प्रस्तुति
बच्चे काम पर जा रहे हैं
कवि - राजेश जोशी
अनुक्रमणिका
शिक्षण बिंदु
कविता का सारांश
प्रस्तुत कविता में बच्चों से बचपन छीन लिए जाने की पीड़ा व्यक्त हुई है। कवि ने उस सामाजिक-आर्थिक विडंबना की ओर इशारा किया है जिसमे कुछ बच्चे खेल, शिक्षा और जीवन की उमंग से वंचित है।
कविता का सारांश
इस कविता का मुख्य प्रतिपाद्य बाल मज़दूरी है। बच्चे कोहरे से ढकी सड़क पर सवेरे-सवेरे काम पर जा रहे हैं। उनके समक्ष ऐसी कौन-सी विडंबना है। आखिर बच्चों को क्यों काम पर जाना पड़ रहा है? आज समाज के समक्ष यह एक निरन्तर प्रश्न है।
कविता का सारांश
बच्चों को खेलने-खाने की अवस्था में काम करना पड़ रहा है। आखिर उनके हाथों के खिलौने क्यों छीन लिए गए? उनके क्रीड़ास्थल क्या समाप्त हो गए? अब उनके पास बचा ही क्या है? कवि को यह सारी चीजें तो यथावत नज़र आती है। फिर हजारों-लाखों बच्चें सड़कों पर रोजाना काम पर आ-जा रहे है। यही हमारे समाज की सबसे बड़ी विडंबना है। इससे बच्चों का जीवन अंधकारपूर्ण हो जाता है।
बाल मज़दूरी
कवि का जीवन परिचय
_____________ राजेश जोशी
राजेश जोशी का जन्म सन् 1946 में मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ़ ज़िले में हुआ। उन्होंने शिक्षा पूरी करने के बाद पत्रकारिता शुरू की और कुछ सालों तक अध्यापन किया। राजेश जोशी ने कविताओं के अलावा कहानियाँ, नाटक, लेख और टिप्पणियाँ भी लिखीं।
कवि का जीवन परिचय
साथ ही उन्होंने कुछ नाट्य रूपांतर भी किये हैं। कुछ लघु फिल्मों के लिए पटकथा कार्य भी किया। कई भारतीय भाषाओं के साथ साथ अंग्रेज़ी, रुसी और जर्मन में भी राजेश जी का कविताओं के अनुवाद प्रकाशित हुए हैं।
उन्हें माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार, मध्य प्रदेश शासन का शिखर सम्मान और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
कवि का जीवन परिचय
राजेश जोशी की कविताओं में स्थानीय बोली-बानी, मिज़ाज और मौसम सभी कुछ व्याप्त है। उनके काव्यलोक में आत्मीयता और लयात्मकता है तथा मनुष्यता को बचाये रखने का एक निरंतर संघर्ष भी।
कवि की रचनाएँ
राजेश जोशी की प्रमुख काव्य संग्रह है –
शब्द संपदा
शब्द संपदा
मदरसा - विद्यालय
कोहरा - धुंध
काव्य-सौंदर्य
भाषा प्रयोग
काव्य-साम्य
कविता का सन्देश
इस कविता में कवि ने बच्चों के काम पर जाने की समस्या को प्रमुखता से उभारा है और प्रश्न किया है कि ऐसे कौन से कारण है जिनके कारण बच्चों को काम पर जाना पड़ रहा है। बच्चों के लिए खेल-खिलौने, विद्यालय, पुस्तकें, पार्क आदि यथावत है और ऐसे में बच्चों को काम पर जाना पड़ रहा है तो उनके होने का क्या लाभ ?
कविता का सन्देश
कवि समाज की संवेदनहीनता और भावशून्यता को भगाना चाहता है ताकि इन बच्चों के प्रति वे कुछ सोचे और उन्हें बाल मज़दूरी से छुटकारा दिलाएं ताकि यही बाल-मज़दूर कल के सुयोग्य नागरिक बन सकें।
हाँ या न में प्रश्न - उत्तर
उ.- नहीं
उ.- हाँ
उ.- हाँ
उ.- नहीं
बहुविकल्पी प्रश्न - उत्तर
बहुबिकल्पी प्रश्न – उत्तर
हाँ या न में प्रश्न - उत्तर
उ.- नहीं
उ.- हाँ
उ.- हाँ
उ.- नहीं
विस्तृत प्रश्न - उत्तर
उ. कवि ने बच्चों का काम पर जाना भयप्रद इसलिए माना है, क्योंकि जिन बच्चों को स्कूल में होना चाहिए, आज उनके सामने ऐसी कौन-सी मजबूरी आ खड़ी हुई है कि उन्हें काम करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।
विस्तृत प्रश्न – उत्तर
उ. कवि बाल मज़दूरी को विश्व-व्यापी समस्या इसलिए मानता है, क्योंकि यह समस्या सारे विश्व के सामने मुँह फाड़े खड़ी है। दुनिया में लाखों बच्चे सूर्योदय होते ही काम पर निकल जाते है। उनकी इस बात का एहसास तक नहीं है कि बचपन किस चिड़िया का नाम है।
पुनरावृत्ति – लघु प्रश्न
प्रश्न 1 - इस काव्यांश में कवि ने किस समय का उल्लेख किया है और क्यों?
प्रश्न 2 - अगर बच्चों के लिए सुख-सुविधाएँ नहीं हैं तो अन्य सुविधाओं का औचित्य किस प्रकार है?
प्रश्न 3- बच्चे काम पर जा रहे हैं, यह एक भयानक प्रश्न क्यों बनता है?
प्रश्न 4 - दिन-प्रतिदिन के जीवन में हर कोई बच्चों को काम पर जाते देख रहा/रही है, फिर भी किसी को कुछ अटपटा नहीं लगता। इस उदासीनता के क्या कारण हो सकते हैं?
प्रश्न 5- आपने अपने शहर के बच्चों को कब और कहाँ-कहाँ काम करते हुए देखा है तथा बच्चों का काम पर जाना धरती पर एक बड़े हादसे के समान क्यों है?
धन्यवाद