1 of 18

BLESSINGS

ॐ ह्रीं अर्हम् नमः

श्रीसद्गुरुभ्यो नमः

ॐ ऐं नमः

2 of 18

SHREE MATI GYANAY NAMAH

SHREE SHRUT GYANAY NAMAH

SHREE AVADHI GYANAY NAMAH

SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH

SHREE KEVAL GYANAY NAMAH

5 GYAN

3 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

Inspired by:

Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekar Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.

4 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

प्रस्तावना

प्रश्न होता है कि एक पूरी माला में १०८ मनके कर्यों होते है?

इस प्रश्न के उत्तर में आचार्यों ने है कि

पंच परमेष्ठी के १०८ गुण होते है।

जैसे,

अरिहंत भगवान के १२, सिद्ध भगवान के ८, आचार्य भगवंत के ३६, उपाध्याय महाराज के २५ तथा साधु महाराज के २७ गुण।

इसलिए एक पूरी माला में १०८ मनकों का विधान मंत्रशास्त्र में किया गया है।

5 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

अरिहंत भगवान के १२ गुण

अष्ट महाप्रातिहार्य, जैसे (A)

  1. अशोक वृक्ष: जहाँ अरिहंत भगवान के समवसरण की रचना होती है, वहाँ अरिहंत भगवान के सिंहासन के ऊपर उनके शरीर से १२ गुना उंचा अशोक वृक्ष की रचना होती है।
  2. पुष्पवृष्टि: समवसरण में देवगण सचित फूलों की वर्षा करते हैं।
  3. दिव्यध्वनी: समवसरण में जब भगवान मालकोश राग में देशना फरमाते हैं तब देवगण उनकी वाणी को दिव्यध्वनि से मधुर बना देते.
  4. चामर: अरिहंत भगवान के दोनों तरफ देवगण श्वेत मनोहर चंवर डुलाते हैं।

6 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

अष्ट महाप्रातिहार्य, जैसे (B)

५. सिंहासन: भगवान के बैठने के लिए देवगण रत्नजडित सुवर्ण सिंहासन की रचना करते हैं।

६. भामंडल: भगवान के मस्तक के पीछे सूर्य किरणों के समान तेजस्वी भामंडल रहता है।

७. दुंदुभि: समवसरण के आसपास देवगण आकाश में दुंदुभि बजाकर लोगों को सूचना देते हैं।

८. तीन छत्र: भगवान के मस्तक पर चन्द्र समान उज्ज्वल मोतियों की झालर वाले स्वर्णमय तीन छत्रों की रचना देवगण करते हैं। ये आठ प्रातिहार्य हर समय प्रभु के साथ ही रहते हैं।

7 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

१. ज्ञानातिशय: प्भु केवल ज्ञान द्वारा हाथ की रेखाओं की तरह सम्पूर्ण लोक को देखते हैं।

8 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

२. पूजातिशय: इन्द्र, देव, चक्रवर्ती, वासुदेव, बलदेव, मनुष्य आदि सभी प्रभु की पूजा करते हैं।

9 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

३. वचनातिशय: प्रभु की वाणी ३५ गुणों युक्त होती है।

देव, मनुष्य, तिर्यंच सब अपनी-अपनी भाषा में उसको समझते हैं।

यह वाणी एक योजन प्रमाण क्षेत्र तक एक समान सुनाई देती है।

10 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

४. अपायापगम अतिशय: भगवान जहाँ विचरते हैं उनके चारों तरफ २५-२५ योजन तक तथा साढ़े बारह योजन नीचे तथा उपर यों एक सो पच्चीस योजन तक स्वचक्र-परचक्र का भय, रोग, वैर, मारी, अतिवृष्टि, अनावृष्टि आदि नही होते।

11 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

सिद्ध भगवान के ८ गुण प्रकट होते हैं- आठ कर्मों का सम्पूर्ण क्षय हो जाने से

१. अनन्त ज्ञान,

२. अनन्त दर्शन,

३. अनन्त चारित्र (वीतरागता)। ये तीनों गुण ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय तथा मोहनीय कर्म के क्षय से प्रगट होते हैं। ४. अनन्त वीर्य (स्वाभाविक अनन्त आत्मशक्ति),

५. अब्याबाध अनन्त आत्मिक सुख (वेदनीय कर्म के क्षय से),

६. अक्षर अजर-अमर स्थिति (आयुष्य कर्म के क्षय से),

७. अरूपी अवस्था नाम कर्म क्षय होने से सिद्ध भगवान वर्ण, गंध, रस, स्पर्श, रूप रहित होते हैं।

८. अगुरू-लघुता- गोत्र कर्म के क्षय से हलका-भारीपन, ऊँचा-नीचापन रहित अवस्था।

12 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

आचार्यो के ३६ गुण - पाँच इन्द्रियों का संयम, नव गुप्ति से युक्त ब्रह्मचर्य का पालन व चार कषायों का नाश, पाँच आचार का शुद्ध पालन।

५ महाव्रतों का पालन, ५ समिति, ३ गुप्ति को धारण करना।

13 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

उपाध्याय के २५ गुण - ११ अंग तथा १४ पूर्वो का अध्ययन स्वयं करते हैं तथा दूसरों को करवाते हैं।

14 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

साधुजी के २७ गुण - ५ महाव्रत, छठा रात्रि भोजन त्याग, छह काया के जीवों की रक्षा, पाँच इन्द्रियों को जीतना, मन, वचन, काय के तीन योगों का संयम, क्षमाशीलता, लाभत्याग, भावों की निर्मलता, पडिलेहणा आदि में उपयोग रखना, संयम योग में युक्तता परीषह, उपसर्ग को सहन करना।

15 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

16 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

17 of 18

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 1

NAMASKAR MAHAMANTRA - NAVKAR

18 of 18