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 कक्षा              सात

किताब का नाम    बाल महाभारत कथा

पाठ का नाम- युधिष्ठिर की चिंता और कामना

प्रस्तुतकर्ता - हीरालाल टी.जी.टी.,हिंदी

  (जवाहर नवोदय विद्यालय रायबरेली, उत्तर प्रदेश)

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  • दुर्योधन को अर्जुन का पीछा करते देखकर पांडव-सेना ने शत्रुओं पर और भी ज़ोर का हमला कर दिया।
  • धृष्टद्युम्म ने सोचा कि जयद्रथ की रक्षा करने हेतु यदि द्रोण भी चले गए, तो अनर्थ हो जाएगा। इस कारण द्रोणाचार्य को रोके रखने के इरादे से उसने द्रोण पर लगातार आक्रमण जारी रखा।
  • धुष्टद्युम्न की इस चाल के कारण कौरव-सेना तीन हिस्सों में बँटकर कमज़ोर पड़ गई।
  • इतने में धृष्टद्युम्म उछलकर द्रोणाचार्य के रथ पर जा चढ़ा और विक्षिप्त-सा होकर द्रोण पर वार करने लगा।

 

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  • द्रोण ने क्रोध में आकर एक अत्यधिक पैना बाण चलाया। वह पांचाल कुमार के प्राण ही ले लेता, यदि सात्यकि का बाण उसे बीच में ही पुन: काट देता।
  • सात्यकि भी कोई मामूली वीर नहीं था। पांडव-सेना के सबसे चतुर योद्धाओं में उसका स्थान था। जब उसने द्रोणाचार्य को अपनी ओर झपटते देखा, तो वह खुद भी उनकी ओर झपटा। इस तरह बहुत देर तक दोनों वीर लड़ते रहे।
  • युधिष्ठिर ने द्रोण पर हमला करने के लिए धृष्टद्युम्म के साथ एक बड़ी सेना भेज दी। समय पर कुमुक के पहुँच जाने पर भी बड़े परिश्रम के बाद ही सात्यकि को द्रोण के फँदे से छुड़ाया जा सका।

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  • इसी समय श्रीकृष्ण के पांचजन्य की ध्वनि सुनाई दी। वह आवासुनकर युधिष्ठिर चिंतित हो गए।
  • इस घड़ी अर्जुन की सहायता को चले जाओ”, इतना कहते-कहते युधिष्ठिर बहुत हीअधीर हो उठे।
  • युधिष्ठिर के इस प्रकार आग्रह करने पर सात्यकि ने बड़ी नम्नता से कहा-“युधिष्ठिर! द्रोण की प्रतिज्ञा तो आप जानते ही हैं। अतः आपकी रक्षा का भार हमारे ऊपर है।महाराज, वासुदेव और अर्जुन मुझे यह आदेश दे गए हैं और मुझ पर भरोसा करके यह भारी ज़िम्मेदारी डाल गए हैं। मैं उनकी बात को कैसे टालूँ? आप अर्जुन की ज़रा भी चिता करें।अर्जुन को कोई नहीं जीत सकता।
  • उधर जैसे ही सात्यकि युधिष्ठिर को छोड़करअर्जुन की ओर चला, वैसे ही द्रोणाचार्य ने पांडब-सेना पर हमले करने शुरू कर दिए।

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  • युधिष्ठिर ने भीमसेन को अर्जुन की रक्षा के लिए भेजा।भीमसेन,युधिष्ठिर की रक्षा की जिम्मेदारी धृष्टद्युम्म को देकर अर्जुन की सहायता के लिए चल दिया।
  • भीमसेन के सिंहनादों को सुनकर युधिष्ठिर बहुत ही प्रसन्‍न हुए। उनके मन से शोक के बादल हट गए। उन्होंने अर्जुन को मन-ही-मन आशीर्वाद दिया। वह सोचनेलगे-अभी सूरज डूबने से पहले अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर लेगा और जयद्रथ का वध करके लौट आएगा।
  • हो सकता है, जयद्रथ केवध के बाद दुर्योधन शायद संधि कर ले। इधर युधिष्ठिर मन-ही-मन शांति स्थापना की कामना कर रहे थे और उधर मोर्चे पर जहाँ भीम, सात्यकि और अर्जुन थे, वहाँ घोर संग्राम होरहा था।

 

 

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  • आज के दिन भीम और कर्ण का जो युद्ध हुआ वह बहुत ही रोमांचकारी था
  • भीमसेन उत्तेजनाऔर उग्रता की प्रतिमूर्ति-सा दिखाई दे रहा था।भीमसेन को उस समय पिछले घोर अपमानों, यातनाओं और मुसीबतों की याद हो आई, जो उसे, उसकेभाइयों और द्रौपदी को पहुँचाई गई थीं। प्राणोंका मोह छोड़कर वह लड़ने लगा।

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  • उस समय भीमसेन का घावों से भरा हुआ शरीर धधकती हुई आग-सा प्रतीत हो रहा था।कर्ण और भीम के युद्ध में इस बार भीमसेन के रथ के घोड़े मारे गए। सारथी भी कटकर गिर पड़ा। रथ टूट-फूट गया और धनुष भी कट गया। भीम ने ढाल-तलवार ले ली और जान झोंककर लड़ने लगा।
  • पलक झपकते ही कर्ण ने उसकी ढाल के भी टुकड़े-टुकड़े कर दिए।जब ढाल भी रही तो कर्ण ने भीम को खूब परेशान किया। इससे भीम बहुत ही पीड़ित हुआ। उसे असीम क्रोध आया। वह उछलकर कर्ण के रथ पर जा कूदा। कर्ण ने रथ के ध्वज-स्तंभ की आड्‌ लेकर भीमसेन की झपट से अपने को बचा लिया।

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  • भीम नीचे ज़मीन परकूद पड़ा और विलक्षण युद्ध करने लगा। मैदानमें जो रथ के पहिए, घोड़े, हाथी आदि पड़े हुएथे, उन्हीं को उठा-उठाकर वह कर्ण पर फेंकता गया, जिससे उसे क्षणभर भी आराम मिल पाया।
  • उस समय कर्ण चाहता, तो वह भीम कोआसानी से मार सकता था, पर निहत्थे भीम को उसने मारना नहीं चाहा। माता कुंती को दिया हुआ वचन भी उसे याद था कि वह अर्जुन केअतिरिक्त और किसी को मारेगा।

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गृह कार्य

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखो-

  1. कौरव सेना तीन हिस्सों में कैसे बँट गई ?
  2. सात्यकि को द्रोण के फंदे से कैसे छुड़ाया जा सका?
  3. युधिष्ठिर बहुत अधीर क्यों हो गए?
  4. सात्यकि ने बड़ी नम्रता से युधिष्ठिर को क्या समझाया?
  5. भीम और कर्ण के युद्ध का वर्णन अपने शब्दों में करो

धन्यवाद