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BLESSINGS

ॐ ह्रीं अर्हम् नमः

श्रीसद्गुरुभ्यो नमः

ॐ ऐं नमः

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SHREE MATI GYANAY NAMAH

SHREE SHRUT GYANAY NAMAH

SHREE AVADHI GYANAY NAMAH

SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH

SHREE KEVAL GYANAY NAMAH

5 GYAN

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Inspired by:

Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekhar Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.

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Mahaveer Swami Bhav – 27 / Slide 75 - 84

Learn & turn part – 2 story NO 8

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Picture No. 1

१) नव लोकांतिक देवो का आगमन हुआ और उन्होने संयम ग्रहण करने की प्रभु को विनंति की।

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Picture No. 2

२) युवराज वर्धमान ने वर्षीदान शुरू किया, हररोज १ करोड ८ लाख सोनैया का दान देते थे।

हर सौना महोर के उपर के माता-पिता का नाम लिखा था।

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Picture No. 3

३) कारतक वद १० के दिन, दीक्षा का भव्य वरघोडा (शोभायात्रा) क्षत्रियकुंड नगर से नीकला,

सभी इन्द्र, अनगिनत देव-देवीया, पूरा नगर उसमें उपस्थित था।

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Picture no. 4

४) क्षत्रियकुंड नगर के बाहर अशोकवन में प्रभुजी ने संयम ग्रहण किया।

प्रभुजी ने पंचमुष्टि लोच किया, इन्द्र ने देवदुष्य प्रभु के स्कंध पर अर्पण किया।

प्रभुजीने सर्वविरति सामायिक का पच्चक्खाण किया, उसी समय प्रभुजी को मनः पर्यव चौथा ज्ञान प्राप्त हुआ। प्रभुजीने वहा से विहार किया।

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Picture No. 5

५) प्रथम विहार के समय सुगंधित लेप और सुंदर रूप से महिलाऐ आकर्षित हुई,

भमरगण भी भगवान को काटने लगा। प्रभुने सब कुछ सहन किया।

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Picture No. 6

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६) प्रभुजीने प्रथम पारणा गृहस्थ के पात्र में किया।

प्रथम चातुर्मास आश्रम में किया और पूर्णसमय काउसग्ग ध्यान में रहे।

ज्यादा करके चौविहार उपवास करते थे और मौन रखते थे।

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Picture No. 7

७) सोम नामक गरीब ब्राह्मण को कुछ मीला नहीं था,

इसलिए प्रभुजी से मांगणी की, तब उसे अर्ध देवदूष्य का दान किया।

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Picture No. 8

८) अपने बेल न मीलने पर गोपालक ने प्रभुजी पर उपसर्ग किया,

रस्सी से मारने का प्रयास किया, उसी समय इन्द्र का आगमन हुआ, इन्द्रने गोपालक को रोका।

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Picture No. 9

९) इन्द्रने प्रभुजी से विनंति की कि मुजे आपकी सेवा का मौका दो।

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Picture No. 10

१०) प्रभुजी की ना पर इन्द्रने सिद्धार्थ नामक देव को प्रभुजी की सेवा में रखा।

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