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सूरदास (जीवन –परिचय)

  • जन्म -1478 ई.
  • गुरु-बल्लभाचार्यजी
  • भक्तिकाल –सगुण भक्तिधारा कृष्णाश्रयी-प्रमुख रचना –सूरसागर
  • जन्मांध (विवाद)
  • अष्टछाप के प्रतिभाशाली कवि
  • मृत्यु- 1583 ई.

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सूरदास के पद

श्रीकृष्ण का माता यशोदा से प्रश्न करना।

चोटी बड़ी होगी इस लालच में दूध पीना।

दूध पीने के बाद भीश्रीकृष्ण की चोटी का न बढ़ना ।

बड़े भाई बलराम की तरह चोटी का लंबी और मोटी न होना

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सूरदास के पद

मनपसंद आहार माखन रोटी का न मिलना।

श्रीकृष्ण के बाल- रूप का सजीव वर्णन ।

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सूरदास के पद( द्वितीय पद)�

  • गोपियों द्वारा माता यशोदासे श्रीकृष्ण की शिकायत करना
  • घर खाली देखकर श्रीकृष्ण का गोपियों के घर में घुसना।
  • सभी सखाओं को दूध दही खिलाना।
  • ओखली पर चढ़कर दूध दही के पात्र को प्राप्त करना।
  • जो ना पसंद हो उसे ज़मीनपर बिखेर देना।

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सूर के पद(द्वितीय)

  • प्रतिदिन गोपियों के घर में घुसकर श्रीकृष्ण द्वारा दूध- दही का नुकसान करना।
  • श्रीकृष्ण को माता यशोदा द्वारा न मना करना।
  • गोपियों द्वारा श्रीकृष्ण को अनोखा एवं विचित्र बालक बताना।