पहलवान की ढोलक
कक्षा- बारहवीं�विषय- हिन्दी�पाठ संख्या-14
फणीश्वर नाथ रेणु
लेखक परिचय
नाम- फणीश्वर नाथ रेणु�
जन्म- 4 मार्च 1921
स्थान- औराही हिंगना (जिला-पूर्णिया अब अररिया) बिहार में हुआ।
मृत्यु- 11 अप्रैल 1977 पटना �
रचनाएँ
क्र.सं | विधा | विवरण |
1 | उपन्यास | मैला आँचल, परती परिकथा, कितने चौराहे, दीर्घतपा |
2. | कथा संग्रह | अग्नि खोर, ठुमरी, आदिम रात्रि की महक, एक श्रावणी, दोपहरी की धूप |
3. | संस्मरण | वन, तुलसी की गंध, ऋणजल धनजल, श्रुत-अश्रुत पूर्व |
4. | रिपोर्ताज | नेपाली क्रांति कथा |
5. | रेणु रचनावली | पाँच खंडो में समग्र |
साहित्यिक विशेषताएँ
1 | आंचलिक उपन्यासकार |
2 | प्रतिष्ठित कलाकार |
3 | राजनीतिक एवं सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी |
4 | आँचलिक समस्याओं को उजागर करना। |
5 | भाषा की सार्थकता |
लुट्टन पहलवान
पाठगत सार
फणीश्वरनाथ रेणु की इस कहानी में लेखक ने लोक-कला तथा इसके कलाकार को उभारा है। यह कहानी महामारी का मार्मिक अंकन करने के साथ-साथ व्यवस्था बदलने पर लोक कलाओं तथा कलाकारों की अप्रासंगिकता को प्रस्तुत करती है। कहानी का नायक लुट्टन पहलवानी के दाँव-पेंच सीखते-सीखते राजकीय पहलवान बन गया। वह 15 साल तक अजेय रहा।
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महामारी का दृश्य
महामारी की चपेट में पहलवान के दोनों बेटो का आना
शिक्षण बिन्दु-शीर्षक की सार्थकता
लुट्टन् पहलवान का परिचय
लुट्टन् का राजकीय पहलवान बनना।
लुट्टन् की ख्याति सर्वत्र फैलना
लुट्टन् पहलवान के दो पुत्रों का होना
पत्नी का जल्दी चल बसना
अपने बेटों को भी पहलवानी सिखाना।
राजा साहब का स्वर्ग सिधारना।
राजा साहब के बेटे का शासक बनना।
लुट्टन् पहलवान की किस्मत पलटना।
विलायत में पढ़े राजकुमार द्वारा तीनों पहलवानों को निकलवा देना।
लुट्टन् का बेटों के साथ गाँव आना।
गाँव में व्यायाम शाला खोलना।
धीरे-धीरे व्यायाम शाला का बन्द हो जाना।
गाँव में अचानक महामारी फैलना
चेचक ने गाँव को श्मशान बना दिया
रात में भी पहलवान द्वारा ढोलक बजाना।
एक दिन महामारी की चपेट में बेट़ों का आना
कुछ समय बाद पहलवान का भी चल बसना।
शीर्षकगत सार्थकता
प्रस्तुत पाठ का मूल नायक लुट्टन पहलवान
पहलवानी के दाँव पेच, सीखते-सीखते पहलवान बन गया एवं जीवन में लोक कला के रूप मे ढ़ोलक को अपना हुनर दिखला उसे अपने जीवन में प्रेरणा का आधार माना तथा उत्साही जीवन का केन्द्र माना।
पाठगत उद्देश्य
कथा का मूल पात्र
चाँदसिंह एक परिचय
शेर के बच्चे का असल नाम चाँदसिंह होना।
श्यामनगर मेले में पंजाब से आना।
चाँदसिंह द्वारा अपनी जोड़ी और उम्र के पंजाबी, पठान, सभी पहलवानों को पछाड़ कर शेर के बच्चे की उपाधि पाना।
अपनी उपाधि को सिद्ध करने के लिए चाँद सिंह बीच-बीच में दहाड़ता फिरता था।
महामारी का वर्णन
पाठ के साथ
प्र॰1 कुश्ती के समय ढोल की आवाज और लुट्टन के दाँव-पेंच में क्या तालमेल था? पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्द और ढोल की आवाज़ आपके मन में कैसी ध्वनि पैदा करते हैं, उन्हें शब्द दीजिए।
आशय स्पष्ट करें
प्र॰1 आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिलाकर हँस पड़ते थे।
पाठ के आस-पास
प्र॰1 पाठ में मलेरिया और हैजे से पीड़ित गाँव की दयनीय स्थिति को चित्रित किया गया है। आप ऐसी किसी अन्य आपदा स्थिति की कल्पना करें और लिखें कि आप ऐसी स्थिति का सामना कैसे करेंगे?