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कक्षा - छठी

पाठ का नाम - लोकगीत लेखक का नाम - भगवतशरण उपाध्याय शिक्षण विधि - प्रश्नोत्तर शैली

शिक्षक का नाम – वेद प्रकाश शर्मा

जवाहर नवोदय विद्यालय, साहेबगंज, झारखण्ड

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विशिष्ट उद्देश्य

१.लोकगीत परम्परा से परिचित कराना।

२.लोकगीत के प्रति रूचि उत्पन्न करना।

३.लोकगीत के महत्त्व को समझाना।

पूर्वज्ञान

बच्चे संगीत से परिचित हैं।

प्रस्तावना

१. संगीत के प्रकार बताओ।

२. जो गीत अपने ही क्षेत्र या गाँव की बोली में गाए

जाते हैं उन्हें क्या कहते हैं ?

३. लोकगीत कब गाए जाते हैं ?

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प्रकरणः-

बच्चो आज हम लोग श्री भगवतशरण उपाध्याय द्वारा रचित लोकगीत का अध्ययन करेंगे।

प्रथम अन्वितिः-

लोकगीत अपनी........................रस बरसता है।

आदर्श वाचनः-

शिक्षिका द्वारा उचित आरोह अवरोह के साथ स्पष्ट एवं शुद्व रूप से पाठ का वाचन किया गया।

अनुकरण वाचनः- बच्चों द्वारा वाचन कार्य किया गया।

प्रचलित लोकगीत-

१. श्रीराधे गोविन्दा, मन भज ले हरि का प्यारा नाम है।

२. पीतल की मोरी गागरी दिल्ली से मैंने मोल मँगाई।

३. सासुल पनियाँ कैसे जाएँ रसीले दोऊ नैना।

४. होरी खिलत नंदलाल विरज में ,होरी खिलत नंदलाल।

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इस प्रकार गाँवों में आज भी हर रस्म पर ये गीत गाए जाते हैं।लड़के की शादी में सीतापति बरना तथा लड़की का विदाई गीत बहुत प्रसिद्घ है। उबटन के वक्त, मेंहदी के वक्त तथा फेरों के समय पर मंगल गीत गाए जाते हैं।

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उत्तर प्रदेश और बिहार के पश्चिमी प्रदेशों में - चैता, कजरी, बारहमासा खूब गाए जाते हैं।

पहाड़ में - पहाड़ी गीतों का प्रचलन है। गढ़वाल ,किन्नौर, काँगडा. आदि में गाए जाने वाले गीतों को पहाड़ी गीत कहते हैं।

पंजाब में- माहिया हीर रांझा, सोनी महिवाल को लेकर पंजाबी में लोकगीत रचे गए।

राजस्थान में- ढोला मारू की प्रेम गाथाओं के ऊपर राजस्थानी में लोकगीत बड़े चाव से गाए जाते हैं।

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मध्यप्रदेश, दकन, छोटा नागपुर में - आदिवासी जातियाँ गोंड-खांड, ओराँव-मुंडा, भील-संथाल इनके गीतों से दिशाए गूँज उठती हैं।

ब्रज में – होली के अवसर पर रसिया बड़े हर्ष और उल्लास से गाया जाता है

बुन्देलखण्ड में - आल्हा-ऊदल की वीरता को लोकगीत के माध्यम से ही वर्णित किया गया है।

बिहार में - भोजपुरी में बिदेसिया बहुत प्रचलित है।

बंगाल में - बाउल और भतियाली लोकगीत प्रसिद्घ है।

गुजरात में - दलीय गायन के रूप में गरबा है जिसे विशेष विधि से घेरे में घूम-घूमकर औरतें गाती है।

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उत्तर भारत में कहरवा, बिरहा, धोबिया आदि लोकगीत देहात में बहुत गाए जाते हैं। इस प्रकार त्योहारों पर नदियों में नहाते समय के, विवाह के, मटकोड़, ज्योनार के, जन्म आदि अवसरों के अलग-अलग गीत हैं। सच तो यह है कि इन देहाती गीतों के रचयिता कोरी कल्पना को इतना मान न देकर अपने गीतों के विषय रोजमर्रा के बहते जीवन से लेते हैं, जिससे वे सीधे मर्म को छू लेते हैं।इन गीतों में हँसी-मजाक, उलाहना सब समाया हुआ है जो जीवन को सरस बनाता है। इन गीतों में ढोलक, खंजड़ी और मंजीरा ही बजाए जाते हैं।

फिल्मों में भी इनका प्रचलन आज से नहीं बहुत पहले से रहा है। अभी हाल में ही यह गीत -

'' सखी सैंया तो खूबहिं कमात हैं, महँगाई डायन खाए जात है। ''

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१. लोकगीत लोकप्रियता में शास्त्रीय संगीत कैसे भिन्न है ?

उत्तर - अपनी लोच और ताज़गी के कारण ।

  1. लोकगीत कब गाए जाते हैं ?

उत्तर - त्योहारों और विशेष अवसरों पर।

३. लोकगीतों के लिए किन-किन वाद्‌य यंत्रों की जरूरत पड़ती है ?

उत्तर- ढोलक, मंजीरा, झाँझ, करताल ।

४. लोकगीत किसके गीत कहे जाते हैं ?

उत्तर- लोकगीत जनता के गीत कहे जाते हैं।

५. स्त्रियों के खास गीत कौन से हैं ?

उत्तर- त्योहारों के, विवाह के, मटकोड़, ज्योनार के ।

बोध प्रश्न

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पंजाबी

लोकगीत

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गुजरात का लोकगीत

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राजस्थान का लोकगीत

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अनुवर्ती प्रश्नः-

  • लोक शब्द जोड़कर शब्द परिवार बनाइए ।

उत्तर - लोककला, लोकनृत्य, लोकसंस्कृति, लोकसंगीत, लोककथा,

लोकप्रिय ।

  • जिसका प्रथम पद संख्यावाची हो उसे द्विगु समास कहते हैं।

उत्तर - पंचवटी, इकतारा

  • सप्तर्षि, दोपहर, चौराहा, नवरात्र शब्दों का समास विग्रह कीजिए

उत्तर - सात ऋषियों का समूह, दो पहरों का समूह, चार राहों का समूह,

नौ रात्रों का समूह ।

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  1. सही गलत पर निशान लगाइए।

क- लोकगीत को शास्त्रीय संगीत के समान माना जाता है।

ख- आदिवासी जीवन आज भी नियमों की जकड़ में नहीं बँध सका।

ग- बाउल पंजाब का गीत है ।

घ- ढोला-मारू राजस्थान में गाया जाता है ।

बहुविकल्पीय प्रश्नः-

१. भोजपुरी में कौन सा गीत लोक प्रिय है ?

क) पंजाबी, ख) बिदेशिया, ग) पहाड़ी ।

२. गरबा कहाँ का लोकगीत है ?

क) महाराष्ट्र का, ख) राजस्थान का, ग) गुजरात का।

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  1. बुन्देलखंडी बोली में कौन सा गीत गाया जाता है ?

क) आल्हा, ख) रसिया, ग) भतियाली

४. इस पाठ की विधा कौन सी है ?

क) संस्मरण, ख) निबन्ध, ग) कहानी

पुनरावृत्ति प्रश्न :-

१. लोकगीतों का वास्तविक रूप कहाँ देखने को मिलता है ?

२. मध्य प्रदेश की आदिवासी जातियों के नाम लिखिए ।

३. लोकगीत किस बोली में गाए जाते हैं ?

४. कजरी कहाँ का लोकगीत है ?

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गृहकार्यः-

१. लोकगीतों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दीजिए ।

२. ज्यौनार और मटकोड़ के बारे में लिखिए ।

३. इनके रागों के नाम लिखिए ।

४. लोकगीत लिखने वाले कौन होते हैं ?

प्रायोजना कार्यः-

१. अपनी दादी जी या माँ से लोकगीत सुनकर लिखिए और कक्षा में सुनाइए ।

२. रेडियो और टेलीविजन के स्थानीय प्रसारणों में एक नियत समय पर

लोकगीत प्रसारित होते हैं।उन्हें सुनो और लिखो ।

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प्रश्न 1:

निबंध में लोकगीतों के किन पक्षों की चर्चा की गई है? बिंदुओं के रूप में उन्हें लिखो।

उत्तर:

(1) लोकगीतों का हमारे देश में महत्व

(2) लोकगीतों में स्त्रियों का योगदान

(3) लोकगीतों में विभिन्नता (प्रकार)

(4) लोकगीत और शास्त्रीय संगीत

(5) लोकगीतों का विभिन्न अवसरों में प्रयोग

(6) लोकगीतों का इतिहास

(7) लोकगीत और संगीत यंत्र

(8) लोकगीत और उनकी भाषा

(9) नृत्य और लोकगीत

प्रश्न 2:

हमारे यहाँ स्त्रियों के खास गीत कौन-कौन से हैं?

उत्तर:

हमारे यहाँ स्त्रियों के निम्नलिखित खास गीत इस प्रकार हैं-

(1) विवाह के अवसरों पर गाए जाने वाले गीत

(2) जन्म पर गाए जाने वाले गीत

(3) समूहों में रसिकप्रियों और प्रियाओं को छेड़ने वाले गीत

(4) सावन पर गाए जाने वाले गीत

(5) नदियों पर, खेतों पर गाए जाने वाले गीत

(6) संबधियों से प्रेमयुक्त छेड़छाड़ वाले गीत

(7) त्योहारों पर गाए जाने वाले गीत

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प्रश्न 3:

निबंध के आधार पर और अपने अनुभव के आधार पर (यदि तुम्हें लोकगीत सुनने के मौके मिले हैं तो) तुम लोकगीतों की कौन-सी विशेषताएँ बता सकते हो?

उत्तर:

लोकगीतों की निम्नलिखित विशेषताएँ इस प्रकार हैं:-

(i) इनको गाते वक्त़ एक उत्साह उत्पन्न होता है।

(ii) लोकगीतों में गाँवों के जन-जीवन की झलक प्राप्त होती है।

(iii) लोकगीतों को समूह में मिलकर गाया जाता है।

(iv) लोकगीतों को साधारण ढोलक, मंजीरा, मुरली, झाँझ, करतल के साथ गाया जा सकता है।

(v) इनको गाने के लिए संगीत के ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती।

(vi) लोकगीतों से विशेष आनन्द प्राप्त होता है।

(vii) लोकगीत ऊँची आवाज़ में और मस्त होकर गाए जाते हैं।

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प्रश्न 4:

‘पर सारे देश के……अपने-अपने विद्यापति हैं’ इस वाक्य का क्या अर्थ है? पाठ पढ़कर मालूम करो और लिखो।

उत्तर:

इस वाक्य का अर्थ कुछ इस प्रकार है कि पूरब की बोलियों में हमेशा मैथिल-कोकिल विद्यापति के गीत गाए जाते हैं। जिन्होनें इन गीतों की रचना की थी और वो अपने गीतों के कारण पूरब में खासे जाने गए हैं। परन्तु इसके विपरीत सारे देश के अलग-अलग राज्यों में व उनके गाँवों में वहाँ के लोग समय को व अवसर को देखकर स्वयं ही गीतों की रचना करने वाले रचनाकार (विद्यापति) आज भी मौजूद हैं।

प्रश्न 1:

‘लोक’ शब्द में कुछ जोड़कर जितने शब्द तुम्हें सूझें, उनकी सूची बनाओ। इन शब्दों को ध्यान से देखो और समझो कि उनमें अर्थ की दृष्टि से क्या समानता है। इन शब्दों से वाक्य भी बनाओ। जैसे-लोककला।

उत्तर:

लोकतंत्र :- भारत; विश्व में लोकतंत्र का सबसे बड़ा उदाहरण है।

लोकमंच :- लोकमंच में जनता की परेशानियों को उठाया जाता है।

लोकमत :- सरकार को चाहिए कि लोकमत के अनुसार कार्य करे।

लोकवाद्य :- लोगों द्वारा बजाने वाला यंत्र।

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प्रश्न 2:

बारहमासा गीत में साल के बारह महीनों का वर्णन होता है। नीचे विभिन्न अंकों से जुड़े कुछ शब्द दिए गए हैं। इन्हें पढ़ो और अनुमान लगाओ कि इनका क्या अर्थ है और वह अर्थ क्यों है। इस सूची में तुम अपने मन से सोचकर भी कुछ शब्द जोड़ सकते हो

इकतारा

सरपंच

चारपाई

सप्तर्षि

अठन्नी

तिराहा

दोपहर

छमाही

नवरात्र

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इकतारा –

एक तार से बजने वाला यंत्र

सरपंच –

पाँचों पंचो में प्रमुख

चारपाई–

चार पैरों वाली

सप्तर्षि –

सात ऋषियों का समूह

अठन्नी–

पचास पैसे का सिक्का

तिराहा–

जहाँ तीन रास्ते आपस में मिलते हैं

दोपहर–

जब दिन के दो पहर मिलते हो

छमाही–

छह महीने में होने वाला

नवरात्र–

नौ रातों का समूह

उत्तर 2 :

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प्रश्न 3:

को, में, से आदि वाक्य में संज्ञा का दूसरे शब्दों के साथ संबंध दर्शाते हैं। पिछले पाठ (झाँसी की रानी) में तुमने का के बारे में जाना। नीचे मंजरी जोशी की पुस्तक भारतीय संगीत की परंपरा से भारत के एक लोकवाद्य का वर्णन दिया गया है। इसे पढ़ो और रिक्त स्थानों में उचित शब्द लिखो-

तुरही भारत के कई प्रांतों में प्रचलित है। यह दिखने …….. .अंग्रेजी के एस या सी अक्षर ……… तरह होती है। भारत …….. विभिन्न प्रांतों में पीतल या काँसे. …….. बना यह वाद्य अलग-अलग नामों ……… जाना जाता है। धातु की नली ……… घुमाकर एस ……… आकार इस तरह दिया जाता है कि उसका एक सिरा संकरा रहे और दूसरा सिरा घंटीनुमा चौड़ा रहे। फूँक मारने ……… एक छोटी नली अलग ……… जोड़ी जाती है। राजस्थान ……… इसे बर्गू कहते हैं। उत्तर प्रदेश ……… यह तूरी मध्य प्रदेश और गुजरात ……… रणसिंघा और हिमाचल प्रदेश ……… नरसिंघा ……… नाम से जानी जाती है। राजस्थान और गुजरात में इसे काकड़सिंघी भी कहते हैं।

उत्तर:

तुरही भारत के कई प्रांतों में प्रचलित है। यह दिखने में अंग्रेजी के एस या सी अक्षर की तरह होती है। भारत के विभिन्न प्रांतों में पीतल या काँसे से बना यह वाद्य अलग-अलग नामों से जाना जाता है। धातु की नली को घुमाकर एस का आकार इस तरह दिया जाता है कि उसका एक सिरा संकरा रहे और दूसरा सिरा घंटीनुमा चौड़ा रहे। फूँक मारने पर एक छोटी नली अलग से जोड़ी जाती है। राजस्थान में इसे बर्गू कहते हैं। उत्तर प्रदेश में यह तूरी मध्य प्रदेश और गुजरात में रणसिंघा और हिमाचल प्रदेश में नरसिंघा के नाम से जानी जाती है। राजस्थान और गुजरात में इसे काकड़सिंघी भी कहते हैं।