नवोदय विद्यालय समिति
विषय: हिंदी 'ब' कोर्स
नोएडा-ई-सामग्री
कक्षा - दस
लेखन क्रिया
पत्र लेखन
पत्र,चिट्ठी या खत अपनी बात कहने का एक सशक्त एवं प्रमाणिक माध्यम। उन्नीसवीं एवं बीसवीं शताब्दियों में पत्र ही दो व्यक्तियों के बीच संचार का सबसे विश्वसनीय माध्यम था। संबंधियों अथवा मित्रों की कुशलता जानने के लिए तथा अपनी कुशलता का समाचार देने के लिए पत्र का प्रयोग किया जाता था।
प्रापक
डाकिया
डाकिया
पत्र का महत्त्व
पत्र लेखन एक कला है
आधुनिक युग में पत्र लेखन को 'कला' की संज्ञा दी गई है। पत्रों में आज कलात्मक अभिव्यक्तियां हो रही हैं। साहित्य में भी इसका उपयोग होने लगा है। जिस पत्र में जितनी स्वाभाविकता होगी, वह उतना ही प्रभावकारी होगा, एक अच्छे पत्र के लिए कलात्मक सौंदर्यबोध और अंतरंग भावनाओं का अभिव्यंजन आवश्यक है।
पत्र दो प्रकार के होते हैं--
(i)अनौपचारिक (ii)औपचारिक । विषयवस्तु के आधार पर इन्हें अनौपचारिक एवं औपचारिक पत्र के नाम से जाना जाता है, निजी पत्र अनौपचारिक होते हैं जबकि प्रार्थना पत्र, सरकारी विभगों को लिखे जाने वाले एवं व्यवसायिक पत्र औपचारिक होते हैं।
औपचारिक पत्र का महत्त्व
औपचारिक पत्र लिखते समय ध्यान देने योग्य बातें --
i- पत्र भेजने वाले का नाम और पता प्रारंभ में अथवा अंत में लिखना होता है। ii- जिसे पत्र भेजा जाना है, उसका पता सबसे ऊपर लिखे जाने के बाद तारीख लिखी जाती है। iii- संबोधन में 'महोदय' का प्रयोग किया जाता है। यदि पहले जानकारी है कि जहां पत्र भेजा जा रहा है, वह महिला है तो ' महोदया' लिखा जाता है।
सरकारी एवं व्यावसायिक(औपचारिक) पत्र का प्रारूप
(क) जिसे पत्र लिखा जा रहा है, उसका नाम, पद नाम तथा पता (ख) दिनांक (ग) संबोधन महोदय/ महोदया (घ) पत्र का कथ्य या विषयवस्त (च) स्वनिर्देश (भवदीय) (छ) पत्र लिखने वाले के हस्ताक्षर या नाम (ज)पत्र लिखने वाले का नाम तथा पता ।
औपचारिक पत्र (प्रार्थना पत्र) प्रधानाचार्य को
पत्र प्रारूप- 1
पत्र प्रारूप-2
कक्षा दसवीं
पत्र प्रारूप- 3
व्यवसायिक पत्र का प्रारूप
औपचारिक पत्र का नमूना