संगीत और योग साधना
Dr. Prem Sagar
Assistance Professor and HOD
Music Vocal (HMV)
भूमिका
संगीत-कला और योग-साधना का परस्पर सम्बन्ध है
संगीत क्या है? तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में संगीत की भूमिका
योग क्या है तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में योग की भूमिका
संगीत-साधना एंवम् शरीर के सप्त चक्रों का अन्तर्सम्बन्ध
योग शब्द की व्युत्पत्ति
भूमिका
भूमिका
संगीत-कला और योग-साधना का परस्पर सम्बन्ध है
संगीत क्या है? तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में संगीत की भूमिका
संगीत क्या है? तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में संगीत की भूमिका
संगीत क्या है? तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में संगीत की भूमिका
संगीत क्या है? तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में संगीत की भूमिका
संगीत क्या है? तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में संगीत की भूमिका
संगीत क्या है? तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में संगीत की भूमिका
संगीत क्या है? तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में संगीत की भूमिका
योग क्या है तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में योग की भूमिका
योग क्या है तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में योग की भूमिका
योग क्या है तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में योग की भूमिका
योग क्या है तथा मानव जीवन को सुखद और सार्थक बनाने में योग की भूमिका
योग शब्द की व्युत्पत्ति
योग शब्द की व्युत्पत्ति
योग शब्द की व्युत्पत्ति
योग शब्द की व्युत्पत्ति
योग शब्द की व्युत्पत्ति
योग शब्द की व्युत्पत्ति
योग शब्द की व्युत्पत्ति
योग शब्द की व्युत्पत्ति
योग शब्द की व्युत्पत्ति
योग शब्द की व्युत्पत्ति
योग शब्द की व्युत्पत्ति
योग शब्द की व्युत्पत्ति
''नासा: कंठमुरस्य तालु जिह्वा दंतस्य संस्पृष्ण,
षड़मय: संजायते यस्मात् तस्मात् षडज़ स्मृता:।''
“वाग्गेयकार के रूप में पंडित गनेश प्रसाद शर्मा जी का हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत को योगदान”- पृष्ठ संख्या 325, लेखक- डॉ. प्रेम सागर
योग शब्द की व्युत्पत्ति
योग शब्द की व्युत्पत्ति
संगीत-साधना एंवम् शरीर के सप्त चक्रों का अन्तर्सम्बन्ध
संगीत-साधना एंवम् शरीर के सप्त चक्रों का अन्तर्सम्बन्ध
संगीत-साधना एंवम् शरीर के सप्त चक्रों का अन्तर्सम्बन्ध
संगीत-साधना एंवम् शरीर के सप्त चक्रों का अन्तर्सम्बन्ध
निष्कर्ष
निष्कर्ष