इस जल प्रलय में
-फणीश्वर नाथ रेणु
प्रस्तुति
� लेखक के बारे में
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फणीश्वर नाथ रेणु�
पाठ का सार
शब्दार्थ
सपात - समतल
सहजता – स्वभाविकता
सुलगना – आग लगना
माकूल – उचित
नटूआ – नट कलाकार
कलरव - चिड़ियों, पक्षियों के चहकने की आवाज़
कोलाहल - हलचल
प्रश्न - अभ्यास
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उत्तर :
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धन्यवाद