आदर्श पाठ योजना ���विषय – हिन्दी कोर �उप विषय – जूझ (आत्म कथा)�आनंद यादव �कक्षा – बारहवीं �(गद्य शिक्षण) �� ��
डॉ. आनंद यादव
जिसने झेला नहीं खेल उसने क्या खेला
सच हम नहीं, सच तुम नहीं, सच है महज़ संघर्ष ही.
दुःख सभी को मांजता है
पीड़ा के माथे पर ही आनंद तिलक चढ़ता है
टकराएगा नहीं आज उद्धत लहरों से, कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुंचाएगा �
प्रस्तावना
उपरोक्त दृश्यों के माध्यम से क्या स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है?
जूझ से क्या अभिप्राय है?
समानार्थी शब्द बताइये.
‘जूझ’ शीर्षक का स्पष्टीकरण �
शिक्षण बिंदु
पाठ का आदर्शवाचन
पाठशाला जाने को मन तड़पता था, लेकिन दादा के सामने खड़े हो कर यह कहने की हिम्मत नहीं होती थी कि,“मैं पढने जाऊँगा”. डर लगता था कि हड्डी पसली एक कर देगा. इसलिए मैं इस ताक में रहता था कि कोई दादा को समझा दे. मुझे इसका विश्वास था कि जन्म भर खेत में काम करते रहने पर भी हाथ कुछ नहीं लगेगा. जो बाबा के समय था, वह दादा के समय नहीं रहा. यह खेती हमें गड्ढे में धकेल रही है. पढ़ जाऊंगा तो नौकरी लग जाएगी. चार पैसे हाथ में रहेंगे, विठोबा आन्ना की तरह कुछ धंधा कारोबार किया जा सकेगा. अन्दर ही अन्दर इस तरह के विचार चलते रहते थे.
अनुकरणवाचन
पाठशाला जाने को मन तड़पता था, लेकिन दादा के सामने खड़े हो कर यह कहने की हिम्मत नहीं होती थी कि,“मैं पढने जाऊँगा”. डर लगता था कि हड्डी पसली एक कर देगा. इसलिए मैं इस ताक में रहता था कि कोई दादा को समझा दे. मुझे इसका विश्वास था कि जन्म भर खेत में काम करते रहने पर भी हाथ कुछ नहीं लगेगा. जो बाबा के समय था, वह दादा के समय नहीं रहा. यह खेती हमें गड्ढे में धकेल रही है. पढ़ जाऊंगा तो नौकरी लग जाएगी. चार पैसे हाथ में रहेंगे, विठोबा आन्ना की तरह कुछ धंधा कारोबार किया जा सकेगा. अन्दर ही अन्दर इस तरह के विचार चलते रहते थे.
शब्द अर्थ
जूझ संघर्ष
धंधा व्यवसाय
खिल्ली मज़ाक उड़ाना
गमछा कंधे पर रखने वाला कपड़ा
संस्मरण बीती हुई बातों को बताना
सूक्ष्म छोटा
सचेत सावधान
अभिनय नकल करना
काठिन्य-निवारण
भाषा प्रयोग �
लुगाई, कंडे, धंधा, जोत
जिरह, गैरहाजिर, मेहमान, दहशत इत्यादि
भावात्मक एवं वर्णनात्मक शैली में लिखी गयी
आत्मकथा
महान हस्तियों के उदाहरण
मूल्यांकन
और सफलता की ऊचाइंयों को छुआ.
गृह कार्य