पाठ - पाँच�अक्षरों का महत्व
गुणाकर मूले
उद्देश्य
1. विद्यार्थी अक्षरों व इतिहास लेखन के महत्व को जानेंगे।
2.विद्यार्थियों को लिपि का ज्ञान होगा।
3.मानव विकास में अक्षरों की भूमिका को विद्यार्थी समझने की कोशिश करेंगे।
4.विद्यार्थी अक्षर विविधता को समझेंगे।
5.विद्यार्थी पृथ्वी की उत्पत्ति एवं जीव जंतुओं के उत्पत्ति के संबंध में जानेंगे।
पाठ का सारांश
लेखक गुणाकर मुले ने इस निबंध के माध्यम से हमेंअक्षरों के इतिहास और उनकी हमारे जीवन में उपयोगिता के विषय में बताया है। इस संसार में अब तक करोड़ों पुस्तकें छप चुकी हैं और हजारों पुस्तकें और पत्र पत्रिकाएं प्रतिदिन छपती हैं ।इन सबके मूल में अक्षर है। यदि यह अक्षर नहीं होते तो आज इस संसार का क्या हाल होता इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
प्रागैतिहासिक काल वह समय है जब मनुष्य ने सबसे पहले चित्रों के माध्यम से अपने भावों को व्यक्त किया चित्र संकेतों के बाद भाव संकेत अस्तित्व में आए मनुष्य ने सबसे पहले वृत्त और किरणों के माध्यम से अपने भावों को व्यक्त करना आरंभ किया धीरे-धीरे उसने इन चित्र और भाव संकेतों का विकास करते करते अक्षरों की खोज की अक्षरों की खोज को अभी मुश्किल से 6000 साल। हुए हैं।
अक्षरो की खोज मनुष्य की। सबसे बड़ी खोज है इसी के माध्यम से एक पीढ़ी का ज्ञान दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता है। अक्षरा और उन से बनी लिपियों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। इसलिए हम सभी को अक्षरों की कहानी का ज्ञान होना आवश्यक है
शब्दकोश
तादाद - संख्या
मूल - आधार
अनादि काल - जिसका आरम्भ न हो
प्रागैतिहासिक - इतिहास से पहले का समय
वृत - गोला
ध्योतक - बताने वाली
निरंतरता- निरंतरता
कौम - जाति, राष्ट्र
लिपि - अक्षरों का लिखित रूप
पीढी - वंशज
सभ्य - उन्नत
युग - काल , समय
व्यक्त - प्रकट
गृहकार्य
1. पाठ के आधार पर बताइए कि मनुष्य में अक्षरों की खोज कैसे की होगी?
2.अक्षरों की खोज होने से नए युग की शुरुआत कैसे हुई?
3.यदि अक्षरों की खोज ना हुई होती तो आज की दुनिया का स्वरूप कैसा होता है?
4.अक्षरों की खोज से पहले प्रागैतिहासिक काल के मनुष्य के सामने क्या क्या कठिनाइयां आती रही होंगी?
5.अक्षरों की खोज के विषय में पुरानी लोगों का क्या मानना था?