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संक्षेपण�

डॉ. ज्योति गोगिया

हिंदी विभागाध्यक्षा

हंस राज महिला महाविद्यालय, जालंधर

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  • किसी कथन अथवा रचना को इतना संक्षिप्त करके लिखना कि उसमे उसका मूल भाव सुरक्षित रहे, संक्षेपण कहलाता है।

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  • आज के युग में संक्षेपण का महत्त्व और उपयोगिता बहुत बढ़ गई है। आज व्यक्ति प्रत्येक कार्य शार्ट कट में करना चाहता है। इसीलिए संक्षेपण का महत्त्व बढ़ गया है।

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  • उत्कृष्ट संक्षेपण हमारे श्रम और समय की रक्षा करता है।

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  • मूल संदर्भों में बिखरे तथ्यों में से आवश्यक और काम की बातों को अलग करता है।

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  • कम से कम शब्दों में अधिकाधिक विचारों को प्रकट करता है।

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  • हमारी भेदक दृष्टि को विकसित करता है। हमारे ध्यान लगाने की क्षमता उत्पन्न करता है और हमारी अभिव्यक्ति को यथार्थ बनाता है।

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  • हमारी सृजनात्मक शक्ति को विकसित करता है तथा तार्किक दृष्टिकोण अपनाने में सहायक होता है।

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संक्षेपण - परिभाषांकन�

  • संक्षेपण शब्द पर विभिन्न विद्वानों ने गम्भीरतापूर्वख विचार करके उसे परिभाषित करने का प्रयास किया है।

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  • प्रो. नलिन विलोचन और प्रो. केसरी अनुसार, संक्षेपीकरण को हम किसी बड़े ग्रंथ का संक्षिप्त संस्करणष बड़ी मूर्ति का लघु अंकन और बड़े चित्र का छोटा चित्रण कह सकते हैं।’

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  • जे.बी. बर्नार्ड के अनुसार, ‘संक्षेपण किसी लिखत सामग्री के आधारभूत तथ्यों का सुनियोजित अध्ययन है।’

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संक्षेपण तथा अन्य रचना रूप�

  • संक्षेपण के साथ-साथ अन्य रचना रूपों यथा सारांश, आशय, भावार्थ, मुख्यार्थ आदि का भी हिन्दी में आगमन हुआ है।

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संक्षेपण और सारांश

  • संक्षेपण और सारांश में महत्त्वपूर्ण अंतर है।

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  • इनमें मुख्य अंतर यह है कि जहां संक्षेपण द्वारा मूल रचना का कोई एक तिहाई संक्षिप्त रूप प्रस्तुत किया जाता है, वहां सारांश में परिमाण और भी कम हो जाता है।

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संक्षेपण और आशय�

  • आशय का लक्ष्य किसी अनुच्छेद में आए मुख्य, गूढ़ अथवा दुर्बोध वाक्यों आदि का सोदाहरण स्पष्टीकरण किया जाता है।

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  • यह स्पष्टीकरण उसे भाव ग्रह्य बनाने हेतु किया जाता है जबकि संक्षेपण में इस तरह के स्पष्टीकरण की कोई गुंजाइश नहीं होती।

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संक्षेपण के रूप

  • अध्ययन की दृष्टि तथा सुविधा के लिए संक्षेपण को तीन भागों में बांटा जा सकता है।

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अपठित गद्य का संक्षेपण करना

  • अपठित गद्य से तात्पर्य उस गद्य से है जिसका अध्ययन पूर्व में नहीं किया होता।

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विशेष लेख, भाषा या किसी अवतरण का संक्षेपण�

  • इस तरह के संक्षेपण में विद्यार्थियों को अध्ययन किए गए विशेष लेख अथवा अवतरण आदि पर संक्षेपण लिखने को कहा जाता है।

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पत्रों का संक्षेपण

  • व्यापारादि व्यवसायों में विभिन्न प्रकार के पत्रों का आदान-प्रदान होता रहता है।

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  • डॉ. राजनाथ भट्ट संक्षेपण के चार प्रकार बताते हैं -

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  • स्वतंत्र संक्षेपण
  • प्रवाहमान संक्षेपण
  • तालिका संक्षेपण
  • स्वत: पूर्ण संक्षेपण

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स्वतंत्र संक्षेपण�

  • यह संक्षेपण का सामान्य प्रकार है जिसमें प्राय: किसी अनुच्छेद अथवा लेखादि का संक्षेपण करवाया जाता है।

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प्रवाहमान संक्षेपण

  • किसी कार्यालय में किसी विवादास्पद और विचारार्थ पत्र-व्यवहार के उपलक्ष्य में ऐसे संक्षेपण की आवश्यकता होती है।

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स्वत: पूर्ण संक्षेपण

  • विभागों में मंत्रिपरिषद् के सामने चर्चा एवं निर्णयार्थ जो मामले प्रस्तुत किए जाते हैं, उनमें प्रत्येक के साथ स्वत: पूर्ण संक्षेपण प्रस्तुत किया जाता है।

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संक्षेपण के आवश्यक तत्त्व

  • संक्षेपण एक कला है। कुशल संक्षेपक एक कलाकार की भांति अत्यंत कुशलता से संक्षेपण तैयार करता है।

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संक्षिप्तता

  • यह संक्षेपण का अनिवार्यतम तत्त्व है। संक्षेपण समय की बचत की दृष्टि से संक्षिप्त होना चाहिए।

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स्पष्टिता�

  • स्पष्टता से अभिप्राय संक्षेपण में लिखे जाने वाले महत्त्वपूण तथ्यों के स्पष्ट वर्णन से है।

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सरलता तथा ग्रह्यता

  • संक्षेपण की भाषा-शैली इतनी सरल और सुबोध होनी चाहिए कि सामान्य पाठक भी उसे सहज ही समझ जाए।

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पूर्णता

  • संक्षेपण तभी सम्पूर्ण समझा जाएगा जब उसमें मूल अवतरण में प्रकट किए गए सभी विचारों व तथ्यों का समावेश हो जाए।

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क्रमबद्धता

  • संक्षेपण में सभी विचारों, तथ्यों का वर्णन क्रमबद्ध रूप में होना चाहिए।