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भाषा की परिभाषाएं

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प्रस्तावना :

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में रहकर विचार-विनिमय करने के लिए वह भाषा का प्रयोग करता है। 

मनुष्य की आत्माभिव्यक्ति की इच्छा ने भाषा को जन्म दिया है।

'भाषा' शब्द संस्कृत की 'भाष्' धातु से बना है। 'भाष्' धातू का अर्थ है-'बोलना' या 'कहना'।

अर्थात भाषा वह है, जिसे बोला जाए।

भाषा की परिभाषाएं

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भाषा की वैज्ञानिक परिभाषा में निहित मूलभूत बातें

1. भाषा विचार विनिमय का साधन हैं।

2. वह मनुष्य के उच्चारण अवयवों से निसृत ध्वनि प्रतीकों की व्यवस्था होती है।

3. यह ध्वनिप्रतीक सार्थक होते हैं और वही विश्लेषण करने योग्य होते हैं।

4. यह ध्वनिप्रतिक यादृच्छिक(मानी हुए) होते हैं।

5. एक भाषा का प्रयोग समाज के एक वर्ग- विशेष में होता है।

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भाषा विज्ञान की दृष्टि से भाषा उसे कहते हैं,"जो बोली और सुनी जाती है और बोलना भी पशु पक्षियों का नहीं, गूंगे मनुष्य का भी नहीं, केवल बोल सकने वाले मनुष्यों का।"

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भाषा विज्ञान की दृष्टि से भाषा की परिभाषा:

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1.पं. कामता प्रसाद गुरु :

     "भाषा वह साधन है, जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचार दूसरों पर भली-भांति प्रकट कर सकता है। और दूसरों के विचार आप स्पष्टतया समझ सकता है।"

2. आचार्य किशोरीदास बाजपेयी:

     "विभिन्न अर्थों में सांकेतिक शब्द समूह ही भाषा है, जिसके द्वारा हम अपने मनोभाव दूसरों के प्रति बहुत सरलता से प्रकट करते हैं।

3. डा. बाबूराम सक्सेना:

      “जिन ध्वनि चिन्हों द्वारा मनुष्य परस्पर विचार विनिमय करता है, उसे भाषा कहते हैं।"

4. डा. भोलानाथ तिवारी:

       "भाषा उच्चारणावयवों से उच्चारित यादृच्छिक ध्वनि प्रतीकों की वह व्यवस्था है, जिसके द्वारा समाज विशेष के लोग आपस में विचारों का आदान प्रदान करते हैं।"

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भारतीय विद्वानों द्वारा दी गई भाषा की परिभाषाएं

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1.प्लेटो :

         "प्लेटो ने 'सोफिस्ट' में विचार और भाषा के संबंध में लिखते हुए कहा है कि, "विचार और भाषा में थोड़ा ही अंतर है, 'विचार' आत्मा की मुक या अध्वन्यात्मक बातचीत है, पर वही जब ध्वन्यात्मक होकर होठों पर प्रकट होती है, तो उसे भाषा की संज्ञा देते हैं।

2. स्वीट :

     "ध्वन्यात्मक शब्दों द्वारा विचारों को प्रकट करना ही भाषा है।"

3.स्रुत्वा :

      "भाषा यादृच्छिक ध्वनि संकेतों की वह पद्धति है, जिसके द्वारा मानव समुदाय परस्पर विचारों का आदान प्रदान करते हैं।“

4. इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका :

       "भाषा यादृच्छिक ध्वनि प्रतीकों की एक ऐसी पद्धति है जिसके द्वारा मानव समुदाय के एक विशेष सामाजिक, सांस्कृतिक परंपरा के लोग विचारों का आदान प्रदान करके अपना काम चलाते हैं।"

पाश्चात्य विद्वानों द्वारा दी गई भाषा की परिभाषाएं:

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      उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर भाषा के संदर्भ में संक्षेप में कहा जा सकता है कि, "भाषा उच्चारण अवयवों से नि:सृत, विश्लेषण योग्य, सार्थक, यादृच्छिक ध्वनि प्रतीकों की वह व्यवस्था है, जिसके माध्यम से समाज के एक वर्ग विशेष के लोग परस्पर विचार विनिमय करते हैं।"

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