कक्षा 12�आरोह भाग 2
अध्याय 9
फ़िराक़ गोरखपुरी
मुकेश कुमार
परास्नातक शिक्षक (हिन्दी)
ज न वि, अजमेर
जीवन परिचय
फ़िराक़ गोरखपुरी
पाठ परिचय
कवि की भावभूमि�फ़िराक गोरखपुरी ने परंपरागत भावबोध और शब्द भंडार का उपयोग करते हुए उसे नई भाषा और नए विषयों से जोड़ा। फ़िराक की रुबाई में हिंदी का एक घरेलू रूप भी दिखाई देता है। इनमें सरल लोक-भाषा का प्रयोग हुआ है।
कविता की भाव भूमि
कठिन शब्दार्थ
दोहरान प्रश्न
प्रश्न 1. ‘ज़र्रा-ज़र्रा सोये है’ से कवि का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर –‘ज़र्रा-ज़र्रा सोये हैं’ से कवि का अभिप्राय है कि धरती का कण-कण इस समय नींद में चला गया है।
2. खुद का परदा खोलने से क्या आशय है?
उत्तर:- ‘खुद का परदा’ खोलने से कवि का
आशय है कि जो व्यक्ति उनकी बुराई करता है वह जाने-अनजाने संसार के सामने अपनी कमज़ोरी ही प्रकट करता है।
3. किस्मत हमको रो लेवे है हम किस्मत को रो ले हैं – इस पंक्ति में शायर की किस्मत के साथ तना-तनी का रिश्ता अभिव्यक्त हुआ है। चर्चा कीजिए।
सभी विद्यार्थी गजल का भावार्थ अ्पनी लेखन पुस्तिका में लिख कर लाएंगे.
गृह-कार्य
धन्यवाद