पाठ - चूहो ! म्याऊँ सो रही है
घर के पीछे
छत के नीचे
बिल्ली सोई
खुली रसोई�
उलटो मटका देकर झटका�
आज हमारा दूध दही है�
करो तबाही जो मन चाही�
घर के पीछे ,
छत के नीचे ,
पाँव पसारे ,
पूँछ सँवारे ।
देखो कोई ,
मौसी सोई ,
नासों में से ,
साँसों में से
घर घर घर घर हो रही
चूहो ! म्याऊँ सो रही है ।
बिल्ली सोई ,
खुली रसोई ,
भरे पतीले ,
चने रसीले ।
उलटो मटका ,
देकर झटका ,
जो कुछ पाओ ,
चट कर जाओ ।
आज हमारा दूध दही है ,
चूहो ! म्याऊँ सो रही है ।
मूँछ मरोड़ो ,
पूँछ सिकोड़ो ,
नीचे उतरो ,
चीजें कुतरो
आज हमारा , दूध दही है
चूहों ! म्याऊँ सो रही है |
मूँछ मरोड़ो ,
पूँछ सिकोड़ो ,
नीचे उतरो ,
चीज़े कुतरो |
आज हमारा ,
राज हमारा ,
करो तबाही ,
जो मनचाही ।
आज मची है ,
चूहा शाही ,
डर कुछ भी चूहों को नहीं है ,
चूहो ! म्याऊँ सो रही
धन्यवाद