पड़ता है।
यशोधर बाबू बचपन से ही जिम्मेदारियों के बोझ से लद गए थे। बचपन में ही उनके माता-पिता का देहांत हो गया था। उनका पालन-पोषण उनकी विधवा बुआ ने किया। मैट्रिक होने के बाद वे दिल्ली आ गए तथा किशन दा जैसे कुंआरे के पास रहे। इस तरह वे सदैव उन लोगों के साथ रहे जिन्हें कभी परिवार का सुख नहीं मिला। वे सदैव पुराने लोगों के साथ रहे, पले, बढ़े। अत: उन परंपराओं को छोड़ नहीं सकते थे। उन पर किशन दा के सिद्धांतों का बहुत प्रभाव था। इन सब कारणों से यशोधर बाबू समय के साथ बदलने में असफल रहते हैं।
प्रश्न 2: पाठ में ‘जो हुआ होगा ‘ वाक्य की आप कितनी अर्थ छवियाँ खोज सकते/सकती हैं?�अथवा ‘जो हुआ होगा ‘ की दो अर्थ छवियाँ लिखिए।�
पाठ में ‘जो हुआ होगा।’ वाक्य पहली बार तब आता है जब यशोधर किशनदा के किसी जाति-भाई से यशोधर उनकी मौत का कारण पूछते हैं तो उत्तर मिलता है-जो हुआ होगा अर्थात पता नहीं, क्या हुआ। इसका अर्थ यह है कि किशनदा की मृत्यु का कारण जानने की इच्छा भी किसी में नहीं थी। इससे उनकी हीन दशा का पता चलता है।
दूसरा अर्थ किशनदा ही उपयोग करते हैं। वे इसे अपनों से मिली उपेक्षा के लिए करते हैं। वे कहते हैं-“भाऊ सभी जन इसी ‘जो हुआ होगा’ से मरते हैं-गृहस्थ हों, ब्रहमचारी हों, अमीर हों, गरीब हों, मरते ‘जो हुआ होगा।’ से ही हैं। हाँ-हाँ, शुरू में और आखिर में, सब अकेले ही होते हैं। अपना कोई नहीं ठहरा दुनिया में, बस अपना नियम अपना हुआ।”
प्रश्न 3: ‘समहाउ इप्रॉपर’ वाक्यांश का प्रयोग यशोधर बाबू लगभग हर वाक्य के प्रारंभ में तकिया कलाम की तरह करते हैं। इस वाक्यांश का उनके व्यक्तित्व और कहानी के कथ्य से क्या सबध बनता है?
समहाउ इंप्रापर का अर्थ है – कुछ-न-कुछ गलत जरूर है। यशोधर बाबू द्वारा इस वाक्यांश का प्रयोग करना वास्तव में आज की स्थिति का सच्चा वर्णन करना है। आज परिवार, समाज और राष्ट्र में कहीं-कहीं कुछ-न-कुछ गलत ज़रूर हो रहा है। फिर यशोधर बाबू जैसे सिद्धांतवादी लोगों के लिए ऐसी स्थिति को स्वीकारना सहज नहीं है। उनका तकियाकलाम निम्न संदर्भो में प्रयुक्त हुआ है|
6-छोटे साले के ओछेपन पर
7-शादी के संबंध में बेटी द्वारा स्वयं निर्णय लेने पर
8-खुशहाली में रिश्तेदारों की उपेक्षा करने पर
9-केक काटने की विदेशी परंपरा पर आदि।
इन संदर्भो से स्पष्ट होता है कि यशोधर बाबू समय के हिसाब से अप्रासंगिक हो गए हैं, इस कारण वे उपेक्षित रह गए।
प्रश्न 4: यशोधर बाबू की कहानी को दिशा देने में किशन दा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आपके जीवन की दिशा देने में किसका महत्वपूर्ण योगदान रहा और कैसे?��यशोधर बाबू की कहानी को दिशा देने में किशनदा की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी तरह मेरे जीवन को दिशा देने में मेरे एक अध्यापक महोदय की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। वे कक्षा में तो बहुत उम्दा तरीके से पढ़ाते ही थे, इसके अलावा वे विद्यार्थियों में बहुत रुचि भी लेते थे। मुझे उन्होंने पहली बार स्वाधीनता दिवस पर भाषण देने के लिये चुना। मेरे लिये भाषण लिखा। कैसे बोलना है यह भी सिखाया। जब मैंने संतोषजनक तरीके से भाषण दे दिया तो मेरी पीठ भी थपथपायी। फिर मुझे खेल-कूद, नाटकों आदि में भी भाग लेने के लिये उन्हीं ने प्रोत्साहन दिया। आज मैं जो कुछ भी हूं, उसमें उनका ही प्रमुख योगदान है।
प्रश्न 5: वर्तमान समय में परिवार की सरंचना, स्वरूप से जुड़ आपके अनुभव इस कहानी से कहाँ तक सामजस्य बैठा पाते है?
यह कहानी आज के समय की पारिवारिक संरचना और उसके स्वरूप का सही अंकन करती है। आज की परिस्थितियाँ इस कहानी की मूल संवेदना को प्रस्तुत करती हैं। आज के परिवारों में सिद्धांत और व्यवहार का अंतर दिखाई देता है। आज के परिवारों में भी यशोधर बाबू जैसे लोग मिल जाते हैं जो चाहकर भी स्वयं को बदल नहीं सकते। दूसरे को बदलता देख कर वे क्रोधित हो जाते हैं। उनका क्रोध स्वाभाविक है क्योंकि समय और समाज का बदलना जरूरी है। समय परिवर्तनशील है और व्यक्ति को उसके अनुसार ढल जाना चाहिए। यह कहानी वर्तमान समय की पारिवारिक संरचना और स्वरूप को अच्छे ढंग से प्रस्तुत करती है।
प्रश्न 6:निम्नलिखित में से किस आप कहानी की मूल सवेदना कहगे/कहगी और क्यों?�हाशिए पर धकेल जाते मानवीय मूल्य / पीढ़ी का अतराल / पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव�
इस कहानी में, मानवीय मूल्यों-भाईचारा, प्रेम, रिश्तेदारी, बुजुर्गों का सम्मान आदि-को हाशिए पर दिखाया गया है। यशोधर पुरानी परंपरा के व्यक्ति हैं, जबकि उनके बच्चे पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित हैं। वे ‘सिल्वर वैडिंग’ जैसी पाश्चात्य परंपरा का निर्वाह करते हैं। इन सबके बावजूद यह कहानी पीढ़ी के अंतराल को स्पष्ट करती है। यशोधर बाबू स्वयं पीढ़ी के अंतराल को स्वीकार हैं। वे मानते हैं कि दुनियादारी के मामले में उनकी संतान व पत्नी उससे आगे हैं। वह पुराने आदशों व मूल्यों जुडे हुए हैं। ऑफ़िस में भी वे कर्मचारियों के साथ ऐसे ही संबंध बनाए हुए हैं। चड्ढा की चौड़ी मोहरी वाली उन्हें ‘समहाउ इंप्रॉपर’ लगती है। उन्हें अपनी बीवी व बच्चों का रहन-सहन भी अनुपयुक्त जान पड़ता है। वे जिन सामाजिक मूल्यों को बचाना चाहते हैं, नयी पीढ़ी उनका पुरजोर विरोध करती है। नयी पीढ़ी पुरानी सादगी को फटीचरी सिल्वर वैडिंग के मानती है। वह रिश्तेदारी निभाने को घाटे का सौदा बताती है। इन्हीं सब मूल्यों से प्रभावित होकर यशोधर बाबू के पिता के लिए नया गाउन लाते हैं ताकि फटे पुलोवर से उन्हें शर्मिदा न होना पड़ा। उन्हें अपने मान-सम्मान की है कि मस्तिक नीं। अत: यह कहानी पड के अंताल की कहानी कहता है और बाह कहान मूल संवेदना है।
प्रश्न 7:अपने घर और विद्यालय के आस-पास हो रह उन बदलावों के बारे में लिख जो सुविधाजनक और आधुनिक होते हुए भी बुजुगों को अच्छे नहीं लगते। अच्छा न लगने के क्या कारण होंगे?
परिवर्तन प्रकृति का नियम है। बदलना ही समय की पहचान है। आज घर का परिवेश बिलकुल बदल चुका है। एकल परिवार प्रणाली प्रचलन में आ चुकी है यद्यपि यह सुविधाजनक है किंतु इसके बुरे परिणाम भी सामने आ रहे हैं। लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। विद्यालय आज आधुनिक रूप धारण कर चुके हैं लेकिन यह रूप बुजुर्गों को बिलकुल भी पसंद नहीं आ रहा। कारण स्पष्ट है कि आधुनिकता के नाम पर इन विद्यालयों में पाश्चात्य संस्कृति का खुलकर समर्थन किया जा रहा है। शिक्षा और परिवार में परिवर्तन के नाम पर संस्कृति का परित्याग होता जा रहा है।
प्रश्न 8:यशोधर बाबू के बारे में आपकी क्या धारणा बनती है? दिए गए तीन कथनों में से आप जिसके समर्थन में हैं, अपने अनुभवों और सोच के आधार पर उसके लिए तर्क दीजिए:-----�1-यशोधर बाबू के विचार पूरी तरह से पुराने हैं और वे सहानुभूति के पात्र नहीं हैं।�2-यशोधर बाबू में एक तरह का द्वंद्व है जिसके कारण नया उन्हें कभी-कभी खींचता तो है पर पुराना छोड़ता नहीं। इसलिए उन्हें सहानुभूति के साथ देखने की जरूरत हैं।�3-यशोधर बाबू एक आदर्श व्यक्तित्व हैं और नयी पीढ़ी द्वारा उनके विचारों का अपनाना ही उचित हैं।�
प्रस्तुत कथा में यशोधर बाबू में एक तरह का द्वंद्व है जिसके कारण नया उन्हें कभी-कभी खींचता तो है, पर पुराना छोड़ता नहीं। इसलिए उन्हें सहानुभूति के साथ देखने की जरूरत है। ये बातें कहानी पढ़ने के बाद यशोधर बाबू पर पूर्णत: लागू होती हैं। वे पुरानी सोच के व्यक्ति हैं। समाज को वे अपने मूल्यों के हिसाब से चलाना चाहते हैं। वे अपने बच्चों की तरक्की से खुश हैं। उन्हें किशन दा की मौत का कारण समझ में आता है। वह स्वयं को उनसे अलग नहीं कर पाते। परिवार में वे स्वयं को उपेक्षित मानने लगते हैं। वे चाहते हैं कि नई में उन्हें सम्मान दे,उनके अनुभवों का लाभ ले परंतु नई पीढ़ी द्वारा की गई उपेक्षा से दुखी भी हो जाते हैं ।अतः ऐसे व्यक्तियों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार जरूरी है।