JEEVAK AYURVED MEDICAL COLLEGE HOSPITAL AND RESEARCH CENTRE KAMALAPUR AKAUNI�CHANDAULI, UP
Subject – Rachana sharir
Topic- Kala sharir with special reference to Rakt Dhara Kala
Guided by –
Dr. Amit Kumar Singh (H.O.D)
Associate professor
Dr. Varsha Gupta
Assistant professor
Department of rachna sharir
Presented by –
Gagan Anand
Roll no – 12
BAMS 1st prof
Batch-2023-2024
INDEX
कला शारीर
कला की निरुक्ति
धात्वाशयांतरस्थस्तु यःक्लेदस्त्वधितिष्ठति।
देहोष्मणा विपक्वश्च सा कलेत्यभिधीयते ।।
(शा०प्र० 5/9).
परिभाषा
सुश्रत के अनुसार
“कला खल्वपि सप्त समंवन्ति धात्वाशयान्तर मर्यादाः”
(सु०शा04/4)
स्वरूप
स्नायुभिश्च प्रतिच्छन्नान् सन्ततांश्च जरायुणा।
श्लेष्मणा वेष्टितांश्चापि कलाभागांस्तु तान् विदु:।।
(सु०शा० 4/6)
यथा हि सारः काष्ठेषु छिद्यमानेषु दृश्यते।
तथा धातुर्हि मांसेषु छिद्यमानेषु दृश्यते ।।
(सु०शा० 5/5)
अष्टांग संग्रह के अनुसार
यस्तु धात्वाशयान्तरेषु क्लेदोऽवतिष्ठते ।यथास्वमूष्मभिर्विपक्वः स्नायुश्लेष्म जरायुच्छन्न काष्ठः इव सारो धातु सारः रसशेषोऽल्पत्वात् कला संज्ञः।।
(अ.स.शा. 5/32)
गणनाथ सेन प्रत्यक्ष शारीर के अनुसार
सूक्ष्म कौषैयवासः समाकारा नान विधा संस्थाना मासंस्यास्थन आशयानाच्च सर्वेषामन्तर्वहिरावृत्य तिष्ठन्ति, यथादेश कर्म संज्ञाच्च लभन्ते।
कला के प्रकार
“कला खल्वपि सप्त भवन्ति”
सुश्रत ने सात प्रकार की कलाओं का वर्णन किया है।
कला संख्या- 1. मांसधरा, 2. रक्तधरा, 3. मेदोधरा, 4. श्लेष्मधरा, 5. पुरीषधरा, 6. पित्तधरा, 7. शुक्रधरा।
रक्त धरा कला
वृक्षाद्धथाभिप्रहतात क्षीरणी: क्षीरमावहेत ।
मांसादेवं क्षतात् क्षिप्रम शोणितं संप्रसिच्यते॥
(सु. शा. 4/10)
श्री रंजीत राय जी देसाई के अनुसार
परिषद्य श. शारीरं-
डा. भा. गो. घणेकर�
IN MODERN MEDICAL TERMS, "RAKTADHARA KALA"
KEY POINTS ABOUT RAKTADHARA KALA IN MODERN PERSPECTIVE
CLINICAL SIGNIFICANCE OF RAKTDHARA KALA
Ayurvedic treatment approach:
Modern medicine correlation:
RESEARCH ARTICLE ON RAKTDHARA KALA
REFERENCE