BLESSINGS
ॐ ह्रीं अर्हम् नमः
श्रीसद्गुरुभ्यो नमः
ॐ ऐं नमः
SHREE MATI GYANAY NAMAH
SHREE SHRUT GYANAY NAMAH
SHREE AVADHI GYANAY NAMAH
SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH
SHREE KEVAL GYANAY NAMAH
5 GYAN
Inspired by:
Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekhar Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.
P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.
AADINATH BHAGWAN PART – 3
Learn & turn part – 2 story NO 31
१) प्रभु ने दीक्षा ली, ४००० भाइयों ने भी साथ मैं दीक्षा ली।
Picture No. 1
Aadinath Bhagwan – Part 3
Learn & turn part 2 story no 31
२) लोगों ने तरह-तरह के आभूषणो, कपड़े आदि भेट दिए,
लेकिन किसी ने भी जैन साधु आचार के अनुसार गोचरी (भोजन) की विनंती नहीं की।
Picture No. 2
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Learn & turn part 2 story no 31
३) अन्य ४००० साधुओं ने भोजन पानी न मिलने पर, प्रभु को छोड़ दिया,
जंगल में चले गए और फल खाना और झील का पानी पीना शुरू किया।
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Aadinath Bhagwan – Part 3
Learn & turn part 2 story no 31
४) नमी-विनमी प्रभु के सगे पुत्र नहीं थे और उस समय हाजिर भी नहीं थे इसलिए नमी-विनमी को राज्य का अपना हिस्सा नहीं मिला,
उन्होंने इसके लिए प्रभु को जो अब साधु हो गये थे उनको विनंती की
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Learn & turn part 2 story no 31
५) जब प्रभु मौन रहे, तो उन्होंने प्रभु को प्रसन्न करने के लिए ध्यान पूजा शुरू कर दी
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६) नमी विनमी की भक्ति से प्रभावित होकर,
धरणेन्द्र ने वैताढय पर्वत के आसपास ११० नगरों की रचना की और उन्हें राजा बनाया।
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७) दीक्षा लेने के एक साल बाद भी प्रभु को जैन रीति-रिवाजों के अनुसार गोचरी नहीं मिली।
प्रभु को ४०० चौविहार उपवास हो गए थे।
विहार करके हस्तिनापुर पहुंचे।
Picture No. 7
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८) हस्तिनापुर पर बाहुबली के पुत्र राजा सोमप्रभ का शासन था। उनके पुत्र राजकुमार श्रेयांसने रात को स्वप्न में देखा कि वह अमृत द्वारा मेरु पर्वत का अभिषेक कर रहे हैं।
उससे संकेत मिला की उन्हें बहुत बड़ा लाभ मिलने वाला है।
Picture No. 8
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९) प्रातःकाल राजकुमार राजमहल के झरोखो में बैठे थे, प्रभु ऋषभ को पास से गुजरते देखकर,
राजकुमार श्रेयांस को जाति स्मरण ज्ञान हुआ।
अपने पिछले भव की याद आ गई। उसमें जैन साधु के गोचरी संबंधी आचार दिखाई दिये।
Picture No. 9
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Learn & turn part 2 story no 31
१०) वह नीचे आया, मुनि (प्रभु) को प्रणाम किया और उनसे गन्ने का रस लेने की विनंती की।
प्रभु ने गन्ने का रस ग्रहण किया और ४०० उपवास का पारणा किया
Picture No. 10
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