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पाठ - 11

जो देखकर भी नहीं देखते

शिक्षक- सीता राम राय

हिंदी स्नातक शिक्षक

जवाहर नवोदय विद्यालय बोकारो

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लेखिका- हेलेन केलर

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  • हेलेन एडम्स केलर २7जून 1880 को अमेरिका के टस्कंबिया, अलबामा में पैदा हुईं।उन्नीस  महीनों के बाद वो बीमार हो गयी  और उस बीमारी में उनकी नजर, ज़ुबान  और सुनने की शक्ती चली गयी|  हेलन केलर के माता-पिता के सामने एक चुनौती आ खड़ी हुई कि ऐसा कौन शिक्षक होगा जो हेलन केलर को अच्छी शिक्षा दे पाए । ऐसा इसलिए क्योंकि हेलन केलर सामान्य बच्चों से भिन्न थी। इसके बाद उन्हें आखिरकार एक शिक्षक मिल गया जिनका नाम था "एनि सुलिव्हान"। इन्होंने हेलन केलर को हर तरीके से शिक्षा दी, जिसमें उन्होंने मेन्युअल अल्फाबेट और ब्रेल लिपी आदि पद्धतियों से शिक्षा देने की कोशिश की। जैसे-तैसे संघर्षो का दौर बीतता गया और एक तरह से हेलन केलर ने राइट हमसन स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पूरी की।प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने के बाद अब हेलन केलर अपने आपको अकेला समझने लगी, क्योंकि उनकी जिज्ञासा थी कि वो भी सभी की तरह पढ़ाई करें। इसके लिए आगे 1902 में स्नातक की पढ़ाई करने के लिए हेलन केलर ने रेडक्लिफ काॅलेज में दाखिला लिया। वहां हेलन केलर सामान्य छात्रों के साथ पढ़ने लगी। यहां पढ़ते-पढ़ते हेलन केलर को लिखने का शौक जगा और वो लिखने लगी। हेलन केलर ने उस दौर में एक ऐसी पुस्तक लिखी जिन्होंने उनको बहुत बड़ी उपलब्धि दिलाई और उस पुस्तक का नाम है ‘‘द स्टोरी आॅफ माय लाइफ‘‘।
  • अपने जीवन में संघर्षो के ऐसे दौर को पार करके हेलन केलर ने समझ लिया था कि जीवन में यदि संघर्ष किया जाए, तो कोई काम ऐसा नहीं है जिसे हम ना कर सकते हो। यहीं सोच लेकर हेलन केलर ने समाज के हित के लिए कदम बढ़ाया और वो अपने जैसे लोगों को जागरूक करने निकल पड़ी।

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भोज पत्र की छाल एवं मखमली घास

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इंद्रधनुष

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शब्दार्थ:

मखमली सतह - मुलायम परत,

एहसास - अनुभव,

खुशनसीब - भाग्यशाली,

मचलना - बेचैन होना,

मुग्ध होना - मोहित होना,

संवेदना - अनुभूति,

आस लगाना - इंतजार करना,

नियामक - ईश्वरीय उपहार,

इंद्रधनुषी रंग - इंद्रधनुष की तरह सात रंग

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भाषा की बात:

अगर मुझे इन चीजों को छूने भर से कितनी खुशी मिलती है तो उसकी सुंदरता देखकर तो मेरा मन मुग्ध ही हो जाएगा ।

ऊपर रेखांकित शब्द किसी भाव और किसी विशेषता के बारे में बता रहा है ऐसे संज्ञाएं भाववाचक संज्ञा कहलाती हैं इससे जुड़ी शब्दों को हम सिर्फ महसूस करते हैं नीचे लिखी भाववाचक संज्ञाओं को पढ़िए और उसे विशेषण बनाइए.................

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मिठास – मीठा, भूख – भूखा,

शांति – शांत, भोलापन – भोला,

बुढापा – बूढ़ा, घबराहट- घबराना,

बहाव – बहना, फुर्ती – फुर्तीला,

ताजगी – ताजा, क्रोध – क्रोधी,

मजदूरी – मजदूर

भाववाचक संज्ञा से विशेषण/क्रिया :

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  • जंगल की सैर से लौटी अपनी सहेली से पूछती हैं कि उसने जंगल में क्या देखा तो उत्तर देती है कि कुछ खास नहीं I यह सुनकर लेखिका को आश्चर्य नहीं होता क्योंकि अक्सर उसे ऐसे ही जवाब सुनने को मिलते हैं लेखिका को आदत हो चुकी है ऐसे जवाब सुनते-सुनते।
  • वह मानती हैं कि आंख वाले लोग अक्सर बहुत कम देखते हैं। उन्हें आश्चर्य होता है कि कोई जंगल में घूमे और पूछा जाता है कि आपने क्या देखा तो कहते हैं कोई खास नहीं ऐसा कैसे हो सकता है ?
  • वह स्वयं अपनी बात करती हैं की प्रकृति में विद्यमान सैकड़ों रोचक चीज को छू कर पहचान सकती हैं जैसे पेड़ों की पत्तियां, फूलों की घुमावदार बनावट,भोजपत्र की चिकनी छाल ,मखमली घास ,कोमल पत्तियां खुरदरे पेड़ों की छाल, नईकलियों को छूकर महसूस कर सकती हैंI आगे करती हैं कि लोग अलग-अलग चीजों के संवेदनाओ को अनुभव नहीं करते जबकि लेखिका को इनके स्पर्श मात्र से अत्यंत खुशी प्राप्त होती है Iलेखिका को चिड़ियों के मधुर स्वर,बहते झरने के पानी को उंगलियों के बीच महसूस करना, बदलता हुआ मौसम में अपार खुशी प्रदान करता है जबकि लोगों के पास ईश्वर का दिया हुआ नेत्र ज्योति है फिर भी वे उन चीजों की आस लगाए बैठे रहते हैं उनके पास नहीं है I लेखिका को तो प्रकृति की सुंदरता को देखने के लिए अत्यंत बेचैन हो जाती हैंI प्रकृति की इन चीजों को आंख वाले लोग इस तरह क्यों नहीं देखते Iकितने दुख की बात है कि
  • आंखों की इस अनुपम देन को लोग साधारण सी चीज मानते हैंI मनुष्य कभी भी उन चीजों का कदर नहीं करता जो उसके पास है जबकि दृष्टि का आशीर्वाद जो ईश्वर की दी हुई इस नियामत है, से जीवन खुशियों को इंद्रधनुषी रंग में रंग सकते हैंI

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वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न- 1 : लेखिका किसके स्वर पर मंत्रमुग्ध हो जाती थी?

उत्तर : i चिड़िया के, ii मोर के, iii कोयल के, iv बच्चों के,

प्रश्न- 2 : लेखिका अक्सर किसकी परीक्षा रहती थी?

उत्तर : i माता की,ii पिता की, iii मित्रों की, iv भाई - बहन की,

प्रश्न- 3 : मित्र का जवाब सुनकर लेखिका को क्या नहीं हुआ?

उत्तर : i चिंता,ii घबराहट, iii क्रोध,iv आश्चर्य,

प्रश्न- 4 : चीड़ की छाल स्पर्श करने में कैसी महसूस होती है?

उत्तर :i चिकने,ii खुरदरी,iii चिपचिपी,iv लिबलिबी

प्रश्न- 5 : लेखिका की मित्र कहां की सैर करके लौटी थी?

उत्तर : i जंगल की, ii बगीचे की,iii चिड़ियाघर की,iv बाजार की

प्रश्न- 6 : मनुष्य अपनी ------की कभी कदर नहीं करता।

उत्तर :i क्षमताओं,ii अक्षमताओं, iii सुंदरता, iv महानता

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लघु उत्तरीय प्रश्न :

1- कभी-कभी लेखिका का दिल क्यों मचल उठता है?

उत्तर : उन्हें लगता है जब चीजों को छूकर इतनी खुशी मिलती है तो देखकर कितनी खुशी मिलेगी I

2- लेखिका को पत्तियों और घास के मैदान कैसे लगते हैं?

उत्तर : महँगे कालीन से भी ज्यादा प्रिय लगते हैं I

3- हेलेन केलर प्रकृति की किन चीजों को छूकर पहचान लेती हैं?

उत्तर : लेखिका पेड़ की टहनी पर हाथ रखते ही किसी चिड़िया के मधुर स्वर को महसूस कर लेती हैं, वह नदी और झरनों के पानी को छूकर महसूस कर लेती हैं I

4- दृष्टि के आशीर्वाद से जिंदगी में कैसे रंग भरा जा सकता है?

उत्तर : रंग यदि मनुष्य जीवन के कण-कण का आनंद ले तो वह अपनी जिंदगी को खुशियों के सतरंगी

अर्थात इंद्रधनुषी रंगों से भर सकता है I

5- कुछ खास तो नहीं हेलेन केलर की मित्र ने जवाब किस मौके पर दिया और हेलेन केलर को जवाब सुनकर आश्चर्य क्यों नहीं हुआ?

उत्तर : क्योंकि वे ऐसे उत्तर सुनने के आदी हो चुकी थीं I

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :

1- जो देखकर भी नहीं देखते पाठ से आपको क्या सीख मिलती है?

उत्तर : अपनी क्षमताओं का प्रयोग करें, जो आपके पास है I चीजों को लेकर रोते नहीं रहे जो आपके पास नहीं हैI ईश्वर की दी हुई नियामक का भरपूर आनंद उठा कर स्वयं को प्रसन्न रखना चाहिए?

2- लेखिका हेलेन केलर ने किन-किन प्राकृतिक चीजों का वर्णन किया है तथा उसके बारे में क्या लिखा है?