एक तिनका
अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
प्रिय प्रवास, वैदेही वनवास, रस कलश, प्रेमाम्बुप्रवाह, चौखे चौपदे, चुभते चौपदे, बाल-विभव, बाल-विलास, फूल पत्ते, चंद्र खिलौना, खेल-तमाशा, उपदेश-कुसुम, बाल-गीतावली, चाँद-सितारे, पद्य-प्रसून
कठिन शब्दों के अर्थ
एक दिन जब था मुण्डेरे पर खड़ा ।
आ अचानक दूर से उड़ता हुआ ।
एक तिनका आँख में मेरी पड़ा ।।
लाल होकर आँख भी दुखने लगी ।
मूँठ देने लोग कपड़े की लगे।
ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी ।।
तब 'समझ' ने यों मुझे ताने दिए।
ऐंठता तू किसलिए इतना रहा ।
एक तिनका है बहुत तेरे लिए ।।
पाठ का संदेश
2. हमें किसी भी प्राणी को छोटा नहीं समझना चाहिए. हर प्राणी का अपना महत्व होता है.