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गुरु तेग बहादुर जी का परिचय

पवन कुमारी

असिस्टेंट प्रोफेसर

स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग

हंसराज महिला महाविद्यालय

जालंधर

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  • हिन्द की चादर, गुरु तेग बहादुर ” जी ने धर्म की रक्षा करने के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया। सिख धर्म में गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी के बाद जब गुरु तेग बहादुर जी ने शहीदी प्राप्त की तो जालिम मुगलों के जुल्मों तले रह रहे लोग अपने अधिकारों के लिए उनसे टक्कर लेने और कुर्बानियां देने के लिए तैयार हो गए।

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जन्म और बचपन�

  • गुरु तेग बहादुर जी का जन्म 1 अप्रैल, 1621 ई0 को अमृतसर में श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी और माता नानकी जी के घर हुआ। आपके बचपन का नाम त्यागमल था। आप गुरु हरगोबिंद साहिब जी के सब से छोटे सुपुत्र थे। गुरु तेग बहादुर जी बचपन से ही संत स्वरुप, अडोल चित, गंभीर और निर्भय स्वभाव के मालिक थे। आप कई-कई घंटे भक्ति में लीन रहते थे। गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने अपनी देख-रेख में आपको विद्या दिलवाई। 1634 ई0 में आप अपने पिता के साथ करतारपुर आ गए।

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विवाह और भक्ति�

  • आप का विवाह करतारपुर निवासी श्री लाल चंद की सुपुत्री माता गुजर कौर के साथ 1634 ई. में हुआ। आप एकांत में रह कर परमात्मा का नाम जपते रहते थे। गुरु हरगोबिन्द जी के ज्योति जोत समाने के बाद आप गाँव बाबा बकाला में आ गए और वहीं 20 साल तक बैठ आकर सिमरन करते रहे।

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�गुरु तेग बहादुर जी के व्यक्तित्व के गुण

  • उच्चतम तपस्वी एवं भक्त-

  • त्याग की साक्षात मूर्ति –

साधो मन का मान त्यागउए।

* * *

जाग लेहु रे मना जाग लेहु

कहा गाफल सोइया

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  • निर्भय – पद अथवा निर्भयता की मूर्ति

  • बहादुर योद्धा एवं तेग के धनी –

  • कबीर जी ने लिखा हैं –

सुरा सो पहचानिए जो लरे दीन के हेत

पुरजा पुरजा कहिट मरे कबहूँ न छाड़े खेत

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  • आज्ञाकारी पुत्र

  • गरीब निवाज़ अर्थात दीनों के रक्षक

  • महान दार्शनिक

  • शांति प्रिय

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  • लोक रक्षक

  • क्षमाशील

  • माया से मुक्त

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  • धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक

  • क्रांतिकारी दृष्टिकोण

  • दृढ़ निश्चयी

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  • समन्वयकारी

  • उच्चकोटी के कवि

  • कर्मवादी सिद्धांत

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  • चमत्कारी प्रदर्शन का निषेध

  • परम संत

  • धार्मिक नेता

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  • वीर सेनानी

  • अनुशासन गेही और ग्रहस्त स्वामी

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गुरु तेग बहादुर जी की विचारधारा

  • गुरु तेग बहादुर जी के अभूतपूर्व बलिदान के कारण ही उन्हें ‘हिंद की चादर - गुरु तेग बहादुर’ कहकर सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है।

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सगल जगतु है जैसे सुपना,

यह संसार सपना है। इसलिए इस नश्वर, क्षणभंगुर संसार का मोह त्यागकर प्रभु की शरण लेना ही उचित है।’ 

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नानक हरि गुन गाइ ले छाड़ि सगल जंजाल’।

 गुरु जी का कथन है कि चिंता उसकी करो, जो अनहोनी हो-‘चिंता ताकी कीजिये जो अनहोनी होय’। इस संसार में तो कुछ भी स्थिर नहीं है। गुरु तेग बहादुर के अनुसार,समरसता सहज जीवन जीने का सबसे सशक्त आधार है। 

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नह निंदिआ नहिं उसतति जाकै लोभ मोह अभिमाना। हरख सोग ते रहै निआरऊ नाहि मान अपमाना’।

गुरु जी का कहना है कि वैराग्यपूर्ण दृष्टि से संसार में रहते हुए सभी सकारात्मक - नकारात्मक भावों से निर्लिप्त होकर ही सुखी और सहज जीवन जिया जा सकता है।

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‘तिलक जंझू राखा प्रभता का। कीनो बड़ो कलू महि साका।।’

  • गुरु तेग बहादुर ऐसे ही अद्वितीय आत्मबलिदानी थे। उन्होंने कश्मीरी पंडितों के धार्मिक अधिकारों ‘तिलक’ और ‘जनेऊ’ की रक्षा के लिए दिल्ली के शीशगंज में अपना शीश कटाकर प्राणों का उत्सर्ग कर दिया।

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“साधो राम सरनि बिसरामा ।

बेद पुरान पड़े को इह गुन सिमरे हरि को नामा ॥

 

वेद-पुराण आदि भी इसके साक्षी हैं कि एकमात्र रास्ता है प्राणी राम की शरण में जाकर विश्राम करे तथा राम नाम का सुमिरन करे.

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“रे मन राम सिंओ कर प्रीति ।

सखनी गोविन्द गुण सुनो और गावहो रसना गीत।।”

मानव देह दुर्लभ है. अत: जिसने जन्म दिया है, जीवन दिया है, उससे प्रीति करना जरूरी है, उसके सुकार्यों के गीत गाये जायें

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मन रे कउनु कुमति तै लीनी ॥

पर दारा निंदिआ रस रचिओ राम भगति नहि कीनी ॥

राम भक्ति नहीं करने पर मन पीछे पश्चाताप करता है. निंदा करने में ही सारा जीवन बीत गया. यह कुमति नहीं तो क्या है?

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महिमा नाम कहा लउ बरनउ राम कहत बंधन तिह तूटा

राम की महिमा अवर्णनीय है. सही बात यह है कि 'राम' शब्द के सुमिरन मात्र से ही संसारिक बंधनों से छुटकारा मिल जाता है- 

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अजहू समझि कछु बिगरिओ नाहिनि भजि ले नामु मुरारि ॥

कहु नानक निज मतु साधन कउ भाखिओ तोहि पुकारि ॥

अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है. सवेरे का भूला हुआ आदमी अगर शाम को घर लौट जाता है, तो उसे भूला नहीं कहा जायेगा

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साधो इहु जगु भरम भुलाना ।

राम नाम का सिमरनु छोडिआ माइआ हाथि बिकाना ॥

सचमुच में राम की महिमा को न जानना, माया के हाथ बिकना है

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  • 1. गलतियां हमेशा क्षमा की जा सकती हैं, यदि आपके पास उन्हें स्वीकारने का साहस हो

  • 2. एक सज्जन व्यक्ति वह है जो अनजाने में किसी की भावनाओ को ठेस ना पहुंचाएं

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  • हर एक जीवित प्राणी के प्रति दया रखो, घृणा से विनाश होता है

  • हार और जीत यह आपकी सोच पर ही निर्भर है, मान लो तो हार है ठान लो तो जीत है

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  • सभी जीवित प्राणियों के प्रति सम्मान अहिंसा है

  • दिलेरी डर की गैरमौजूदगी नहीं, बल्कि यह फैसला है कि डर से भी जरूरी कुछ है

  • जीवन किसी के साहस के अनुपात में सिमटता या विस्तृत होता है

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  • प्यार पर एक और बार और हमेशा एक और बार यकीन करने का साहस रखिए

  • डर कहीं और नहीं, बस आपके दिमाग में होता है

  • साहस ऐसी जगह पाया जाता है जहां उसकी संभावना कम हो

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धन्यवाद