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हिंदी पाठ परियोजना �कक्षा 12th �उपविषय - छोटा मेरा खेत (कविता)

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Umashankar joshi

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प्रस्तोता - के. एल मीणा

पी.जी.टी हिंदी

  • जवाहर नवोदय विद्यालय -अटरू,जिला -बारां, (राजस्थान)

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शिक्षण उद्देश्य - कविता का रसास्वादन करना।� रस अलंकार आदि से अवगत करना।� कठिन शब्दावली को सरलार्थ रूप में समझना।� भाषा के अंदर सक्रिय सत्ता सम्बन्ध की समझ पैदा करना।� वाचन कौशल का विकास करना।� शब्द भंडार में अभिवृद्वि करना।�

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  • उद्देश्य कथन -हम किसान के कृषि कर्म के साथ साथ कवि कर्म के बारे में और किस प्रकार से कवि कल्पना के माध्यम से अपने विचारो को कविता के रूप में अभिव्यक्त करता है।

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  • कवि परिचय - उमाशंकर जोशी बीसवीं सदी के गुजराती काव्य के प्रमुख कवि एवं निबंधकार माने जाते हैं ,इनका जन्म सन 1911 ई० में गुजरात में हुआ था और 1988 में इनका निधन हो गया जोशी जी बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न साहित्यकार माने जाते हैं।
  • इन्होंने कविता निबंध कहानी आदि विधाओं पर सफल लेखिनी चलाई उमाशंकर जोशी प्रतिभावान कवि और साहित्यकार थे। 1931 में प्रकाशित काव्य संकलन 'विश्वशांती' से उनकी ख्याति एक समर्थ कवि के रूप में हो गई थी। काव्य के अतिरिक्त उन्होंने साहित्य के अन्य अंगों, यथा कहानी, नाटक, उपन्यास, आलोचना, निबंध आदि को भी पोषित किया। आधुनिक और गांधी युग के साहित्यकारों में उनका शीर्ष स्थान है।

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प्रमुख रचनाएँ: विश्व शांति गंगोत्री निशीथ, प्राचीना आतिथ्य, वसंत वर्षा महाप्रस्थान अभिज्ञा (एकांकी), सापनाभारा शहीद (कहानी), श्रावणी मेणो, विसामो (उपन्यास); पारकांजण्या (निबंध); गोष्ठी, उघाडीबारी, क्लांतकवि, म्हारासॉनेट, स्वप्नप्रयाण (संपादन) सन् 47 से संस्कृति का संपादन।

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कविता -छोटा मेरा खेत

  • छोटा मेरा खेत चौकोना�कागज का एक पन्ना,�कोई अंधड़ कहीं से आया�क्षण का बीज वहां बो गया।
  • कल्पना के रसायनों को पी�बीज गल गया निःशेष,�शब्द के अंकुर फूटे,�पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।
  • झूमने लगे फल,
  • रस अलौकिक,�अमृत धाराएं फूटतीं�रोपाई क्षण की,�कटाई अनंतता की�लुटते रहने से जरा भी नहीं कम होती।
  • रस का अक्षय पात्र सदा का�छोटा मेरा खेत चौकोना।

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संदर्भ :�प्रस्तुत कविता ‘छोटा मेरा खेत’ आरोह पाठ्यपुस्तक से अवतरित की गयी है। इसके कवि उमाशंकर जोशी हैं।

  • प्रसंग :
  • यहां पर कवि ने अपने रचनाकर्म की तुलना खेती से की है। और किसान तथा कवि के काम को समान बताया है।

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  • शब्दार्थ :
  • अंधड़ = आंधी।
  • क्षण = समय की एक माप।
  • निःशेष = बाकी न बचना।�पल्लव-पुष्पों = पत्तों और फूलों।
  • नमित = झुक जाना।
  • अलौकिक = संसार से परे।�अनंतता = जिसका अंत ही न हो।
  • अक्षय पात्र = कभी समाप्त न होने वाला बर्तन।

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व्याख्या

  • यहां पर कवि कहते हैं कि मेरा यह लिखने के लिये उपयोग किया जाने वाला चौकोर पृष्ठ असल में मेरा खेत ही है। अचानक कहीं से विचारों की एक आंधी आयी। उसने इस खेत में क्षण का यानी समय का बीज बो दिया। इस तरह मैं इसमें अपने विचारों की खेती किया करता हूं।
  • इस बीज ने कल्पना रूपी रसायनों को ग्रहण किया और पूरी तरह से घुल गया। उसने अपना अस्तित्व ही खो दिया। फिर उसमें से शब्द रूपी अंकुर उत्पन्न हुए। विवरणों के पत्ते और फूल आये। उनके आने पर शाखाएं कुछ ज्यादा ही झुक गयीं। उनमें विनय का भाव आ गया।

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  • इस पौधें में फिर फल आये। यानी रचना का परिपूर्ण रूप बना। उनमें अलौकिक रस अर्थात आनंद भर गया। ऐसा आनंद-रस जो संसार में उपलब्ध रसों से बिल्कुल ही अलग ही था। उस रस की अमृत जैसी धाराएं फूटने लगीं। समाज को भी आनंद प्राप्त होने लगा। अब यह फल रूपी रचना सदैव अमर रहेगी। और लोगों को तृप्त करती रहेगी। जिसे क्षण भर में रोपा था, उससे अनंतकाल तक के लिये रस मिलने लगा। यह रस कितना भी लुटाया जाये, पर वह कभी कम नहीं होता।
  • तो यह जो मेरा लिखने का कागज है। यही मेरा छोटा सा खेत है। अब यह रस का कभी समाप्त न होने वाला अक्षय- पात्र ही बन गया है।

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पद लालित्य :

  • 1 ‘छोटा मेरा खेत चौकोना�कागज का एक पन्ना’- उपमा अलंकार।�2 ‘क्षण का बीज वहां बो गया’, ‘कल्पना के रसायनों को पी’, ‘शब्द के अंकुर फूटे’,- रूपक अलंकार।�3 ‘पल्लव-पुश्पों से नमित हुआ विशेष’ – अनुप्रास अलंकार।
  • 4 ‘झूमने लगे फल’, ‘क्षण का बीज वहां बो गया’, ‘कल्पना के रसायनों को पी’, ‘झूमने लगे फल’- मानवीकरण अलंकार।

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कविता का केंद्रीय भाव

  • इस कविता में कवि ने खेती के रूप में कवि-कर्म के हर चरण को बाँधने की कोशिश की है। कवि को कागज का पन्ना एक चौकोर खेत की तरह लगता है। इस खेत में किसी अंधड़ अर्थात भावनात्मक आँधी के प्रभाव से किसी क्षण एक बीज बोया जाता है। यह बीज रचना, विचार और अभिव्यक्ति का हो सकता है।

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  • प्रश्न अभ्यास
  • प्रश्न 1 छोटा मेरा खेत कविता का रूपक स्पष्ट कीजिए ?
  • प्रश्न 2 छोटा मेरा खेत कविता में कवि ने खेत को रस का अक्षयपात्र क्यों कहा ?