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BLESSINGS

ॐ ह्रीं अर्हम् नमः

श्रीसद्गुरुभ्यो नमः

ॐ ऐं नमः

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SHREE MATI GYANAY NAMAH

SHREE SHRUT GYANAY NAMAH

SHREE AVADHI GYANAY NAMAH

SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH

SHREE KEVAL GYANAY NAMAH

5 GYAN

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Inspired by:

Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekhar Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.

Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 35

Jeev vichar part -1

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Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 35

जीव विचार पार्ट - १

जीव विचार पार्ट - १

संसार में दो तत्व हैं, जीव और अजीव। जिसमें चेतना, ज्ञान अथवा उपयोग होता है, वह है जीव चेतना शून्य जड़ पदार्थ अजीव है।

जीव दो प्रकार के होते हैं –

(१) मुक्त - जो आठ कर्मों का क्षय करके, शरीर आदि से रहित, निराकार शुद्ध चैतन्य स्वरूप हैं, जन्म-मरण से मुक्त हैं, वे सिद्ध परमात्मा कहलाते हैं। उनका स्थान है सिद्धालय/मोक्ष, जिसे सिद्धक्षेत्र भी कहते हैं। यह लोक के सबसे उपरी भाग में स्थित हैं।

(२) संसारी जीव - जो जीव आठ कर्मों के कारण शरीर, ईन्द्रिय आदि धारण करके संसार में परिभ्रमण करते हैं, विभिन्न योनियों में जन्म ग्रहण करते है, मरते हैं और फिर नया शरीर धारण करते हैं। इस प्रकार जन्म-मरण रूप संसार में निरन्तर भटकते रहते हैं

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संसारी जीवों के दो मुख्य भेद हैं-त्रस और स्थावर।

जो स्थिर रहते हैं, अपनी इच्छा से हिलने चलने की शक्ति जिनमें नहीं है, वे स्थावर जीव हैं।

एकेन्द्रिय जीव स्थावर कहलाते हैं।

एकेन्द्रिय का अर्थ है, जिनके केवल स्पर्शेन्द्रिय (शरीर) एक ही ईन्द्रिय होती है, पाँच प्रकार के एकेन्द्रिय जीवों में भी तीन तो स्थावर हैं, किन्तु तेजस्काय व वायुकाय गति की अपेक्षा गति त्रस कहलाते है।

सामान्यतः किसी भी जीव की ईन्द्रियों की गिनती करने का आसान तरीका है, हमारे मुँह पर दाढ़ी से कान तक जो क्रम है, उसी अनुसार समझना चाहिए।

जैसे द्वीन्द्रिय के स्पर्शेन्द्रिय के साथ रसनेन्द्रिय भी है।

त्रीन्द्रिय के घ्राण (नाक), चतुरिन्द्रिय के आँख तथा पंचेन्द्रिय के कान। मुख पर से इन इन्द्रियों को समझा जा सकता है।

इस त्रस जीवों का वर्णन आगे किया जायेगा।

स्थावर जीवों के मुख्य पाँच भेद हैं-

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जीव विचार पार्ट - १

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(१) पृथ्वीकाय

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जीव विचार पार्ट - १

(१) पृथ्वीकाय - पृथ्वी ही जिनका शरीर हैं, जैसे मिट्टी, पर्वत, घातु, नमक, स्वर्ण, तांबा, सीसा, लोहा, पारा, क्षार, चाँदी, रत्न, हीरे, साबुन आदि।

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जीव विचार पार्ट - १

(२) अप्काय - पानी ही जिनका शरीर है। जैसे वर्षा, कुआँ, सरोवर, नदी, समुद्र, बर्फ, ओस, ओले, कोल्ड ड्रीक्स, शावर, स्वीमींगपुल, वोटर फोल (धोध) आदि का जल।

ध्यान रहे कि जल में हजारों सूक्ष्म जीव-जंतु जो वैज्ञानिकों ने दूरबीन से देखे हैं, वे अपकाय नहीं, बल्कि त्रसकाय के जीव होते है।

(२) अप्काय

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जीव विचार पार्ट - १

(३) तेजसकाय - अग्नि जिनका शरीर है।

जैसे अंगारा, कोयला आदि की अग्नि, आकाश में दिखाइ देती अग्नि रेखाए, बिजली, दीपक, आयर्न, बल्ब, गेस स्टव, होट बलून, फटाके, ओवन, टी.वी., मोबईल, उल्का आदि की अग्नि

(३) तेजसकाय

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जीव विचार पार्ट - १

(४) वायुकाय - पवन या हवा जिनका शरीर है। सभी प्रकार की वायु।

पंखा, ओ.सी., अक्षहोस्ट फेन. बलुन, आंधी आदि महावात, गोलाकार धुमता वायु., शहनाइ, ओर कुलर इत्यादी

(४) वायुकाय

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