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सच्चा मित्र एक खजाने की तरह होता है। यदि हमने अपने जीवन में एक भी सच्चा मित्र पा लिया तो मानो सब कुछ पा लिया। सच्चा मित्र पाना सरल काम नहीं है। यह एक ऐसी धरोहर है जिसका मूल्य लगा पाना संभव नहीं है। इस धरोहर के सहारे मनुष्य कठिन से कठिन समय से भी बाहर निकल आता है। भगवान के द्वारा मनुष्य को परिवार मिलता है और मित्र वह स्वयं बनाता है।
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जीवन के संघर्षपूर्ण मार्ग पर चलते हुए उसके साथ उसका मित्र कंधे से कंधा मिलाकर चलता है। हर व्यक्ति को मित्र की आवश्यकता होती है। वह चाहे दुख के क्षण हो या सुख के क्षण, मित्र उसके साथ रहता है। मित्र ही उसका सही अर्थों में शुभचिंतक होता है। सच्चे मित्र में प्रेम व त्याग का भाव होता है। मित्र की भलाई दूसरे मित्र का कर्तव्य होता है। सच्चा मित्र वही होता है जो विपत्ति के समय अपने मित्र के साथ दृढ़ निश्चय होकर खड़ा रहता है। सच्चा मित्र एक शिक्षक की भांति होता है। जिस प्रकार शिक्षक अपने छात्र को सन्मार्ग की ओर अग्रसर करता है, उसी प्रकार एक सच्चा मित्र अपने मित्र को पाप के गर्त में गिरने से बचाता है। मानव जीवन अधिक रहस्य पूर्ण है। कभी-कभी जीवन में ऐसे अवसर आ जाते हैं जब मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है। ऐसे समय में मित्र का उपदेश अधिक कल्याण कारी सिद्ध होता है। मित्र के उपदेश का जितना प्रभाव हृदय में पड़ता है उतना और किसी का नहीं पड़ता।
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सच्चा मित्र जीवन का वरदान है। यदि हमारा मित्र सच्चा होगा, तो वह हमें बुरी आदतों से दूर रखेगा। इसलिए हमें ऐसा मित्र खोजना चाहिए जो शुद्ध वाला हो तथा समाज में उसकी प्रतिष्ठा हो। एक नीति श्लोक में कहा गया है-“राज द्वार से लेकर शमशान तक और परम दुख से लेकर चरम सुख तक जो साथ दे, वही सच्चा मित्र है।" सच्चा मित्र जीवन का सर्वश्रेष्ठ अनुभव होता है। यह एक ऐसा मोती है, जिसे गहरे सागर में डूब कर ही पाया जा सकता है। मित्रता की कीमत मित्रता होती है। इसका मूल्य रूपए पैसे से नहीं चुकाया जा सकता। एक सच्चा मित्र मनुष्य की सोई किस्मत को जगा सकता है और भटके को सही राह दिखा सकता है।
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एक सच्चा मित्र आपको ऊँचाई तक पहुँचा सकता है। कपटी मित्र अपने स्वार्थ के लिए आपको पतन के रास्ते पर पहुँचा सकता हैं। जो आपके मुंह पर आपके सगे बने और पीठ पीछे आपकी बुराई करें ऐसे मित्रों से सावधान रहना चाहिए। अतः मित्र का चुनाव बहुत सोच समझ कर करना चाहिए।