1 of 22

नवोदय विद्यालय समिति

विषय: हिंदी 'ब' कोर्स

नोएडा-ई-सामग्री

कक्षा - दस

2 of 22

3 of 22

लेखन क्रिया

पत्र लेखन

4 of 22

पत्र,चिट्ठी या खत अपनी बात कहने का एक सशक्त एवं प्रमाणिक माध्यम। उन्नीसवीं एवं बीसवीं शताब्दियों में पत्र ही दो व्यक्तियों के बीच संचार का सबसे विश्वसनीय माध्यम था। संबंधियों अथवा मित्रों की कुशलता जानने के लिए तथा अपनी कुशलता का समाचार देने के लिए पत्र का प्रयोग किया जाता था।

5 of 22

प्रापक

डाकिया

डाकिया

6 of 22

  • आधुनिक युग संचार क्रांति का युग कहा जा सकता है इस युग में संचार क्रांति का तीव्रतम विकास होता चला जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप हमें टेलीफोन, मोबाइल फोन, ईमेल, फैक्स, एस एम एस, व्हाट्सएप इत्यादि मिले।

7 of 22

पत्र का महत्त्व

  • जिस तरह कुंजियां बॉक्स खोलती हैं, उसी प्रकार पत्र हृदय के विभिन्न पटलों को खोलते हैं। मनुष्य की भावनाओं की स्वाभाविक अभिव्यक्ति पत्राचार से भी होती है। निश्छल भावों और विचारों का आदान-प्रदान पत्रों द्वारा ही संभव है।

8 of 22

  • पत्र लेखन दो व्यक्तियों के बीच होता है। इसके द्वारा दो हृदयों का संबंध दृढ होता है। अतः पत्राचार ही एक ऐसा साधन है, जो दूरस्थ व्यक्तियों को भावना की एक संगमभूमि पर ला खड़ा करता है और दोनों में आत्मीय संबंध स्थापित करता है।

9 of 22

  • पति-पत्नी, भाई-बहन, पिता-पुत्र इस प्रकार के हजारों संबंधों की नींव सुदृढ़ करता है। व्यावहारिक जीवन में यह वह सेतु है, जिससे मानवीय संबंधों की परस्परता सिद्ध होती है। अतएव पत्राचार का बड़ा महत्व है।

10 of 22

पत्र लेखन एक कला है

आधुनिक युग में पत्र लेखन को 'कला' की संज्ञा दी गई है। पत्रों में आज कलात्मक अभिव्यक्तियां हो रही हैं। साहित्य में भी इसका उपयोग होने लगा है। जिस पत्र में जितनी स्वाभाविकता होगी, वह उतना ही प्रभावकारी होगा, एक अच्छे पत्र के लिए कलात्मक सौंदर्यबोध और अंतरंग भावनाओं का अभिव्यंजन आवश्यक है।

11 of 22

  • एक पत्र में उसके लेखक की भावनाएं ही व्यक्ति नहीं होती, बल्कि उसका व्यक्तित्व भी उभरता है। इसके लेखक के चरित्र, दृष्टिकोण, संस्कार, मानसिक स्थिति, आचरण इत्यादि सभी एक साथ झलकते हैं। अतः पत्र लेखन एक प्रकार की कलात्मक अभिव्यक्ति है। लेकिन इस प्रकार की अभिव्यक्ति व्यवसायिक पत्रों की अपेक्षा सामाजिक तथा साहित्यिक पत्रों में अधिक होती हैं।

12 of 22

पत्र दो प्रकार के होते हैं--

(i)अनौपचारिक (ii)औपचारिक । विषयवस्तु के आधार पर इन्हें अनौपचारिक एवं औपचारिक पत्र के नाम से जाना जाता है, निजी पत्र अनौपचारिक होते हैं जबकि प्रार्थना पत्र, सरकारी विभगों को लिखे जाने वाले एवं व्यवसायिक पत्र औपचारिक होते हैं।

13 of 22

औपचारिक पत्र का महत्त्व

  • औपचारिक पत्र सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों में अपनी बात कहने का एक सशक्त एवं प्रामाणिक माध्यम है, जिसके द्वारा समय-समय पर अधिकारी एवं कर्मचारी तथा अन्य लोग पत्राचार करते हैं और उसके अनुसार निर्णय लिए जाते हैं। पत्रों को दस्तावेज के रूप में प्रमाण स्वरूप रखा जाता है और जरूरत पड़ने पर साक्ष्य के रूप में दिखाया जाता है। आज संचार के अनेक माध्यम उपलब्ध हैं परंतु पत्र ही प्रामाणिक माना जाता है।

14 of 22

औपचारिक पत्र लिखते समय ध्यान देने योग्य बातें --

i- पत्र भेजने वाले का नाम और पता प्रारंभ में अथवा अंत में लिखना होता है। ii- जिसे पत्र भेजा जाना है, उसका पता सबसे ऊपर लिखे जाने के बाद तारीख लिखी जाती है। iii- संबोधन में 'महोदय' का प्रयोग किया जाता है। यदि पहले जानकारी है कि जहां पत्र भेजा जा रहा है, वह महिला है तो ' महोदया' लिखा जाता है।

15 of 22

  • iv- इन पत्रों में अभिवादन नहीं लिखा जाता। 'महोदय' के तुरन्त बाद अगली पंक्ति के कथ्य प्रारंभ हो जाता है। v- कथ्य सरल एवं स्पष्ट होना आवश्यक होता है। vi- बाईं ओर ही स्वनिर्देश के लिए भवदीय/भवदीया का प्रयोग कर नाम तथा हस्ताक्षर किए जाते हैं।

16 of 22

सरकारी एवं व्यावसायिक(औपचारिक) पत्र का प्रारूप

(क) जिसे पत्र लिखा जा रहा है, उसका नाम, पद नाम तथा पता (ख) दिनांक (ग) संबोधन महोदय/ महोदया (घ) पत्र का कथ्य या विषयवस्त (च) स्वनिर्देश (भवदीय) (छ) पत्र लिखने वाले के हस्ताक्षर या नाम (ज)पत्र लिखने वाले का नाम तथा पता ।

17 of 22

औपचारिक पत्र (प्रार्थना पत्र) प्रधानाचार्य को

पत्र प्रारूप- 1

18 of 22

पत्र प्रारूप-2

कक्षा दसवीं

19 of 22

पत्र प्रारूप- 3

20 of 22

व्यवसायिक पत्र का प्रारूप

21 of 22

औपचारिक पत्र का नमूना

22 of 22