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BLESSINGS

ॐ ह्रीं अर्हम् नमः

श्रीसद्गुरुभ्यो नमः

ॐ ऐं नमः

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SHREE MATI GYANAY NAMAH

SHREE SHRUT GYANAY NAMAH

SHREE AVADHI GYANAY NAMAH

SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH

SHREE KEVAL GYANAY NAMAH

5 GYAN

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Inspired by:

Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekhar Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.

Mahaveer Swami Bhav – 27 / Slide 63 - 74

Learn & turn part – 2 story NO 7

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Picture No. 1

  1. प्रियंवदा दासी ने सिद्धार्थ राजा को पुत्र जन्म की बधाई दी।

राजा ने हर्षित होकर बिना मुकुट सारे आभुषण, प्रियंवदा दासी को भेट रूप में दे दिया।

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Picture No. 2

२) आगे तय हुआ मुजब माता पिता द्वारा 'वर्धमान' नाम की उद्घोषणा हुई

और सभी स्वजन - मित्रो को प्रीति भोजन करवाया।

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Picture No. 3

३) माता - पिता बहुत हि खुश थे और बाल वर्धमान को प्रसन्न रखते थे।

एक दिन वर्धमान कुमार के बल की परीक्षा करने १ देव सर्प के रुप में आया।

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Picture No. 4

४) बाल क्रिडा करते हुए भगवान ने देव रूपी सर्प को पकडकर दूर फेंका।

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Picture No. 5

५) दुबारा राक्षस रूप में आये हुए देव का वर्धमान कुमारने मुष्टि से दमन किया,

पश्चात् देवो ने प्रसन्न होकर नाम रखा 'महावीर'।

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Picture No. 6

६) बाल वर्धमान को पढाने के लिए माता पिता सपरिवार पाठशाला में गये।

देवलोक में रहे इंद्र महाराजा रूप परिवर्तन करके पाठशाला में आये और प्रभु की महानता सभी को दिखाइ।

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Picture No. 7

७) जब वर्धमान कुमार युवान हुए तब समरवीर राजा की पुत्री यशोदा के साथ वर्धमानकुमार का विवाह हुआ।

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Picture No. 8

८) माता - पिता एवं अन्य परिवार के साथ युवराज वर्धमान अपना पारिवारिक जीवन अच्छी तरह जी रहे है।

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Picture No. 9

९) युवराज वर्धमान और यशोदा को पुत्री के रूप में संतान की प्राप्ति हुई,

परिवारने नाम रखा प्रियदर्शना।

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Picture No. 10

१०) वर्धमान कुमार जब २८ साल के हुए,

तब माता पिता का अवसान हुआ।

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Picture No. 11

११) बडे बाई नंदिवर्धन राजा ने युवराज वर्धमान को राज्य ग्रहण का आग्रह किया,

वर्धमान ने मक्कमता से निषेध किया और खुद को दीक्षा देने की अनुमति मांगी।

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Picture No. 12

१२) युवराज वर्धमान बडे भाई नंदीवर्धन के आग्रह से २ सान्न विरक्त बनकर संसार में रहे।

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