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आदर्श पाठ योजना ���विषय – हिन्दी कोर �उप विषय – जूझ (आत्म कथा)�आनंद यादव �कक्षा – बारहवीं �(गद्य शिक्षण) �� ��

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डॉ. आनंद यादव

  • जन्म – १९३५

  • जन्मस्थल – कागल, कोल्हापुर – महारष्ट्र

  • शिक्षा – मराठी एवं संस्कृत में स्नातकोत्तर तथा पी.एच.डी

  • व्यवसाय – पुणे विश्वविद्यालय के मराठी विभाग में कार्यरत. मराठी साहित्यकार - २५ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित.

  • पुरस्कार – १९५० में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

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जिसने झेला नहीं खेल उसने क्या खेला

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सच हम नहीं, सच तुम नहीं, सच है महज़ संघर्ष ही.

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दुःख सभी को मांजता है

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पीड़ा के माथे पर ही आनंद तिलक चढ़ता है

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टकराएगा नहीं आज उद्धत लहरों से, कौन ज्वार फिर तुझे पार तक पहुंचाएगा �

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प्रस्तावना

उपरोक्त दृश्यों के माध्यम से क्या स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है?

जूझ से क्या अभिप्राय है?

समानार्थी शब्द बताइये.

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‘जूझ’ शीर्षक का स्पष्टीकरण �

  • जूझ का अर्थ है जूझना, संघर्ष करना.
  • यह शीर्षक आत्मकथा के मूल स्वर के रूप में सर्वत्र दिखाई देता है.
  • यह एक किशोर के देखे और भोगे हुए गंवई जीवन के खुरदरे यथार्थ को प्रतिबिंबित करता है
  • कथा नायक शिक्षा प्राप्त करने के लिए कई स्तरों पर जूझता है – व्यक्तिगत स्तर पर, पारिवारिक स्तर पर, सामाजिक स्तर पर, विद्यालय के माहौल के स्तर पर तथा आर्थिक स्तर पर संघर्ष करता दिखाई देता है
  • शीर्षक कथा नायक के पढ़ाई के प्रति जूझने की भावना को उजागर करता है

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शिक्षण बिंदु

  • लेखक की पाठशाला जाने के लिए व्यग्रता.
  • विद्यालय न जा पाने का कारण.
  • दत्ता जी राव की भूमिका.
  • पाठशाला का वातावरण.
  • बसंत पाटिल से मित्रता का परिणाम.
  • शिक्षक सौन्दलगेकर की भूमिका.
  • लेखक की कविता के प्रति रूचि.

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पाठ का आदर्शवाचन

पाठशाला जाने को मन तड़पता था, लेकिन दादा के सामने खड़े हो कर यह कहने की हिम्मत नहीं होती थी कि,“मैं पढने जाऊँगा”. डर लगता था कि हड्डी पसली एक कर देगा. इसलिए मैं इस ताक में रहता था कि कोई दादा को समझा दे. मुझे इसका विश्वास था कि जन्म भर खेत में काम करते रहने पर भी हाथ कुछ नहीं लगेगा. जो बाबा के समय था, वह दादा के समय नहीं रहा. यह खेती हमें गड्ढे में धकेल रही है. पढ़ जाऊंगा तो नौकरी लग जाएगी. चार पैसे हाथ में रहेंगे, विठोबा आन्ना की तरह कुछ धंधा कारोबार किया जा सकेगा. अन्दर ही अन्दर इस तरह के विचार चलते रहते थे.

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अनुकरणवाचन

पाठशाला जाने को मन तड़पता था, लेकिन दादा के सामने खड़े हो कर यह कहने की हिम्मत नहीं होती थी कि,“मैं पढने जाऊँगा”. डर लगता था कि हड्डी पसली एक कर देगा. इसलिए मैं इस ताक में रहता था कि कोई दादा को समझा दे. मुझे इसका विश्वास था कि जन्म भर खेत में काम करते रहने पर भी हाथ कुछ नहीं लगेगा. जो बाबा के समय था, वह दादा के समय नहीं रहा. यह खेती हमें गड्ढे में धकेल रही है. पढ़ जाऊंगा तो नौकरी लग जाएगी. चार पैसे हाथ में रहेंगे, विठोबा आन्ना की तरह कुछ धंधा कारोबार किया जा सकेगा. अन्दर ही अन्दर इस तरह के विचार चलते रहते थे.

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शब्द अर्थ

जूझ संघर्ष

धंधा व्यवसाय

खिल्ली मज़ाक उड़ाना

गमछा कंधे पर रखने वाला कपड़ा

संस्मरण बीती हुई बातों को बताना

सूक्ष्म छोटा

सचेत सावधान

अभिनय नकल करना

काठिन्य-निवारण

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भाषा प्रयोग �

  • आत्मकथा में आम बोल चाल के शब्दों का प्रयोग किया गया है:-
  • ग्रामीण शब्द:-

लुगाई, कंडे, धंधा, जोत

  • उर्दू के शब्द :-

जिरह, गैरहाजिर, मेहमान, दहशत इत्यादि

  • शैली :-

भावात्मक एवं वर्णनात्मक शैली में लिखी गयी

आत्मकथा

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महान हस्तियों के उदाहरण

  • लाल बहादुर शास्त्री
  • डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
  • धीरुभाई अम्बानी
  • सुधा चंद्रन
  • मिथुन चक्रवर्ती
  • रजनी कांत
  • अब्राहम लिंकन
  • चार्ली चैपलिन

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मूल्यांकन

  • जूझ कहानी के शीर्षक के औचित्य को स्पष्ट कीजिये.
  • जूझ कहानी के आधार पर लेखक और उसके प्रिय शिक्षक के संबंधों पर प्रकाश डालिए.
  • लेखक को कविता के प्रति रूचि कैसे उत्पन्न हुई?
  • बसंत पाटिल को लेखक ने अपना मित्र बनाने की कोशिश क्यों की?
  • जूझ कहानी के आधार पर दत्ता जी राव देसाई की चारित्रिक विशेषताओं को बताइये.

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  • जूझ कहानी के उद्देश्य को स्पष्ट कीजिये.
  • आनंदा का कविता प्रेम किन किन परिस्तिथियों में बढ़ता चला गया?
  • अपने आस पास के किसी जूझते व्यक्ति की कहानी लिखिए.
  • सिद्ध कीजिये की प्रत्येक व्यक्ति की जीवन धारा को मोड़ने में किसी न किसी व्यक्ति की भूमिका अवश्य होती है.
  • इन्टरनेट से उन महत्वपूर्ण हस्तियों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिये जिन्होंने जीवन में अनेक संघर्षों का सामना किया

और सफलता की ऊचाइंयों को छुआ.

गृह कार्य