1 of 31

अमीर खुसरो

पवन कुमारी

असिस्टेंट प्रोफेसर

स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग

हंसराज महिला महाविद्यालय

जालंधर

2 of 31

3 of 31

  • अमीर खुसरो का जन्म सन् 1253 ई. में आधुनिक एटा जिला के पटियाली गांव में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में लगभग 99 ग्रंथों की रचना की जिनमें से अधिकांश फारसी भाषा में थे। यद्यपि हिंदी भाषा में अभी तक उनकी कोई भी प्रामाणिक रचना प्राप्त नहीं हुई है परन्तु यह निर्विवाद सत्य है कि वे खड़ी बोली के प्रथम कवि थे। 

4 of 31

  • उनकी हिंदी कविताओं को बारह भागों - पहेलियाँ, मुकरियाँ, निस्बतें, दोसुखने, ढकोसला, गीत, कव्वाली, फारसी - हिंदी मिश्रितछन्द व गजल, फुटकल छन्द और ‘खालिकबारी’ में बांट सकते हैं। ‘खालिकबारी’ उनकी बहुचर्चित रचना है।

5 of 31

अमीर खुसरो का जीवन परिचय�

  • अमीर खुसरो खड़ी बोली हिंदी के आदि कवि थे। अमीर खुसरो का जन्म 1255 ई. से 1324 ई. के बीच है। 2016 ई. में प्रदीप खुसरो द्वारा लिखित पुस्तक ‘अमीर खुसरो’ के अनुसार यह अवधि 1253 ई. से 1325 ई. तक है।

6 of 31

  • अमीर खुसरो के पिता का नाम अमीर सैफुद्दीन महमूद था। मीर सैफुद्दीन महमूद तुर्किस्तान में लाचीन कबीले के सरदार थे। अमीर सैफुद्दीन उत्तर प्रदेश के एटा जिले में गंगा किनारे पटियाली नामक गाँव में बस गए। सैफुद्दीन के तीसरे बेटे का नाम था- अबुल हसन यमीनुद्दीन मुहम्मद। यही अबुल हसन अमीर खुसरो नाम से प्रसिद्ध हुए

7 of 31

  • अमीर खुसरो का वास्तविक नाम अबुल हसन यमीनुद्दीन मुहम्मद था। अमीर खुसरो के पिता ने उनका नाम रखा। लेकिन उनका खुसरो मशहूर हुआ और वे अमीर खुसरो नाम से ही प्रसिद्ध हो गए।

8 of 31

  • उनकी माँ माया देवी उर्फ दौलत नाज़ या सय्यदा मुबारक बेगम राजस्थान के एक संपन्न हिंदू राजपूत परिवार से थी। पिता का नाम था- अमीर एमादुल्मुल्क रावत अजऱ्। सुलतान बलबन के युद्ध मंत्री एमादुल्मुल्क राजनीतिक दबाव के कारण नए-नए मुसलमान बने थे। इस्लाम ग्रहण करने के बावजूद उनके घर में हिंदू रीति-रिवाजों का संजीदगी से पालन होता था। उनके घर में गाने-बजाने का माहौल था। 

9 of 31

  • तात्पर्य यह है कि खुसरो के दिलो-दिमाग पर नाना के घराने और पिता के घराने का समन्वित प्रभाव पड़ा। अमीर खुसरो जब नौ वर्ष के थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई। पिता की मौत के बाद नाना ने अमीर खुसरो की शिक्षा का उत्तरदायित्व निभाया। 

10 of 31

अमीर खुसरो की रचनाएँ�

  • मसनवी किरानुस्सादैन
  • मसनवी मतलउअनवार
  • मसनवी शोरों व खुसरू
  • मसनवी लैला मजनूँ
  • मसनवी आइना-ए-सिकंदरी
  • मसनवी हश्त्बहिश्त
  • मसनवी अस्पनामा
  • मसनवी खिज्रनामा या खिज्र खाँ देवल रानी या इश्किया
  • मसनवी नुह सिपहर
  • मसनवी तुगलकनामा

11 of 31

  • खजायनुल्फुतुह या तारीखे अलाई
  • इंशाएखुसरू या ख्यालाते खुसरू
  • रसायलुएजाज या एजाजे खुसरवी
  • अफजालुल्फबाएद
  • राह्तुल्मुजी
  • खालिकबारी
  • जवाहिरुल्बहृ
  • मुकाल
  • किस्सा चहार दरवेश
  • दीवान तुहफुतुस्सग्र
  • दीवानवस्तुल्हयात
  • दीवान गर्र्तुलकमाल
  • दीवानवकीय नकीय’

12 of 31

अमीर खुसरो की हिंदी कविता�

  • खालिकबारी या निसाब.ए.ज़रीफी या मंजूम-ए-खुसरो- यह हिंदी फारसी शब्दकोश है।

 

  • दीवान.ए.हिंदवी या कलाम-ए-हिंदवी- इसमें पहेलियाँ, ढकोसले संकलित है। 

13 of 31

  • तराना.ए.हिंदवी या कलाम.ए.हिंदवी- इसमें पहेलियों, ढकोसलों, निस्बतों, दो सुखनों, मुखम्मस, सावन, बरखा, शादी आदि गीतों, ग़ज़लों, कव्वाली है। 
  •  
  • लुआली.ए.उमान या जवाहर-ए-खुसरवी- खुसरो की कविताओं का संकलन है।

14 of 31

अमीर खुसरो की पहेलियाँ 

  • अमीर खुसरो की पहेलियाँ के कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं :-�
  • एक नार वह दाँत दँतीली। पतली दुबली छैल छबीली।।�जब बा तिरियहि लागै भूख। सूखे हरे चबावे रूख।।�जो बताय वाही बलिहारी। खुसरो कहे वरे को आरी।।- आरी (बूझ पहेली)

  • एक थाल मोतियों से भरा, सबके सिर पर औंधा धरा।�चारो ओर वह थाली फिरे, मोती वासे एक ना गिरे।।�- आसमान (मोती.तारे,बिन बूझ पहेली)

15 of 31

 �

  • अमीर खुसरो फारसी के बहुत बड़े कवि तथा विद्वान थे। फारसी के अतिरिक्त उन्हें हिन्दी भाषा से भी गहरा लगाव था। इसी वजह से हिन्दी भाषा को फारसी भाषा से हीन नहीं समझते थे। वे अपनी फारसी रचना ‘गुर्रतुल कमाल’ की भूमिका में लिखते हैं-

“चूं गन तूती ए हिन्दम अजरासत पुर्सी।

जगन हिन्दवी पुर्स ता नग्ज गोयम”॥

अर्थात् सही पूछो तो मैं हिन्दी का तोता हूँ। यदि तुम मुझ से मीठी बातें करना चाहते हो तो हिन्दवी में बातें करो।

16 of 31

विदेशों में अमीर खुसरो की लोकप्रियता

  • विदेशों में अमीर खुसरो की लोकप्रियता उनके फारसी साहित्य के कारण प्रचलित है। मगर हिन्दुस्तान में मुख्यत: जनमानस में वह अपने हिन्दी साहित्य की वजह से प्रसिद्ध हैं। अमीर खुसरो के नाम से हिन्दी साहित्य में अनेक पहेलियां, कहमुकरियाँ, दोहे, गीत और कव्वाली आदि प्रचलित हैं।

17 of 31

हिन्दी साहित्य के आदिकालीन कवि - अमीर खुसरो

  • खुसरो ने ऐसे काल में हिन्दी रचनाएं की जिस समय सर्वत्र फारसी की धाक थी। खुसरो हिन्दी साहित्य के आदिकालीन कवि है। इस काल की रचनाएं अधिकांशत: धर्म तथा राजनीति मुद्दों पर आधारित थीं। लेकिन अमीर खुसरो इन प्रवृत्तियों को किनारे कर मनोरंजन प्रधान कविताएं लिखीं।

18 of 31

  • अमीर खुसरो की कुछ हिन्दी रचनाओं को कुछ विद्वान गंभीर साहित्यिक रचनायें नहीं मानते। आचार्य रामचंद्र शुक्ल खुसरो की रचनाओं को फुटकल खाते में डालते हैं। उनका मानना है कि खुसरो की रचनाओं में जन साधारण की बोल-चाल भाषा का ज्ञान मिलता है

19 of 31

  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल का कहना है- वीरगाथा काल के समाप्त होते-होते हमें जनता की बहुत कुछ असली बोलचाल और उसके बीच कहे सुने वाले पद्यों की भाषा के बहुत कुछ असली रूप का पता चलता है। पता देने वाले हैं दिल्ली के खुसरो मियाँ और तिरहुत के विद्यापति।

20 of 31

अमीर खुसरो की साहित्यिक भाषा

  • अमीर खुसरो का काव्य सरल एवं स्वाभाविक है। उसमें पाण्डित्य प्रदर्शन एवं कृत्रिमता का अभाव है। उनकी खड़ी बोली तथा ब्रज भाषा का मिश्रण है। प्रो. एस. शाहजहाँ ने खुसरो को खड़ी बोली हिन्दी का प्रथम कवि मानते हुए लिखा है- खड़ी बोली हिन्दी की मधुमई काव्य धारा का श्री गणेश हिन्दी के आदि कवि अमीर खुसरो के हाथों हुआ था।

21 of 31

खड़ी बोली हिन्दी के आदि कवि है- अमीर खुसरो

  • नि:सन्देह अमीर खुसरो ही खड़ी बोली हिन्दी के प्रथम कवि हैं।
  • खुसरो साहब ने एक ऐसे समय पर हिन्दी नामक नाबालिग लड़की को सहारा दिया जब सब कहीं, फारसी, ब्रज भाषा और अवधी का राग विलास हो रहा था।

22 of 31

  • अमीर खुसरो की हिन्दी भाषा में कितनी काव्य रचनाएँ है यह निश्चित तौर पर नहीं मालूम है। क्योंकि अमीर खुसरो का हिन्दी काव्य लोक में प्रचलित मौखिक परम्परा से प्राप्त होता है। अमीर खुसरो के हिन्दी काव्य की कोई प्राचीन पाण्डुलिपि भी नहीं मिलती है। 

23 of 31

  • डॉ. ज्ञानचंद्र जैन का कहना है,

‘चूंकि खुसरो ने हिन्दी कलाम को मदून नहीं किया इसलिए वह सदियों तक सीना-बसीना चला आया, इसका कोई कदीम नुस्खा नहीं मिलता। इसलिए एक तरफ तो इसकी जुबान मुसलसल इस्लाह तहरींक के सबब मौजूदा दौर के मुताबिक हो गई। दूसरी तरफ इसमें कसरत से इल्हाक हो गया। साथ ही उनका बहुत सा हिन्दी कलाम तलंफ भी हो गया होगा। मौजूदा रिवायत में उनका जो कलाम मिलता है उसका लिसानी रंग-रूप ऐसा है जो महंक्कीन के नजदीक माबतर है।’

24 of 31

  • अमीर खुसरो हिन्दी काव्य का उल्लेख सर्वप्रथम श्प्रिंगर ने किया है। सैयद शम्सुल्लाह कादरी  को श्प्रिंगर के 1854 ई. में प्रकाशित लेख से सूचना मिली थी कि अवध के बादशाहों के पुस्तकालयों में जो मोतीमहल तथा तोपखाना में थे उनमें अमीर खुसरो की दो सौ पहेलियाँ तथा इसके अतिरिक्त एक संग्रह में फारसी मिश्रित ग़ज़ल तथा मुकरियाँ आदि मौजूद है।

  • खुसरो की हिन्दी रचनाओं को मौलाना अमीन अब्बासी चिरमाकोठी ने ‘जवाहर खुसखी’ नाम से 1918 ई. में अलीगढ़ से संपादन किया था।

25 of 31

  • हिन्दी के ब्रजरत्न दास ने सं. 2030 में काशी नागरी प्रचारिणी सभा से संपादित किया था। इन संग्रहों में पहेलियां, कहमुकरियां, दोहे, निस्बतें, दो सुखने, ढकोसले आदि संकलित हैं।

  • आज खुसरो की हिन्दी रचनाओं में खालिकबारी, दोहे, पहेलियां, कहमुकरियां, ढकोसले, गीत, कव्वाली, दो सुखने, निस्बते, गज़लें, फारसी, हिन्दी मिश्रित छंद तथा फुटकल छंद आदि प्राप्त होते हैं।

26 of 31

  • अमीर खुसरो ने फारसी तथा हिन्दी भाषा में मिश्रित कविताओं की भी रचना की थी। इस प्रकार की उनकी कुछ कवितायें प्राप्त हैं जिनमें पहला वाक्य फारसी का तथा दूसरा वाक्य हिन्दी भाषा का है। खुसरो ने अपने फारसी साहित्य में भी कुछ हिन्दी शब्दों का प्रयोग किया है। वे अपनी मसनवी तुगलकनामा में लिखा है-

चु बकुशदंद तीर-ए-बेंखता रा,

बाजारी गुफ्त है है तीर मारा॥

27 of 31

  • अमीर खुसरो के हिन्दी साहित्य में कहमुकरियां लिखने का सर्वप्रथम स्थान है। यह भी एक तरफ की पहेली ही होती है जिसमें सखी-सहेलियां आपस में मिलकर हास-परिहास करते हुए एक-दूसरे से पूछती हैं। यह लोक जीवन में अर्थ साजन होता है। लेकिन जैसे ही सखी उसका उत्तर, साजन बताती है, दूसरी सखी मुकर जाती है और अंत में भिन्न अभिप्राय व्यक्त करती है।

28 of 31

  • अमीर खुसरो ने अनेक गीतों की रचना की है। उनके अधिकतर गीत सूफी भावना से ओतप्रोत हैं। इसके अतिरिक्त उनके लोकगीत भी मिलते हैं। जिनको आज भी जन साधारण द्वारा विशेष अवसरों पर गाया जाता है। खुसरो का सावन का गीत बहुत प्रसिध्द है जिसे सावन में झूला झूलते हुए स्त्रियाँ गाती हैं-

अम्मा मेरे बाबा को भेजो जी कि सावन आया।

बेटी तेरा बाबा तो बुडढा री कि सावन आया।

29 of 31

  • अमीर खुसरो की रचनाएं अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। भारत के अतिरिक्त ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बंगलादेश इत्यादि देशों में खुसरो की रचनाओं को बड़े उत्साह से पढ़ा जाता है। उन्हें ‘तूतिए हिन्द’ कहा जाता है।

30 of 31

  • खुसरो की कविताएँ माधुर्य व प्रसाद गुणों से युक्त हैं, वहीं दूसरी ओर चित्रात्मकता, बिंबात्मकता, उक्ति-वैचित्र्य व उच्च कोटि की व्यंग्य क्षमता से भी युक्त हैं। सार रूप में कहा जा सकता है कि हिन्दी साहित्य के प्रणेता के रूप में खुसरो ने भाव व शिल्प के स्तर पर हिन्दी साहित्य को कई आयाम प्रदान किये।

31 of 31

����धन्यवाद