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BLESSINGS

ॐ ह्रीं अर्हम् नमः

श्रीसद्गुरुभ्यो नमः

ॐ ऐं नमः

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SHREE MATI GYANAY NAMAH

SHREE SHRUT GYANAY NAMAH

SHREE AVADHI GYANAY NAMAH

SHREE MANAH-PARYAV GYANAY NAMAH

SHREE KEVAL GYANAY NAMAH

5 GYAN

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Inspired by:

Yugpradhan Acharyatulya P.P. Panyas Shree Chandrashekhar Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Yashobhushan Vijayji M.S.

P.P. Panyas Shree Manobhushan Vijayji M.S.

Mahaveer Swami Bhav – 16,17 / Slide 19 - 28

Learn & turn part – 2 story NO 3

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  1. १६वे भवमे भगवान का आत्मा राजगृहि नगरी में विश्वभूति नाम के राजकुमार हुए,

उनके चचेरा भाई का नाम विशाखानंदी था।

PICTURE NO. 1

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२) विश्वभूति का विवाह हुआ।

PICTURE NO. 2

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३) विशाखानंदी का भी विवाह हुआ।

PICTURE NO. 3

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४) नगरमे देवलोक समान बहुत ही सुंदर एक उद्यान था उस पुष्प करंडक उद्यान में विश्वभूति अपनी पत्नी को प्रेम कर रहे थे,

उसमे दुसरे किसी को भी जाने की इजाजत नहीं थी, एक दासी ने दूर से वह दृश्य देखा,

उन्होंने विशाखनंदी की मा को यह बात बताई,

उन्होंने अपने पति राजा विश्वनंदी को यह बात बताई, विश्वनंदी राजा को अपने पुत्र विशाखानंदी पर ज्यादा प्यार था।

Picture No. 4

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५) विश्वनंदी राजा ने कपट करके विश्वभूति को पुरुषसिंह राजा से युद्ध के लिए बहुत दूर भेजा।

Picture No. 5

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६) विश्वभूति राजकुमार का शौर्य देखकर पुरुषसिंह राजा ने मैत्री बताई,

उन्हें साथ में लेकर विश्वभूति राजकुमार विश्वनंदी राजा के पास वापस आये ।

Picture No. 6

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७) दुसरे दिन वापस जब पुष्पकरंडक उद्यान में अपनी पत्नी के साथ प्रवेश करने गये, तो विशाखानंदी को उसकी पत्नी के साथ प्रेम क्रीडा करते देखा, द्वारपाल ने प्रवेश के लिए मना किया।

विश्वभूति और उनकी पत्नी को महसूस हुआ कि हमारे साथ कपट हुआ है, विश्वभूति को बहुत ही गुस्सा आया और गुस्से में वृक्ष को जोर से मुष्ठि मारी, उनके प्रहार से सब के सब फल नीचे गिर गये।

Picture No. 7

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८) किंतु इस घटना से विश्वभूति को वैराग्य हुआ और उन्होंने दिक्षा ली।

Picture No. 8

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९) मुनिजीवनमें एक दिन गोचरी के लिए निकले, रास्ते में गाय ने गिरा दिया.

उसी समय सामने से गुजरनेवाले विशाखानंदी जोर से हसने लगा,

विश्वभूति मुनि ने यह देखा और अपनी ताकत दिखाने के लिए गाय को आकाश में उछाली और फिर पकड़ भी ली,

बाद में नियाणा (संकल्प) किया की अगले जनम में मै उसे मारने वाला बनु।

Picture No. 9

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१०) भव नं. १७ में भगवान का आत्मा सातवे देवलोक में उत्पन्न हुआ।

Picture No. 10

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