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प्रस्तुति

  • राजेन्द्र सिंह शेखावत
  • प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (हिंदी)
  • के.वि.भा.नौसेना पोत,वालसुरा जामनगर

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बच्चे काम पर जा रहे हैं

कवि - राजेश जोशी

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कवि-परिचय

  • हिन्दी साहित्य के आधुनिक रचनाकारों में राजेश जी अग्रगण्य हैं। ये पत्रकारिता, काव्य-लेखन, गद्यकार लेख व टिप्पणियाँ करने में सिद्धहस्त हैं। साथ ही लघु फिल्मों के लिए पटकथा लेखन में भी निपुण हैं।

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शब्द संपदा

  • हस्बमामूल - यथावत्, हमेशा की तरह

मदरसा - विद्यालय

कोहरा - धुंध

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शिक्षण बिंदु

  • बाल मजदूरी की विवशता पर चिंता
  • बच्चों के बालपन के साथ खिलवाड़
  • गरीबी के कारण बच्चों को खेल-सामग्री के स्थान पर कार्य में लगाया जाना।
  • सामाजिक, आर्थिक विडंबना का चित्रण।

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काव्य-सौंदर्य

भाषा प्रयोग

  • भाषा सरल, सरस एवं प्रवाहमयी। तत्सम, तद्भव, फारसी शब्दों की प्रधानता- मदरसा, हस्बमामूल, अंतरिक्ष, रंग-बिरंगी, देशज एवं ग्रामीण शब्दावली का प्रयोग।
  • अलंकार प्रयोगः-
    • पुनरुक्ति सुबह-सुबह ; छोटे-छोटे
    • प्रश्नालंकार तो फिर बचा ही क्या है ? इस दुनिया में
    • अनुप्रास क्या काले पहाड़ के नीचे..........

  • बिंब प्रयोगः-
    • दृश्य बिंब -समस्त कविता में।

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काव्य-साम्य

  • मत कहो….. कोहरा घना है - दुश्यंत कुमार
  • फिल्म - बूट पॉलिश

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पुनरावृत्ति

प्रश्न 1 - इस काव्यांश में कवि ने किस समय का उल्लेख किया है और क्यों?

प्रश्न 2 - अगर बच्चों के लिए सुख-सुविधाएँ नहीं हैं तो अन्य सुविधाओं का औचित्य किस प्रकार है?

प्रश्न 3- बच्चे काम पर जा रहे हैं, यह एक भयानक प्रश्न क्यों बनता है?

प्रश्न 4 - दिन-प्रतिदिन के जीवन में हर कोई बच्चों को काम पर जाते देख रहा/रही है, फिर भी किसी को कुछ अटपटा नहीं लगता। इस उदासीनता के क्या कारण हो सकते हैं?

प्रश्न 5- आपने अपने शहर के बच्चों को कब और कहाँ-कहाँ काम करते हुए देखा है तथा बच्चों का काम पर जाना धरती पर एक बड़े हादसे के समान क्यों है?