BLESSINGS
ॐ ह्रीं अर्हम् नमः
श्रीसद्गुरुभ्यो नमः
ॐ ऐं नमः
SHREE MATI GYANAY NAMAH
SHREE SHRUT GYANAY NAMAH
SHREE AVADHI GYANAY NAMAH
SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH
SHREE KEVAL GYANAY NAMAH
5 GYAN
Inspired by:
Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekhar Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.
Aa. Shree Bhuvanbhanusuri M.S. PART - 1
LEARN & TURN PART – 2 STORY NO 37
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Learn & turn part 2 story no 37
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चैत्र वद ६ के दिन माता भूरीबेन ने पुत्र को जन्म दिया, नाम रखा कांति।
२) कांति पीछले जन्मो के धार्मिक संस्कार के कारण बचपन से ही
त्रिकाल पूजा, गुरुवंदन, स्वाध्याय, सुपात्रदान, चौविहार आदि श्रावक कर्तव्यों का पालन कर रहे थे।
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३) कांति २३ वर्ष की आयु में उपाश्रय में आए, स्वाध्याय में लीन साधुओं को देखकर वे बहुत प्रसन्न हुए,
आचार्य प्रेमसूरीश्वरजी म.सा. ने कांति को देखा।
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४) आचार्य श्री की पहली मुलाकात में वैराग्य का दीपक प्रकट हुआ,
इस बीच कांति के एक रिश्तेदार की मृत्यु हो गई, जो कम उम्र का था,
इस घटना से कांति का वैराग्य बहुत बढ गया।
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५) कांति जो एक असाधारण प्रतिभाशाली व्यक्ति थे,
वे यूके के सी.ए. के समांतर जीडीए परीक्षा में अधिकतम गुणांक के साथ उत्तीर्ण हुए।
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६) जीवन का अंतिम लक्ष्य क्या है? ऐसी उल्जन के कारण पूरी रात नींद नहीं आयी,
उन्हीं दिनों में कांतिलाल के भाई का २५ वर्ष की आयु में अचानक निधन हो गया।
इस घटना से कंपित कांति ने अपना भविष्य तय कर लिया।
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७) उनके पुन्योदय से चातुर्मास के लिए, पु. प्रेमसूरीश्वरजी म.सा. आये।
गुरु भगवंत की निरंतर प्रेरणा से, उत्कृष्ट वैराग्य प्राप्त किया, जीवन भर के ब्रह्मचर्य का व्रत लिया।
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८) माता-पिता से दीक्षा की अनुमति न मिलने पर, एक रात कांतिलाल अपने छोटे भाई पोपटभाई से चर्चा करके,
दोनों घर छोड़कर चाणस्मा नगर की ओर भाग गए।
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९) दोनों भाईने पूज्य श्री प्रेमसूरीश्वर म.सा. के पास पोष सूद १२ को दीक्षा ग्रहण की।
कातिलाल का नाम, पु.श्री भानुविजयजी और पोपटभाई का नाम, पु.श्री पद्मविजयजी म.सा. रखा गया।
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१०) दीक्षा लेने के बाद, दोनों मुनियों ने सख्त संयम का पालन करने के लिए, अध्ययन को अत्यधिक महत्त्व दिया।
उन्होंने बाल मुनि, वृद्ध मुनि, बीमार व्यक्तियों आदि की भी सर्वोत्तम सेवा की
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