BLESSINGS
ॐ ह्रीं अर्हम् नमः
श्रीसद्गुरुभ्यो नमः
ॐ ऐं नमः
SHREE MATI GYANAY NAMAH
SHREE SHRUT GYANAY NAMAH
SHREE AVADHI GYANAY NAMAH
SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH
SHREE KEVAL GYANAY NAMAH
5 GYAN
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 43
Inspired by:
Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekar Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.
4 Types of Aghati karma
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 43
४ प्रकार के अघाति कर्म
२. अशाता वेदनीय कर्म दुःख अशांति-रोग और प्रतिकुल परिवार की प्राप्ति अशाता वेदनीय कर्म से है।
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 43
४ प्रकार के अघाति कर्म
शाता वेदनीय कर्म का बंध:
१. सद्गुरु की भक्ति
२. बडो का सन्मान करना
३. क्षमा - करूणा, दान इत्यादि करना
४. व्रतो का यथार्थ पालन
५. शुभ योग में प्रवृत्ति करने से
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४ प्रकार के अघाति कर्म
अशाता वेदनीय कर्म का बंध:
१. गुरु का अपमान करने से
२. बडो का तिरस्कार करने से
३. अशुभ योग में प्रवृत्ति करने से
४. दूसरो को पीडा देने से
V-Vedaniya
A-Ashbh
E-Effect
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४ प्रकार के अघाति कर्म
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 43
४ प्रकार के अघाति कर्म
२. आयुष्य कर्म - अक्षय स्थिति को रोकता है। जेल (बेडी) समान है।
चारगति के आयुष्य बंध के कारण :
१. महा आरंभ - समारंभ, रौद्र ध्यान - नरक आयुष्य का बंध।
२. माया - कपट - जूठ, अप्रमाणिकता तिर्यंच आयुष्य का बंध।
३. अल्प आरंभ, समारंभ, मध्यम गुणयुक्ता मनुष्य आयुष्य का बंध।
४. सराग संयम, अकाम निर्जरा, अज्ञान तप देवआयुष्य का बंध।
Aa-Aayushya
A- Ashubha
C- Cause
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४ प्रकार के अघाति कर्म
Aa-Aayushya
A- Ashubha
C- Cause
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४ प्रकार के अघाति कर्म
Aa-Aayushya
A- Ashubh
E-Effect
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४ प्रकार के अघाति कर्म
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 43
४ प्रकार के अघाति कर्म
३. नाम कर्म - अरूपी गुण को रोकता है। जो चित्रकार के समान है
नाम कर्म के दो प्रकार है (१) शुभनाम कर्म (२) अशुभनाम कर्म
शुभनाम कर्म के कारण सुंदरता, सौभाग्य, सुस्वर यश आदि की प्राप्ति होती है, अशुभ नाम कर्म के फल स्वरूप कुरूपता, दुर्भाग्य, अपयश आदि की प्राप्ति होती है,
शुभ नाम कर्म बंध किस प्रकार होता है? मन, वचन, काया की पवित्रता और सदुपयोग से
अशुभ नाम कर्म का बंध किस प्रकार होता है? मन, वचन, काया की मलीनताा और दुरुपयोग से
N- Naam karma
S- Shubh
E- Effect
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४ प्रकार के अघाति कर्म
N- Naam karma
A- Ashubh
C-Cause
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 43
४ प्रकार के अघाति कर्म
N- Naam karma
A- Asubh
E- Effect
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४ प्रकार के अघाति कर्म
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 43
४ प्रकार के अघाति कर्म
४. गोत्र कर्म - उसके २ प्रकार है।
उच्च गोत्र कर्म बंध:
१. अन्य व्यक्तिओ के सद्गुणो की प्रशंसा करने से।
२. विनय - नम्रता के गुण अपनाने से।
नीच गोत्र कर्म बंध:
१. दूसरो की निंदा करने से। २. अभिमान करने से।
G- Gotrakarma
S- Shubh
E-Effect
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४ प्रकार के अघाति कर्म
G- Gotrakarma
A- Ashubh
C- Cause
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 43
४ प्रकार के अघाति कर्म
G- Gotrakarma
A- Ashubh
E- Effect
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 43
४ प्रकार के अघाति कर्म