मगध का उत्थान
प्रो.सुरेश देवड़ा
शासकीय महाविद्यालय सुवासरा
मगध का उत्थान
4. उर्वर भूमि :- मगध राज्य गंगा के मैदानी इलाके में स्थित था जहाँ की मिट्टी उपजाऊ थी | जिसके कारण कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई और साम्राज्य आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ |
5. नए बौद्धिक विचारों का समर्थन:- मगध के लोगों ने ब्राम्हणवादी रुढियों का विरोध किया और नवीन धार्मिक चेतना का समर्थन किया |
6. शासकों के वैवाहिक सम्बन्ध:-
7.सम्राटों की दृढ़ इच्छा शक्ति:- बिम्बसार,अजातशत्रु,महापद्मानन्द जैसे शासकों ने मगध साम्रज्य का विस्तार किया और इसे शक्ति समृद्ध बनाया |
बिम्बसार
क्षेमन्द्र के राजा की लड़की
कौशल नरेश प्रसेनाजित की बहिन महाकौशला
लिच्छवी के प्रमुख चेटक की बहिन चेलना
वासवी विदेहकुमारी
मगध के राज्यवंश
मगध साम्राज्य के उत्थान में तीन ऐतिहासिक राजवंशों ने महत्वपूर्ण योगदान दियाहर्यक वंश(543 ई.पू. से 407 ई.पू.) इस वंश में तीन प्रमुख शासक हुए
वैवाहिक सम्बन्ध - बिम्बसार ने साम्राज्य विस्तार के लिए विवाह सम्बन्धों की स्थापना की |
युद्ध विजय- बिम्बसार ने युध विजय के मध्यम से भी साम्राज्य का विस्तार किया उसने एक स्थायी सेना रखी थी मगध में हाथी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध थे। अंग पर आक्रमण कर वहीं के राजा ब्रह्मदत्त को परास्त किया फलत: वह मारा गया और अंग मगध राज्य में मिला लिया गया। बिम्बसार ने अपने पुत्र अजातशत्रु को वहाँ का गवर्नर नियुक्त कर दिया। उस विजय से मगध की शक्ति तथा समृद्धि में बहुत वृद्धि हुई। अंग बहुत समृद्धशाली नगर था तथा दूरस्थ देशों तक उसका व्यापार था।
अजातशत्रु - अजातशत्रु का अर्थ होता है कि जिसका कोई शत्रु उत्पन्न नहीं हुआ हो। अजातशत्रु का प्रारंभिक नाम कुणिक था। प्रारंभ में इसे अंग की राजधानी चम्पा में शासक नियुक्त किया गया था। अनुश्रुति ने अनुसार, उसने बुद्ध के चचेरे भाई देवदत्त के कहने पर अपने पिता के विरुद्ध विद्रोह किया था। उसने अपने पिता को कैद कर लिया, वहीं बिम्बसार की मृत्यु हो गई। उसे पितृहन्ता भी माना जाता है।
वज्जिसंघ के लिच्छवी :- वज्जिसंघ को जीतने के लिए उसने कूटनीति का सहारा लिया। उसके मंत्री वस्सकार ने लिच्छवियों में फूट पैदा की | इसके साथ ही अजातशत्रु ने.राजगृह की किलेबन्दी की। अजातशत्रु ने रशमूसल और महाशिलाकंटक नामक भयंकर युद्ध-यंत्रों को था। वज्जिसंघ को जीतकर मगध साम्राज्य में मिला लिया
अजातशत्रु के राज्य में काशी, अंग तथा वैशाली राज्य सम्मिलित होने से इसका साम्राज्य बढ़ गया। मल्लों की पराजय से इसमें देवरिया के आस पास का क्षेत्र भी सम्मिलित हो गया। कौशल राज्य इसका मित्र हो गया। इस तरह मगध के राज्य ने एक विशाल राज्य का रूप लेना आरम्भ कर दिया।
अजातशत्रु का धर्म - अजातशत्रु बौद्ध धर्म का अनुयाई था था उसने बुद्ध के निर्वाण के बाद प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन करवाया था। पहले उसका शासन काल 491 ई.पू. से 459 ई.पू. तक था। अन्त में वह अपने पुत्र के हाथों मारा गया।
उदायिन - अजातशत्रु की मृत्यु के बाद संभवतः दर्शक गद्दी पर बैठा था। ई.पू. 445 में उदायिन (उदायी) मगध के सिंहासन पर बैठा। उसने अपनी राजधानी राजगृह से बदलकर पाटिलपुत्र को बनाया। उदायी ने अवंती को जीतकर मगध साम्राज्य का विस्तार किया। यह हर्यक वंश का अन्तिम प्रसिद्ध शासक था। उदायी के बाद इस वंश का पतन प्रारंभ हो गया।
नन्दीवर्द्धन 412 ई.पू. में गद्दी पर बैठा। इसके बाद उसका पुत्र को
महानन्दी गन्दी पर बैठा और यह हर्यकवंश का अंतिम शासक माना गया है।
शिशुनाग वंश (407 ई.पू. से 377 ई.पू. तक)
नन्दवंश (375 ई.पू. से 322 ई.पू. तक)
शिशुनाग वंश के अंतिम शासक कालाशोक की महापद्यनन्द ने हत्या करके नन्द वंश की स्थापना की। नन्द वंश में नौ राजा हुए जिनको नवनन्द कहते हैं। इनके नाम इस प्रकार बताये हैं- (1) उग्रसेन, (2) पन्डुक, (3) पण्डुगति, (4) भूतपाल, (5) रामपाल, (6) गोविषाणक, (7) दशसिद्धक, (8) कैवर्त और (9) धन। इनमें से प्रथम उग्रसेन को ही महापद्यनन्द के नाम से जाना जाता है।
महापद्यनन्द ने मगध अपनी विशाल सेना के माध्यम से मगध का विस्तार किया। |उसने भारत के 10 राज्यों इक्ष्वाकु, पांचाल, कुरु,हैहयआदि को मगध के राज्य में मिलाया था।
साम्राज्य विस्तार - पुराणों के अनुसार उसने वे इस प्रकार हैं(i) - कौशल नाम से जाना जाता था। अयोध्या जो अब तक स्वतन्त्र था। इसे नन्द
महापद्यनन्द के उत्तराधिकारी :- महापद्यनन्द के बाद उसके आठ बेटों ने शासन किया। उसके अन्तिम उत्तराधिकारी धननन्द था जो संभवतः सिकन्दर के आक्रमण के समय मगध का शासक था।
नन्दवंश के पतन के कारण
स्त्रोत :-