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डायरी के पन्ने

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लेखिका का परिचय

नाम - एनीलिस मेरी फ्रैंक (ऐन फ्रैंक)

जन्म - 12 जून, 1929 फ्रैंकफर्ट, जर्मनी ।

मृत्यु - फरवरी/मार्च 1945 नाजी यातनागृह में हुई।

यह किताब दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़ी गई किताबों में से एक है।

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पाठ का सारांश

  • यह किताब डच भाषा में 1947 में प्रकाशित हुई।उसके बाद

  • द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल शीर्षक से 1952 में प्रकाशित हुई।

  • डायरी के पन्ने नाम से यहाँ कुछ अंश दिए गए हैं। डायरी उसने उपहार में ही मिली एक गुड़िया-किट्टी-को संबोधित करके लिखनी शुरु की।इस डायरी में भय, आतंक, भूख, प्यार, मानवीय संवेदनाएँ, प्रेम, घृणा, हवाई हमले का डर, पकड़े जाने का डर, कल्पनाएँ, बाहरी दुनिया से अलग थलग पड़ जाने का डर, हँसी मजाक, अकेलापन सभी कुछ है। यह डायरी यहूदियों पर ढाए गए जुल्मों का एक जीवंत दस्तावेज है।

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ऍन फ्रैंक की मूर्ति

घर की खिडकी जहाँ से ऍन झाँका करती थी

बुकसेल्फ जिसके पीछे एनिक्स का रास्ता जाता था

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मुख्य शिक्षण बिंदु

  • ‘‘यह साठ लाख लोगों की तरफ से बोलने वाली एक आवाज है,एक ऐसी आवाज, जो किसी संत या कवि की नहीं, बल्कि एक साधारण लड़क की है ‘‘इल्या इहरन बुर्ग नेऐन फ्रेंक के बारे में जो बिल्कुल सही कहा है। यहूदियों की संख्या साठ लाख थी। उन पर नाजियों ने अत्याचार किया। सभी जुल्म सहने को मजबूर थे। किसी में विरोध करने का साहस नहीं था। केवल 13 वर्ष की लड़की ऐन फ्रेंक ने यह साहस किया। उसने नाजियों के अत्याचारों को लिपिबद्ध किया। यह डायरी नाजियों की क्रूर मानसिकता का परिचय देती है।

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  • वह लिखती है कि मैं सच बता रही हूँ कि युद्ध के दस साल बाद लोग इससे कितना चकित होंगे जब उन्हें पता चलेगा कि यहूदियेां को अज्ञातवास क्यों जाना पड़ा उन पर किस तरह के जुल्म हुए |
  • ऐन यहूदी थी। वह चाहती थी कि लोग नाजियों के अत्याचारों के बारे में विस्तार से जानें। कही या सुनी बातों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। स्थायी प्रभाव लिखित बातों का पड़ता है। इसलिए उसने उन सब अनुभुतियों तथा घटनाओं को लिखने का मन बनाया जो उसके साथ घटी थी।

यातना शिविर का दृश्य

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  • ऐन ने अपनी डायरी में किट्टी को अज्ञातवास में घटी घटनाए, इमारत की जानकारी ,युद्ध का वर्णन व परिवार जनों के संबंध में जानकारी दी है।

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  • ऐन समाज में स्त्रियों की स्थिति को अन्यायपूर्ण कहती है। उसका मानना है कि शारीरिक अक्षमता व आर्थिक कमजोरी के बहाने से पुरुषों ने स्त्रियों को घर में बाँधकर रखा है।आधुनिक युग में शिक्षा, काम व जागृति से स्त्रियों में जागृति आई है। अब स्त्री पूर्ण स्वतंत्रता चाहती है।ऐन चाहती है कि स्त्रियों को पुरुषों के बराबर सम्मान मिले क्योंकि समाज के निर्माण में उनका योगदान महत्वपूर्ण हैं। वह स्त्री जीवन के अनुभव को अतुलनीय बताती है।

गैस चैम्बर में मारे गए लोगो के कपडे

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लघुत्तरात्मक प्रश्न

1 ऐन ने अपनी डायरी में इमारत के बारे में क्या लिखा है ?

2 अज्ञातवास मे उबाऊपन दूर करने के लिए फ्रेंक तथा वान परिवार क्या करता था?

3 19 मार्च 1943 को ऐन की खुशियाँ निराशा में क्यों बदल गई?

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

1 ऐन के अनुसार युद्ध में घायल सैनिक गर्व का अनुभव क्यों कर रहे थे ?

2 ऐन ने अपनी डायरी में किसके बारे में तथा क्या लिखा है ?

3 डच मंत्री की किस घोषणा से ऐन रोमांचित हो उठी ?

निबंधात्मक प्रश्न

1 डायरी के पन्नों से पाठ के द्वारा ऐन फ्रेंक क्या संदेश देना चाहती है

ऐन की डायरी के माध्यम से हमारा मन सभी युद्ध पीड़ितों के लिए कैसा अनुभव करता है डायरी के पन्ने कहानी के आधार पर बताइए।

२ ऐन की डायरी एक ऐतिहासिक दौर का जीवंत दस्तावेज है। साथ ही उनके निजी सुख-दुःख और भावात्मक उथल-पुथल का तर्क सहित उत्तर लिखिए।