BLESSINGS
ॐ ह्रीं अर्हम् नमः
श्रीसद्गुरुभ्यो नमः
ॐ ऐं नमः
SHREE MATI GYANAY NAMAH
SHREE SHRUT GYANAY NAMAH
SHREE AVADHI GYANAY NAMAH
SHREE MANAH - PARYAV GYANAY NAMAH
SHREE KEVAL GYANAY NAMAH
5 GYAN
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 30
8th Vrat : Anarthdand Virman Vrat
Inspired by:
Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekar Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 30
Anarthdand Virman Vrat
आठवा व्रत - अनर्थदण्ड विरमण व्रत
श्रावक का तीसरा गुणव्रत अनर्थदण्ड विरमण व्रत है। अपने स्वयं के जीवन निर्वाह हेतु तथा आश्रित परिवार के पालन-पोषण हेतु जो सावद्द्य क्रियाएँ करनी पड़ती हैं, उनमें हिंसा होती है। अनिवार्य सावद्द्य प्रवृत्तियों को 'अर्थदण्ड' कहा है। उनके अतिरिक्त शेष समस्त पापपूर्ण प्रवृत्तियों से निवृत्त होना अनर्थदण्ड विरमण व्रत है।
शास्त्रकारो ने अनर्थदण्ड रूप प्रवृत्तियों के चार आधार स्तंभ बताये है। वे इस प्रकार है
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No.30
Anarthdand Virman Vrat
(१) अपध्यानाचरित - अपध्यान का अर्थ है-अप्रशस्त ध्यान। आर्तध्यान और रौद्रध्यान दोनों अप्रशस्त ध्यान है। आक्रन्दन करना, शोक चिंता में डूबे रहना, छाती-माथा कूटना आर्तध्यान है। हिंसा, झूठ, द्वेष आदि वश दूसरों को मारने आदि का बुरा विचार करना रौद्रध्यान है।
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 30
Anarthdand Virman Vrat
Using unfiltered water
(१) मन बहलाने के लिए, ज्यादा पाणी से स्नान करना
(२) प्रमादाचरित
Using Beautifying things
(२) हाथ में मेंहदी इत्यादि लगाना, लापरवाही और अज्ञानवश जीव हिंसा आदि करना।
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 30
Anarthdand Virman Vrat
Being entertained
(३) कुतूहलवश अश्लील गीत, नृत्य, नाटक आदि देखना
Attachment towards food
(४) आसक्तिपूर्वक - स्निग्ध भोजन ज्यादा खाना, कषायवर्द्धक साहित्य पढ़ना, जूआ खेलना, मद्यपान करना, प्राणियों को परस्पर लड़ाना, निरर्थक वार्तालाप करना
Attachment towards
ornaments
(५) धन - ज़ेवरात का विशेष परिग्रह तथा अभिमान प्रमादाचरण है।
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 30
Anarthdand Virman Vrat
प्रस्तुत व्रत के पाँच अतिचार
To praise one’s beauty
of opposite gender
(१) कन्दर्प - विकारवर्धक वचन बोलना, सुनना या वैसी चेष्टाएँ करना। परिहास, हँसी ठिठोली करना और जोर से हँसना ।
Attracting opposite gender
(२) कौत्कुच्य - विजातीय को आकर्षित करने की चेष्टाएँ करना, भांडों के समान हाथ पैर पटकना, नाक मुँह और आँख आदि की विकृत चेष्टाएँ करना।
Learn & Turn Jainism Part -2 Lesson No. 30
Anarthdand Virman Vrat
Speaking arrogantly
(३) मौखर्य - वाचालता, अपनी शेखी बघारना आदि
Violence objects
kept assembled
(४) संयुक्ताधिकरण - बिना आवश्यकता के हिंसक हथियारों एवं ऐसे घातक साधनों को संयुक्त करके रखना, जैसे - घंटी के दो पड, बन्दूक के साथ कारतूस
Indulged in severe lust
(५) उपभोग - परिभोगातिरेक-उपभोग और परिभोग की सामग्री को आवश्यकता से अधिक संग्रह करके रखना। मकान, कपड़े, फर्नीचर आदि का आवश्यकता से अधिक संग्रह करना भी इस अतिचार के अन्तर्गत ही है।