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BLESSINGS

ॐ ह्रीं अर्हम् नमः

श्रीसद्गुरुभ्यो नमः

ॐ ऐं नमः

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SHREE MATI GYANAY NAMAH

SHREE SHRUT GYANAY NAMAH

SHREE AVADHI GYANAY NAMAH

SHREE MANAH - PARYAV GYANAY NAMAH

SHREE KEVAL GYANAY NAMAH

5 GYAN

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Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 47

Sakal Tirth Part - 1

Inspired by:

Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekar Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.

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Sakal Tirth Part - 1

सिद्ध अनंत नमु निशदिश।

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Sakal Tirth Part - 1

संख्या

क्षेत्र / देवलोक

अनुत्तर में

३१८

नौ ग्रैवेयक में

३००

११-१२ देवलोक में

४००

९-१० देवलोक में

६०००

८ देवलोक में

४०,०००

७ देवलोक में

५०,०००

६ देवलोक में

४ लाख

५ देवलोक में

१२ लाख

४ देवलोक में

८ लाख

३ देवलोक में

२८ लाख

२ देवलोक में

३२ लाख

१ देवलोक में

८४,९७,०२३

कुल मन्दिर

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Sakal Tirth Part - 1

  • वैमानिक में प्रत्येक विमान में १-१ मन्दिर है अतः ३२ लाख, २८ लाख आदि मन्दिर हैं।
  • प्रत्येक मन्दिर लम्बा १०० योजन, चौडा ५० योजन ऊंचा ७२ योजन है।
  • इस प्रत्येक मन्दिर में १८० रत्नमय शाश्वत जिनबिंब हैं, मात्र ग्रैवेयक-अनुत्तर के ३२३ मन्दिरों में १२०-१२० जिनबिंब हैं।

बिम्ब गणना :

  • ८४,९६,७०० x १८० = १,५२,९४,०६,०००

३२३ x १२० = + ३८,७६०

१,५२,९४,४४,७६०

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Sakal Tirth Part - 1

व्यंतर ज्योतिषीमां वली जेह, शाश्वता जिन वंदु तेह।

व्यंतर, ज्योतिषी के मन्दिर-बिंब असंख्य है | - १० मी गाथा

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Sakal Tirth Part - 1

मध्य लोक के शाश्वत मन्दिर व मूर्ति - ९ मी गाथा

बत्रीसे ने ओगणसाठ, तिच्छलोक माँ चैत्यनो पाठ ।

त्रण लाख एकाणुं हजार, त्रणसे वीस ते बिम्ब जुहार ९.

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Sakal Tirth Part - 1

क्षेत्र

मंदिर

बिंब

नंदीश्वर

५२

६४४८

कुंडल

४९६

रुचक

४९६

कुंडल

३०

३६००

देव- उत्तरकुरु

१०

१२००

मेरु

८०

९६००

गजदंता

२०

२४००

वक्रार

८०

९६००

इषुकार

४८०

मानुषोत्तर

४८०

क्षेत्र

मंदिर

बिंब

दिग्गज

४०

४८००

द्रह

८०

९६००

कंचनगिरि

१०००

१,२०,०००

महानदी

७०

८४००

दीर्घवैताढय

१७०

२०,४००

कुंड

३८०

४५,६००

यमकगिरी

२०

२४००

मेरुचुला

६००

जम्बुवृक्षादी

११७०

१,४०,४००

वृत वैताढय

२०

२४००

विजयादि नगरीओ १६ १९२०

कुल ३२५९ ३,९१,३२०

मध्यलोक में ३,२५९ मन्दिर, व मूर्ति ३,९१,३२०

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Sakal Tirth Part - 1

व्यंतर ज्योतिषीमां वली जेह, शाश्वता जिन वंदु तेह।

व्यंतर, ज्योतिषी के मन्दिर-बिंब असंख्य है | - १० मी गाथा

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Sakal Tirth Part - 1

नीचे पाताल में भवनपति - देवलोक में १० भवनपति में मन्दिर क्रमशः

६४-८४-७२, लाख छः भवनपती प्रत्येक में ७६ लाख, १० वें में ९६ लाख,

कुल ७ करोड़ ७२ लाख प्रत्येक में जिनबिंब १८०,

अतः कुल बिम्ब १३,८९,६०,००,००० है |

सात कोड ने बहोतेर लाख, भवनपतिमां देवल भाख ७. एकसो ऐंशी बिम्ब प्रमाण, एक एक चैत्ये संख्या जाण । तेरसे क्रोड नेव्याशी क्रोड, साठ लाख वंदूं कर जोड । ८.

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