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प्रस्तुति

  • राजेन्द्र सिंह शेखावत
  • प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (हिंदी)
  • के.वि.भा.नौसेना पोत,वालसुरा जामनगर
  • https://hindivalsura.blogspot.com/

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बच्चे काम पर जा रहे हैं

कवि - राजेश जोशी

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अनुक्रमणिका

  • शिक्षण बिंदु
  • कविता का सारांश
  • बाल मजदूरी के कुछ चित्र
  • कवि का जीवन परिचय
  • कवि की रचनाएँ
  • शब्दार्थ
  • काव्य-सौंदर्य
  • काव्य-साम्य
  • कविता का सन्देश
  • प्रश्नोत्तर 

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शिक्षण बिंदु

  • बाल मजदूरी की विवशता पर चिंता
  • बच्चों के बालपन के साथ खिलवाड़
  • गरीबी के कारण बच्चों को खेल-सामग्री के स्थान पर कार्य में लगाया जाना।
  • सामाजिक, आर्थिक विडंबना का चित्रण।

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कविता का सारांश

प्रस्तुत कविता में बच्चों से बचपन छीन लिए जाने की पीड़ा व्यक्त हुई है। कवि ने उस सामाजिक-आर्थिक विडंबना की ओर इशारा किया है जिसमे कुछ बच्चे खेल, शिक्षा और जीवन की उमंग से वंचित है।

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कविता का सारांश

इस कविता का मुख्य प्रतिपाद्य बाल मज़दूरी है। बच्चे कोहरे से ढकी सड़क पर सवेरे-सवेरे काम पर जा रहे हैं। उनके समक्ष ऐसी कौन-सी विडंबना है। आखिर बच्चों को क्यों काम पर जाना पड़ रहा है? आज समाज के समक्ष यह एक निरन्तर प्रश्न है।

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कविता का सारांश

बच्चों को खेलने-खाने की अवस्था में काम करना पड़ रहा है। आखिर उनके हाथों के खिलौने क्यों छीन लिए गए? उनके क्रीड़ास्थल क्या समाप्त हो गए? अब उनके पास बचा ही क्या है? कवि को यह सारी चीजें तो यथावत नज़र आती है। फिर हजारों-लाखों बच्चें सड़कों पर रोजाना काम पर आ-जा रहे है। यही हमारे समाज की सबसे बड़ी विडंबना है। इससे बच्चों का जीवन अंधकारपूर्ण हो जाता है

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बाल मज़दूरी

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कवि का जीवन परिचय

_____________ राजेश जोशी

राजेश जोशी का जन्म सन् 1946 में मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ़ ज़िले में हुआ। उन्होंने शिक्षा पूरी करने के बाद पत्रकारिता शुरू की और कुछ सालों तक अध्यापन किया। राजेश जोशी ने कविताओं के अलावा कहानियाँ, नाटक, लेख और टिप्पणियाँ भी लिखीं।

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कवि का जीवन परिचय

साथ ही उन्होंने कुछ नाट्य रूपांतर भी किये हैं। कुछ लघु फिल्मों के लिए पटकथा कार्य भी किया। कई भारतीय भाषाओं के साथ साथ अंग्रेज़ी, रुसी और जर्मन में भी राजेश जी का कविताओं के अनुवाद प्रकाशित हुए हैं।

उन्हें माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार, मध्य प्रदेश शासन का शिखर सम्मान और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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कवि का जीवन परिचय

राजेश जोशी की कविताओं में स्थानीय बोली-बानी, मिज़ाज और मौसम सभी कुछ व्याप्त है। उनके काव्यलोक में आत्मीयता और लयात्मकता है तथा मनुष्यता को बचाये रखने का एक निरंतर संघर्ष भी।

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कवि की रचनाएँ

राजेश जोशी की प्रमुख काव्य संग्रह है –

  • एक दिन बोलेंगे पेड़
  • भूमि का कल्पतरु यह भी
  • मिट्टी का चेहरा
  • नेपथ्य में हँसी
  • दो पंक्तियों के बीच
  • पतलून पहिना बदल

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शब्द संपदा

  • हस्बमामूल - यथावत
  • विवरण - विस्तार
  • एकाएक - अचानक
  • अंतरिक्ष - आकाश

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शब्द संपदा

  • हस्बमामूल - यथावत्, हमेशा की तरह

मदरसा - विद्यालय

कोहरा - धुंध

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काव्य-सौंदर्य

भाषा प्रयोग

  • भाषा सरल, सरस एवं प्रवाहमयी। तत्सम, तद्भव, फारसी शब्दों की प्रधानता- मदरसा, हस्बमामूल, अंतरिक्ष, रंग-बिरंगी, देशज एवं ग्रामीण शब्दावली का प्रयोग।
  • अलंकार प्रयोगः-
    • पुनरुक्ति सुबह-सुबह ; छोटे-छोटे
    • प्रश्नालंकार तो फिर बचा ही क्या है ? इस दुनिया में
    • अनुप्रास क्या काले पहाड़ के नीचे..........

  • बिंब प्रयोगः-
    • दृश्य बिंब -समस्त कविता में।

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काव्य-साम्य

  • मत कहो….. कोहरा घना है - दुश्यंत कुमार
  • फिल्म - बूट पॉलिश

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कविता का सन्देश

इस कविता में कवि ने बच्चों के काम पर जाने की समस्या को प्रमुखता से उभारा है और प्रश्न किया है कि ऐसे कौन से कारण है जिनके कारण बच्चों को काम पर जाना पड़ रहा है। बच्चों के लिए खेल-खिलौने, विद्यालय, पुस्तकें, पार्क आदि यथावत है और ऐसे में बच्चों को काम पर जाना पड़ रहा है तो उनके होने का क्या लाभ ?

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कविता का सन्देश

कवि समाज की संवेदनहीनता और भावशून्यता को भगाना चाहता है ताकि इन बच्चों के प्रति वे कुछ सोचे और उन्हें बाल मज़दूरी से छुटकारा दिलाएं ताकि यही बाल-मज़दूर कल के सुयोग्य नागरिक बन सकें।

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हाँ या न में प्रश्न - उत्तर

  1. हमें बच्चों से उनका बचपन छीन लेना चाहिए।

उ.- नहीं

  1. बच्चों को पुस्तकों के साथ स्कूल में होना चाहिए।

उ.- हाँ

  1. हम सबको बाल मज़दूरी रोकना चाहिए।

उ.- हाँ

  1. बच्चों को लोगो की गाड़ियां साफ़ करनी चाहिए।

उ.- नहीं

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बहुविकल्पी प्रश्न - उत्तर

  1. कवि के अनुसार बच्चों का बचपन कैसा होना चाहिए ?
  2. बच्चों को गाड़ियाँ साफ़ करनी चाहिए।
  3. बच्चों के हाथों में खिलौने और पुस्तकें होनी चाहिए।
  4. बच्चों को कूड़ा - करकट में काम करना चाहिए।
  5. उपर्युक्त सभी।

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बहुबिकल्पी प्रश्न – उत्तर

  1. इस कविता का उद्देश्य क्या है ?
  2. बाल मज़दूरी को रोकना
  3. बाल मज़दूरी को बढ़ावा देना
  4. बच्चों को हमेशा डाँटना और सभी काम करवाना
  5. बच्चों से मंदिर की साफ़-सफाई करवाना

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हाँ या न में प्रश्न - उत्तर

  1. हमें बच्चों से उनका बचपन छीन लेना चाहिए।

उ.- नहीं

  1. बच्चों को पुस्तकों के साथ स्कूल में होना चाहिए।

उ.- हाँ

  1. हम सबको बाल मज़दूरी रोकनी चाहिए।

उ.- हाँ

  1. बच्चों को लोगो की गाड़ियां साफ़ करनी चाहिए।

उ.- नहीं

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विस्तृत प्रश्न - उत्तर

  1. कवि ने बच्चों का काम पर जाना भयप्रद क्यों माना है ?

उ. कवि ने बच्चों का काम पर जाना भयप्रद इसलिए माना है, क्योंकि जिन बच्चों को स्कूल में होना चाहिए, आज उनके सामने ऐसी कौन-सी मजबूरी आ खड़ी हुई है कि उन्हें काम करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।

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विस्तृत प्रश्न – उत्तर

  1. कवि बाल मज़दूरी को विश्व-व्यापी समस्या क्यों मानता है ?

उ. कवि बाल मज़दूरी को विश्व-व्यापी समस्या इसलिए मानता है, क्योंकि यह समस्या सारे विश्व के सामने मुँह फाड़े खड़ी है। दुनिया में लाखों बच्चे सूर्योदय होते ही काम पर निकल जाते है। उनकी इस बात का एहसास तक नहीं है कि बचपन किस चिड़िया का नाम है।

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पुनरावृत्ति – लघु प्रश्न

प्रश्न 1 - इस काव्यांश में कवि ने किस समय का उल्लेख किया है और क्यों?

प्रश्न 2 - अगर बच्चों के लिए सुख-सुविधाएँ नहीं हैं तो अन्य सुविधाओं का औचित्य किस प्रकार है?

प्रश्न 3- बच्चे काम पर जा रहे हैं, यह एक भयानक प्रश्न क्यों बनता है?

प्रश्न 4 - दिन-प्रतिदिन के जीवन में हर कोई बच्चों को काम पर जाते देख रहा/रही है, फिर भी किसी को कुछ अटपटा नहीं लगता। इस उदासीनता के क्या कारण हो सकते हैं?

प्रश्न 5- आपने अपने शहर के बच्चों को कब और कहाँ-कहाँ काम करते हुए देखा है तथा बच्चों का काम पर जाना धरती पर एक बड़े हादसे के समान क्यों है?

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धन्यवाद